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अधिकारियों के हस्ताक्षर कर फर्जी आवंटन कराने वाला प्राधिकरण का चौकीदार बर्खास्त

Tue, 26 Apr 2022 02:09 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 26 Apr 2022 02:09 AM IST
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The watchman of the authority, who got the fake allotment signed by the officers, was sacked
नोएडा। फर्जी आवासीय आवंटन कराने के मामले में नोएडा प्राधिकरण के चौकीदार नितिन राठी को सीईओ रितु माहेश्वरी ने बर्खास्त कर दिया। वर्ष 2015 में 47 लोगों को फर्जी आवासीय आवंटन के मामले में राठी को निलंबित किया गया था। जांच में सभी मामले सही पाए गए। सोमवार कोे उसे बर्खास्त कर दिया गया।
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प्राधिकरण की ओर से चौकीदार उदयवीर सिंह राठी की सेवाकाल में मौत के बाद पुत्र नितिन राठी को वर्ष 2010 में अनुकंपा के आधार पर चौकीदार की नियुक्ति दी गई थी। इसके बाद शुभांकर बसु ने नितिन राठी पर ढाई लाख रुपये लेकर भूखंड का आवंटन कराने का आरोप लागया था। आरोप था कि उसने प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर सेक्टर-72 में ए-175 प्लॉट आवंटित करा दिया गया। इस एवज में प्राधिकरण के पक्ष में 25.60 लाख रुपये भी जमा कराए। बसु के अलावा 46 अन्य लोगों ने भी राठी के खिलाफ सेक्टर-12, 73 और 122 में प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर फर्जी आवंटन कराने की बात कही। पीड़ितों की ओर से करोड़ों रुपये प्राधिकरण के खाते में जमा कराए गए। मामला सामने आने पर प्राधिकरण ने राठी को 10 जनवरी 2015 को निलंबित कर सेक्टर-20 थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।
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मामले के विवेचना अधिकारी की रिपोर्ट जिला कोर्ट में दायर की गई। इसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतमबुद्ध नगर की ओर से 6 नवंबर 2017 को नितिन राठी पर चार्ज आरोपित किया गया। वहीं, नोएडा प्राधिकरण ने नियमानुसार आरोप पत्र जारी कर राठी का जवाब प्राप्त किया और शिकायतकर्ताओं का पक्ष सुना।
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खोड़ा में ऑफिस खोलकर करता था आवंटन
शिकायतकर्ताओं के लिखित बयान में राठी ने खोड़ा में ग्रीन इंडिया प्लेस मॉल में जिविका कंसल्टेंट नाम से कार्यालय चलाने की बात कही थी। यह नोएडा के नियमावली के खिलाफ है। राठी की ओर से खोड़ा स्थित कार्यालय में बैठकर फर्जी आवंटन पत्र और आवंटन हेतु प्रार्थना पत्र स्वीकार करने के पत्र 47 शिकायतकर्ताओं के पक्ष में फर्जी तरीके से पैसे लेकर जारी किए गए हैं।

47 में से 46 मामलों में प्राधिकरण में जमा कराया गया पैसा
राठी पर आरोप है कि कुल 47 मामलों में से 46 आवासीय भूखंड, आवासीय भवनों के मद में जमा धनराशि की पुष्टि वित्त विभाग की ओर से की जा चुकी है। एक मामले में चालान नंबर अंकित न होने के कारण जमा पैसे का सत्यापन नहीं हो पाया। शिकायतों एवं तथ्यों से यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि फर्जी आवंटन पत्रों को प्राधिकरण के लेटर पैड पर जारी किया गया। जिस पर डिस्पैच नंबर, अधिकारियों की मुहर, नकली हस्ताक्षर आदि राठी की ओर से किए गए। जांच के बाद राठी के ऊपर लगाए गए सभी आरोप सही पाए गए। प्राधिकरण का कहना है कि राठी का काम आर्थिक कदाचार, धोखाधड़ी, अत्यंत गंभीर प्रकृति और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आते हैं। नितिन राठी का आचरण उत्तर प्रदेश राजकीय सेवा आचरण नियमावली 1956 के अंतर्गत विहित प्रावधानों के खिलाफ पाया गया।
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