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Noida News: पत्नी ने शहीद के नामपर सड़क का नाम रखने की मांग की
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शहीद की पत्नी ने बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी के नाम कलेेक्ट्रेट पर सौंपा ज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। मायचा गांव निवासी एक महिला ने शहीद पति के नाम पर सड़क या चौराहे का नाम रखने की मांग की है। इस संबंध में डीएम के नाम प्रशासनिक अफसर को मांग पत्र देकर प्रशासन की ओर से किए गए वादों को पूरा करने के लिए कहा गया है। मांग पत्र में उन्होंने कहा कि वादे के अनुसार परिवार को आवासीय भूमि व रोजगार दिलाया जाए और शहीद की प्रतिमा लगाई जाएं। लंबे समय से शहीद की पत्नी मांगों को पूरा करने के लिए चक्कर लगा रही हैं।
महिला सरोज देवी ने बताया कि 1997 में उनके पति सुरेश सिंह भाटी का चयन सेना में हुआ था। वर्ष 2006 में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के बारामुला सेक्टर में तैनाती थी। 5 जुलाई 2006 को आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में गोली लगने से सरेश भाटी शहीद हो गए थे। उनके सिर में गोली लगी थी। सात जुलाई को गांव में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के पत्नी के अलावा दो बच्चे और माता-पिता है। उनके जाने के बाद परिवार आर्थिक तंगी का सामना कर रहा है। तब प्रशासनिक अफसरों ने शहीद स्तंभ, सड़क का नाम शहीद के नाम पर रखने और आवासीय व कृषि जमीन देने, एक सदस्य की नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला है। डीएम से वादों को पूरा करने की मांग की है।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। मायचा गांव निवासी एक महिला ने शहीद पति के नाम पर सड़क या चौराहे का नाम रखने की मांग की है। इस संबंध में डीएम के नाम प्रशासनिक अफसर को मांग पत्र देकर प्रशासन की ओर से किए गए वादों को पूरा करने के लिए कहा गया है। मांग पत्र में उन्होंने कहा कि वादे के अनुसार परिवार को आवासीय भूमि व रोजगार दिलाया जाए और शहीद की प्रतिमा लगाई जाएं। लंबे समय से शहीद की पत्नी मांगों को पूरा करने के लिए चक्कर लगा रही हैं।
महिला सरोज देवी ने बताया कि 1997 में उनके पति सुरेश सिंह भाटी का चयन सेना में हुआ था। वर्ष 2006 में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के बारामुला सेक्टर में तैनाती थी। 5 जुलाई 2006 को आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में गोली लगने से सरेश भाटी शहीद हो गए थे। उनके सिर में गोली लगी थी। सात जुलाई को गांव में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के पत्नी के अलावा दो बच्चे और माता-पिता है। उनके जाने के बाद परिवार आर्थिक तंगी का सामना कर रहा है। तब प्रशासनिक अफसरों ने शहीद स्तंभ, सड़क का नाम शहीद के नाम पर रखने और आवासीय व कृषि जमीन देने, एक सदस्य की नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला है। डीएम से वादों को पूरा करने की मांग की है।
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