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Noida News: बिना जांच-पड़ताल जारी कर दिया था महिला का मृत्यु प्रमाणपत्र
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बनियाठेर(संभल)। कूटरचित तरीके से महिला का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर जमीन बेचने क मामले में तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है। तहसील प्रशासन ने इस मामले में विभागीय जांच शुरू कर दी है। इसमें कई कर्मी फंस सकते हैं, जिन्होंने बिना जांच पड़ताल के महिला का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया था। साथ ही तहसील प्रशासन के अनुसार मामले में विरासत को लेकर आपत्ति दर्ज कराने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। वहीं नामजद ससुराल पक्ष के लोगों का कहना है कि प्रधान ने सात बीघा भूमि में से तीन बीघा भूमि लेने की बात कहते हुए सभी कार्य खुद करने की बात कही और पूरी सात बीघा जमीन अपने नाम कर ली। अभी तक पूरी रकम भी नहीं दी है।
जनपद कासगंज के थाना साहवर के गांव बाजनगर सफेद निवासी देवीलाल ने पिछले दिनों पुलिस अधीक्षक संभल को दिए प्रार्थनापत्र में कहा था कि उसकी बहन लीलावती की शादी संभल के थाना बनियाठेर के गांव अकरौली निवासी विशंभर चंद के साथ हुई थी। शादी के बाद से उनके कोई संतान नहीं हुई। 28 अगस्त 2022 को बहनोई की मृत्यु बाद लीलावती का स्वास्थ्य खराब रहने लगा। इससे वह अपनी बहन को गांव बाजनगर सफेद ले आए। जहां बहन लीलावती ने तीनों भाइयों के नाम वसीयत कर दी थी।
कुछ समय बाद लीलावती की तबीयत और खराब हो गई। उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। जहां 9 मई 2024 को लीलावती की उपचार के दौरान मौत हो गई। बहन द्वारा तीनों भाइयों के नाम की वसीयत को पक्का कराने के लिए जब आवेदन किया गया तो पता चला कि बहन लीलावती के जेठ व देवर के बेटों और अकरौली के ग्राम प्रधान ने हमसाज होकर लीलावती की फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र दाखिल कर 18 मार्च 2024 को मृत्यु होना दर्शाया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वयं ही भूमि को अपने नाम करा लिया।
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इस मामले में थाना बनियाठेर में ग्राम प्रधान व दो अन्य लोगों सहित तीन लोगों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज लगा षड्यंत्र रच फर्जी बैनामा कराने के संबंध में मुकदमा दर्ज है। वहीं इस मामले में तहसील प्रशासन की ओर से भी लापरवाही सामने आ रही है। जांच होने पर कई लोग कार्रवाई के घेरे में आ सकते हैं। मामला सुर्खियों में आने पर तहसील प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
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...तो क्या ग्राम प्रधान ने ही रचा था षड्यंत्र
महिला लीलावती को 51 दिन पहले ही मृत दर्शा कर सात बीघा जमीन ग्राम प्रधान को बेचे जाने के मामले में महिला के ससुराल वाले नामजद अकरौली के ग्राम प्रधान पर ही षड्यंत्र रचने का आरोप लगा रहे हैं। लीलावती के जेठ पन्नालाल के पुत्र मुकेश ने बताया कि महिला की सात बीघा भूमि में से तीन बीघा भूमि बेचने के लिए ग्राम प्रधान ने ही कहा था। साथ ही ग्राम प्रधान ने कहा था कि उसे तीन बीघा जमीन चाहिए। जमीन कैसे नाम होगी ये सब कार्य वह देख लेगा। महिला के निधन से पहले मृत्यु प्रमाणपत्र बना कर बैनामे के कागजात भी ग्राम प्रधान ने ही तैयार कराए थे और उन्हें बैनामे के लिए तहसील बुलाया गया। तहसील पहुंचने पर सात बीघा जमीन का बैनामा करा लिया। ग्राम प्रधान ने 14.80 लाख रुपये में भूमि खरीदी थी। इसमें अभी पूरी रकम भी नहीं मिली है।
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मामला मेरे संज्ञान नहीं था। अब मामला सामने आया है। इसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही विरासत के मामलों में लोकल स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। आपत्ति पर जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-रवि सोनकर, तहसीलदार चंदौसी
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जनपद कासगंज के थाना साहवर के गांव बाजनगर सफेद निवासी देवीलाल ने पिछले दिनों पुलिस अधीक्षक संभल को दिए प्रार्थनापत्र में कहा था कि उसकी बहन लीलावती की शादी संभल के थाना बनियाठेर के गांव अकरौली निवासी विशंभर चंद के साथ हुई थी। शादी के बाद से उनके कोई संतान नहीं हुई। 28 अगस्त 2022 को बहनोई की मृत्यु बाद लीलावती का स्वास्थ्य खराब रहने लगा। इससे वह अपनी बहन को गांव बाजनगर सफेद ले आए। जहां बहन लीलावती ने तीनों भाइयों के नाम वसीयत कर दी थी।
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कुछ समय बाद लीलावती की तबीयत और खराब हो गई। उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। जहां 9 मई 2024 को लीलावती की उपचार के दौरान मौत हो गई। बहन द्वारा तीनों भाइयों के नाम की वसीयत को पक्का कराने के लिए जब आवेदन किया गया तो पता चला कि बहन लीलावती के जेठ व देवर के बेटों और अकरौली के ग्राम प्रधान ने हमसाज होकर लीलावती की फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र दाखिल कर 18 मार्च 2024 को मृत्यु होना दर्शाया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वयं ही भूमि को अपने नाम करा लिया।
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इस मामले में थाना बनियाठेर में ग्राम प्रधान व दो अन्य लोगों सहित तीन लोगों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज लगा षड्यंत्र रच फर्जी बैनामा कराने के संबंध में मुकदमा दर्ज है। वहीं इस मामले में तहसील प्रशासन की ओर से भी लापरवाही सामने आ रही है। जांच होने पर कई लोग कार्रवाई के घेरे में आ सकते हैं। मामला सुर्खियों में आने पर तहसील प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
...तो क्या ग्राम प्रधान ने ही रचा था षड्यंत्र
महिला लीलावती को 51 दिन पहले ही मृत दर्शा कर सात बीघा जमीन ग्राम प्रधान को बेचे जाने के मामले में महिला के ससुराल वाले नामजद अकरौली के ग्राम प्रधान पर ही षड्यंत्र रचने का आरोप लगा रहे हैं। लीलावती के जेठ पन्नालाल के पुत्र मुकेश ने बताया कि महिला की सात बीघा भूमि में से तीन बीघा भूमि बेचने के लिए ग्राम प्रधान ने ही कहा था। साथ ही ग्राम प्रधान ने कहा था कि उसे तीन बीघा जमीन चाहिए। जमीन कैसे नाम होगी ये सब कार्य वह देख लेगा। महिला के निधन से पहले मृत्यु प्रमाणपत्र बना कर बैनामे के कागजात भी ग्राम प्रधान ने ही तैयार कराए थे और उन्हें बैनामे के लिए तहसील बुलाया गया। तहसील पहुंचने पर सात बीघा जमीन का बैनामा करा लिया। ग्राम प्रधान ने 14.80 लाख रुपये में भूमि खरीदी थी। इसमें अभी पूरी रकम भी नहीं मिली है।
मामला मेरे संज्ञान नहीं था। अब मामला सामने आया है। इसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही विरासत के मामलों में लोकल स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। आपत्ति पर जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-रवि सोनकर, तहसीलदार चंदौसी