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संशोधित::::: मोबाइल में है कई विकल्प, सही इस्तेमाल करेगा कायाकल्प
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संशोधित::::: मोबाइल में है कई विकल्प, सही इस्तेमाल करेगा कायाकल्प
शिक्षक संवाद
- अमर उजाला कार्यालय में हुए शिक्षक संवाद में पहुंचे कई विद्यालयों के शिक्षक
- नए सत्र में शिक्षा की चुनौतियों के विषय पर की चर्चा, छात्रों को दिए सुझाव
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। कोविड के बाद दिनचर्या का अहम हिस्सा बने मोबाइल छात्रों को कुछ बेहतर करने की प्रेरणा भी दे सकते हैं। इनका सही तरीके से सीमित इस्तेमाल नई संभावनाओं का द्वार खोल सकता है। यह बात सेक्टर-59 स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित शिक्षक संवाद कार्यक्रम के दौरान निष्कर्ष रूप में सामने आई। शिक्षकों ने मोबाइल के अत्याधिक प्रयोग के अलावा सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी, अभिभावकों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया, आर्थिक चुनौतियां, नए नियमों के चलते सख्त रवैया न अपना पाने की मजबूरी समेत कई समस्याओं को भी नए सत्र की चुनौतियां बताया।
शिक्षक संवाद में ज्यादातर शिक्षकों का मानना रहा कि ऑनलाइन मोड में हुई पढ़ाई से बच्चों का अपेक्षित शैक्षिक विकास नहीं हो पाया या जो छोटे बच्चे हैं उनका शुरुआती स्तर मजबूत नहीं हो सका है। पंचशील बालक इंटर कॉलेज के अध्यापक शैलेंद्र उपाध्याय ने कहा कि इस चुनौती का सामना करने के लिए सबसे पहले हमें बच्चों के माता-पिता से बात करनी चाहिए। यह इसलिए क्योंकि बच्चा अधिकतर समय घर में बिताता है। वहीं एमिटी स्कूल से हिंदी विभाग की शिक्षिका अनुराधा सक्सेना ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि माता-पिता का काम केवल फीस देना या बदले में केवल बेहतर अंकों की इच्छा रखना ही नहीं होता बल्कि उन्हें बच्चे के हर एक स्तर की मॉनिटरिंग करनी चाहिए। वह एक बेहतर इंसान बनें, इसके लिए बचपन से ही मानसिक स्तर से उसे तैयार करना चाहिए। सेक्टर-49 स्थित एसडी विद्या स्कूल की शिक्षिका नीतू मनोचा तो ऑनलाइन शिक्षा के छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव को लेकर एक किस्सा साझा करते हुए बताती हैं कि एक छात्र के अभिभावक द्वारा तो यहां तक कहा गया कि बच्चे की परीक्षा ऑनलाइन मोड में ले लीजिए। बच्चा स्कूल नहीं आ पाएगा। यह दर्शाता है कि कहीं ना कहीं मजबूरी में अपनाई गई यह व्यवस्था छात्रों के भविष्य को खोखला कर रही है। यह आगामी सत्र की सबसे बड़ी समस्या है। इससे निपटना हर एक अध्यापक के लिए काफी कठिन रहने वाला है। इसके अलावा नोएडा वर्ल्ड स्कूल की शिक्षिका सुनीता खटाना ने गली मोहल्ले में चल रहे ट्यूशन क्लासेज के खिलाफ बोलते हुए बच्चों के भविष्य पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जहां 10वीं 12वीं पास लोग बच्चों को पढ़ा रहे हैं। यह सबसे बढ़ी परेशानी बनते हैं। ज्यादातर बच्चे उनसे पढ़ते हैं जो कि ठीक नहीं है प्रशिक्षित शिक्षक को पता है कि उसे कब क्या पढ़ाना है। वहीं ऐसे ट्यूशन पढ़ाने वाले लोग बच्चों के पढ़ाई का स्तर गिरा रहे हैं। वहीं डीएवी स्कूल की अध्यापिका रेनु छिब्बर बताती हैं समस्याएं उत्पन्न तो होती हैं लेकिन उसे दूर केवल अभिभावक दूर कर सकते हैं। उन्हें केवल बच्चे पर ध्यान देने की जरूरत है। ऐसा करने पर अच्छे समाज का निर्माण किया जा सकता है।
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गुड पेरेंटिंग बहुत ज्यादा जरूरी
महार्षि विद्या मंदिर स्कूल के प्रधानाचार्य उमेश सिंह सेंगर बताते हैं कि किसी भी बच्चे की नींव उसके मां-बाप बनाते हैं। तो जरूरी है कि वह नींव बहुत मजबूत होनी चाहिए। इस नींव को केवल गुड पेरेंटिंग के जरिए ही मजबूत किया जा सकता है। मां-बाप को बचपन से ही बच्चों को सही गलत का फर्क बताना चाहिए। यहीं से एक बच्चे का निर्माण होता है। यह अगर सफलतापूर्वक हो जाता है तो एक अच्छे समाज का निर्माण होता है।
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अभिभावक समझें जिम्मेदारी
शैलजा कॉन्वेंट स्कूल की प्रिंसिपल प्रवेश शर्मा कहती हैं कि अभिभावकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। शिक्षकों पर ही सब कुछ नहीं छोड़ देना चाहिए। इससे बच्चे लापरवाह हो सकते हैं। सबसे जरूरी यही है कि बच्चे अभिभावकों की निगरानी में रहें।
प्वाइंटर-- -
यह हैं सुझाव
. केवल जायज काम के लिए बच्चों को फोन का इस्तेमाल करने दें।
. बच्चों की मॉनिटरिंग बेहद जरूरी चाहे वह शिक्षक स्तर से हो या अभिभावक स्तर से
. अभिभावक शिक्षकों को केवल एक कर्मचारी ना समझें।
. बचपन से ही बच्चे की परवरिश बेहतर हो
. बच्चों को पढ़ाई में आ रही समस्याओं को शिक्षक व्यक्तिगत तौर पर हल करें।
. सरकारी स्कूलों में पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था हो।
. बच्चों में बढ़ती अनुशासनहीनता को कम करना।
.बच्चों में सुधार के लिए कार्यशालाओं का आयोजन जरूरी।
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इन स्कूलों के शिक्षकों ने की शिरकत
स्कूल का नाम शिक्षक का नाम
एमिटी इंटरनेश्नल स्कूल डॉ अनुराधा सक्सेना
कैंब्रिज स्कूल मनबीर सिंह राठी
विश्व भारती पब्लिक स्कूल उषा
मॉडर्न पब्लिक स्कूल अजय सूर्यवंशी
मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल ज्योति गोदरा, चरणजीत कौर
सरला चोपड़ा डीएवी स्कूल रेनु छिब्बर
इंडस वैली स्कूल अमर चौहान
महार्षि विद्या मंदिर उमेश सिंह सेंगर(प्रिंसिपल)
महामाया बालिका इंटर कॉलेज सैयदा मासूमा, प्रतिभा शर्मा
पंचशील बालक इंटर कॉलेज शैलेंद्र उपाध्याय
एसडी विद्या स्कूल नीतू मनोचा, रश्मि सिंह
यदु पब्लिक स्कूल संदीप शर्मा
ग्रीन वैली अकादमी नोएडा अल्का गुप्ता, अमृता बिष्ट
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज इंदु बाला
शैलजा कॉन्वेंट स्कूल प्रवेश शर्मा(प्रिंसिपल)
श्याम सिंह स्मारक कन्या इंटर कॉलेज महावीर सिंह, संजय कुमार
न्यू नोएडा पब्लिक स्कूल श्वेता त्यागी , विष्णु गुप्ता, रिषभ त्यागी
नोएडा वर्ल्ड स्कूल सुनीता खटाना
श्रीराम पब्लिक स्कूल मोनू यादव
दिल्ली विश्वविद्यालय डॉ सुनीता जेटली (असिस्टेंट प्रोफेसर)
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शिक्षक संवाद
- अमर उजाला कार्यालय में हुए शिक्षक संवाद में पहुंचे कई विद्यालयों के शिक्षक
- नए सत्र में शिक्षा की चुनौतियों के विषय पर की चर्चा, छात्रों को दिए सुझाव
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। कोविड के बाद दिनचर्या का अहम हिस्सा बने मोबाइल छात्रों को कुछ बेहतर करने की प्रेरणा भी दे सकते हैं। इनका सही तरीके से सीमित इस्तेमाल नई संभावनाओं का द्वार खोल सकता है। यह बात सेक्टर-59 स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित शिक्षक संवाद कार्यक्रम के दौरान निष्कर्ष रूप में सामने आई। शिक्षकों ने मोबाइल के अत्याधिक प्रयोग के अलावा सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी, अभिभावकों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया, आर्थिक चुनौतियां, नए नियमों के चलते सख्त रवैया न अपना पाने की मजबूरी समेत कई समस्याओं को भी नए सत्र की चुनौतियां बताया।
शिक्षक संवाद में ज्यादातर शिक्षकों का मानना रहा कि ऑनलाइन मोड में हुई पढ़ाई से बच्चों का अपेक्षित शैक्षिक विकास नहीं हो पाया या जो छोटे बच्चे हैं उनका शुरुआती स्तर मजबूत नहीं हो सका है। पंचशील बालक इंटर कॉलेज के अध्यापक शैलेंद्र उपाध्याय ने कहा कि इस चुनौती का सामना करने के लिए सबसे पहले हमें बच्चों के माता-पिता से बात करनी चाहिए। यह इसलिए क्योंकि बच्चा अधिकतर समय घर में बिताता है। वहीं एमिटी स्कूल से हिंदी विभाग की शिक्षिका अनुराधा सक्सेना ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि माता-पिता का काम केवल फीस देना या बदले में केवल बेहतर अंकों की इच्छा रखना ही नहीं होता बल्कि उन्हें बच्चे के हर एक स्तर की मॉनिटरिंग करनी चाहिए। वह एक बेहतर इंसान बनें, इसके लिए बचपन से ही मानसिक स्तर से उसे तैयार करना चाहिए। सेक्टर-49 स्थित एसडी विद्या स्कूल की शिक्षिका नीतू मनोचा तो ऑनलाइन शिक्षा के छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव को लेकर एक किस्सा साझा करते हुए बताती हैं कि एक छात्र के अभिभावक द्वारा तो यहां तक कहा गया कि बच्चे की परीक्षा ऑनलाइन मोड में ले लीजिए। बच्चा स्कूल नहीं आ पाएगा। यह दर्शाता है कि कहीं ना कहीं मजबूरी में अपनाई गई यह व्यवस्था छात्रों के भविष्य को खोखला कर रही है। यह आगामी सत्र की सबसे बड़ी समस्या है। इससे निपटना हर एक अध्यापक के लिए काफी कठिन रहने वाला है। इसके अलावा नोएडा वर्ल्ड स्कूल की शिक्षिका सुनीता खटाना ने गली मोहल्ले में चल रहे ट्यूशन क्लासेज के खिलाफ बोलते हुए बच्चों के भविष्य पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जहां 10वीं 12वीं पास लोग बच्चों को पढ़ा रहे हैं। यह सबसे बढ़ी परेशानी बनते हैं। ज्यादातर बच्चे उनसे पढ़ते हैं जो कि ठीक नहीं है प्रशिक्षित शिक्षक को पता है कि उसे कब क्या पढ़ाना है। वहीं ऐसे ट्यूशन पढ़ाने वाले लोग बच्चों के पढ़ाई का स्तर गिरा रहे हैं। वहीं डीएवी स्कूल की अध्यापिका रेनु छिब्बर बताती हैं समस्याएं उत्पन्न तो होती हैं लेकिन उसे दूर केवल अभिभावक दूर कर सकते हैं। उन्हें केवल बच्चे पर ध्यान देने की जरूरत है। ऐसा करने पर अच्छे समाज का निर्माण किया जा सकता है।
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गुड पेरेंटिंग बहुत ज्यादा जरूरी
महार्षि विद्या मंदिर स्कूल के प्रधानाचार्य उमेश सिंह सेंगर बताते हैं कि किसी भी बच्चे की नींव उसके मां-बाप बनाते हैं। तो जरूरी है कि वह नींव बहुत मजबूत होनी चाहिए। इस नींव को केवल गुड पेरेंटिंग के जरिए ही मजबूत किया जा सकता है। मां-बाप को बचपन से ही बच्चों को सही गलत का फर्क बताना चाहिए। यहीं से एक बच्चे का निर्माण होता है। यह अगर सफलतापूर्वक हो जाता है तो एक अच्छे समाज का निर्माण होता है।
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अभिभावक समझें जिम्मेदारी
शैलजा कॉन्वेंट स्कूल की प्रिंसिपल प्रवेश शर्मा कहती हैं कि अभिभावकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। शिक्षकों पर ही सब कुछ नहीं छोड़ देना चाहिए। इससे बच्चे लापरवाह हो सकते हैं। सबसे जरूरी यही है कि बच्चे अभिभावकों की निगरानी में रहें।
प्वाइंटर
यह हैं सुझाव
. केवल जायज काम के लिए बच्चों को फोन का इस्तेमाल करने दें।
. बच्चों की मॉनिटरिंग बेहद जरूरी चाहे वह शिक्षक स्तर से हो या अभिभावक स्तर से
. अभिभावक शिक्षकों को केवल एक कर्मचारी ना समझें।
. बचपन से ही बच्चे की परवरिश बेहतर हो
. बच्चों को पढ़ाई में आ रही समस्याओं को शिक्षक व्यक्तिगत तौर पर हल करें।
. सरकारी स्कूलों में पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था हो।
. बच्चों में बढ़ती अनुशासनहीनता को कम करना।
.बच्चों में सुधार के लिए कार्यशालाओं का आयोजन जरूरी।
इन स्कूलों के शिक्षकों ने की शिरकत
स्कूल का नाम शिक्षक का नाम
एमिटी इंटरनेश्नल स्कूल डॉ अनुराधा सक्सेना
कैंब्रिज स्कूल मनबीर सिंह राठी
विश्व भारती पब्लिक स्कूल उषा
मॉडर्न पब्लिक स्कूल अजय सूर्यवंशी
मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल ज्योति गोदरा, चरणजीत कौर
सरला चोपड़ा डीएवी स्कूल रेनु छिब्बर
इंडस वैली स्कूल अमर चौहान
महार्षि विद्या मंदिर उमेश सिंह सेंगर(प्रिंसिपल)
महामाया बालिका इंटर कॉलेज सैयदा मासूमा, प्रतिभा शर्मा
पंचशील बालक इंटर कॉलेज शैलेंद्र उपाध्याय
एसडी विद्या स्कूल नीतू मनोचा, रश्मि सिंह
यदु पब्लिक स्कूल संदीप शर्मा
ग्रीन वैली अकादमी नोएडा अल्का गुप्ता, अमृता बिष्ट
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज इंदु बाला
शैलजा कॉन्वेंट स्कूल प्रवेश शर्मा(प्रिंसिपल)
श्याम सिंह स्मारक कन्या इंटर कॉलेज महावीर सिंह, संजय कुमार
न्यू नोएडा पब्लिक स्कूल श्वेता त्यागी , विष्णु गुप्ता, रिषभ त्यागी
नोएडा वर्ल्ड स्कूल सुनीता खटाना
श्रीराम पब्लिक स्कूल मोनू यादव
दिल्ली विश्वविद्यालय डॉ सुनीता जेटली (असिस्टेंट प्रोफेसर)