{"_id":"620ff89801281830a35bca97","slug":"the-studies-of-400-students-of-four-villages-displaced-by-the-airport-stalled-noida-news-noi632844045","type":"story","status":"publish","title_hn":"एयरपोर्ट विस्थापित चार गांवों के 400 विद्यार्थियों की पढ़ाई ठप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एयरपोर्ट विस्थापित चार गांवों के 400 विद्यार्थियों की पढ़ाई ठप
विज्ञापन
ग्रेटर नोएडा (संदीप वर्मा)। कोरोना संक्रमण की वजह से लंबे अरसे तक बंद रहे सभी परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो गई है। वहीं, नोएडा एयरपोर्ट विस्थापित छह गांवों में से चार के विद्यार्थियों की पढ़ाई अभी भी रुकी हुई है। इन गांवों के तीन स्कूलों के शिक्षक एक ही आंगनबाड़ी केंद्र में ही कक्षाएं चलाना चाहते हैं। जबकि विभाग की ओर से अभी तक एक ही गांव के स्कूल आंगनबाड़ी केंद्र में चलाने की इजाजत दी गई है। शिक्षकों के विवाद और कागजी दांवपेच के फेर में फंसकर दो स्कूलों के 166 विद्यार्थी चाहकर भी पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। वहीं चारों गांवों के करीब 250 से अधिक बच्चे दाखिला लेने का इंतजार कर रहे हैं।
बुधवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे नगला गणेशी और रोही गांव के स्कूलों के दस शिक्षक और शिक्षामित्र ने नए बने आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की पढ़ाई कराने की इजाजत मांगी। शिक्षकों का कहना है कि विभाग की ओर से केवल नगला शरीफ स्कूल के बच्चों को ही आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ाने की अनुमति दी गई है। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र में पांच कमरे हैं। ऐसे में दोनों अन्य स्कूलों रोही के 76 बच्चों और नगला गणेशी स्कूल के 90 विद्यार्थियों को पढ़ाया जा सकता है। वहीं, पिछले दो वर्षों से दाखिला नहीं हो पाने के चलते एयरपोर्ट विस्थापित गांव के 250 से अधिक बच्चे भी स्कूल में दाखिला लेकर पढ़ाई करना चाहते हैं। शिक्षकों ने अधिकारियों के साथ बैठक में बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ाई की इजाजत मांगी है लेकिन मामला अभी अनसुलझा ही है।
छह गांवों में थे चार स्कूल
नोएडा एयरपोर्ट के लिए छह गांवों रोही, नगला फूल खां, नगला गणेशी, नगला शरीफ, नगला छीतर और दयातनपुर खेड़ा की भूमि अधिगृहीत की गई है। इन छह गांवों के बच्चे चार स्कूलों में पढ़ते थे। इनमें से दयानतपुर गांव के स्कूल को छोड़कर तीन स्कूलों रोही, नगला गणेशी (इसमें नगला छीतर गांव के बच्चे भी हैं) और नगला शरीफ के स्कूल ध्वस्त कर दिए गए थे। यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण (यीडा) 16 कमरों के स्कूल का निर्माण करा रहा है। हालांकि निर्माण कार्य पूरा होने में करीब एक वर्ष का समय लग सकता है। फिलहाल भवन नहीं होने से दोनों स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई अधर में है।
विज्ञापन
दो वर्षों से बाधित हो रही पढ़ाई
रोही और नगला गणेशी स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि कोरोना के दौरान इन स्कूलों की ऑफलाइन पढ़ाई नहीं हो पा रही है। अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन या लैपटॉप नहीं होने का खामियाजा बच्चे भुगत रहे हैं। अब नियमित कक्षाएं शुरू हो गई हैं। लेकिन गांव के बच्चों की पढ़ाई नहीं शुरू हो सकी है। वहीं, दो वर्षों में नए बच्चों के दाखिले भी नहीं हो पाए हैं। ऐसे में कक्षा-1 और कक्षा-2 तक आने वाले बड़ी संख्या में बच्चे भी दाखिला लेना चाहते हैं।
शिक्षक तीनों स्कूल को आंगनबाड़ी केंद्र में चलाने की मांग कर रहे हैं। तीनों स्कूलों के शिक्षकों को बुलाकर बातचीत की गई है। जल्द ही कोई रास्ता निकाला जाएगा।
- धर्मेंद्र सक्सेना, बीएसए, गौतमबुद्ध नगर
विज्ञापन
बुधवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे नगला गणेशी और रोही गांव के स्कूलों के दस शिक्षक और शिक्षामित्र ने नए बने आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की पढ़ाई कराने की इजाजत मांगी। शिक्षकों का कहना है कि विभाग की ओर से केवल नगला शरीफ स्कूल के बच्चों को ही आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ाने की अनुमति दी गई है। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र में पांच कमरे हैं। ऐसे में दोनों अन्य स्कूलों रोही के 76 बच्चों और नगला गणेशी स्कूल के 90 विद्यार्थियों को पढ़ाया जा सकता है। वहीं, पिछले दो वर्षों से दाखिला नहीं हो पाने के चलते एयरपोर्ट विस्थापित गांव के 250 से अधिक बच्चे भी स्कूल में दाखिला लेकर पढ़ाई करना चाहते हैं। शिक्षकों ने अधिकारियों के साथ बैठक में बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ाई की इजाजत मांगी है लेकिन मामला अभी अनसुलझा ही है।
विज्ञापन
छह गांवों में थे चार स्कूल
नोएडा एयरपोर्ट के लिए छह गांवों रोही, नगला फूल खां, नगला गणेशी, नगला शरीफ, नगला छीतर और दयातनपुर खेड़ा की भूमि अधिगृहीत की गई है। इन छह गांवों के बच्चे चार स्कूलों में पढ़ते थे। इनमें से दयानतपुर गांव के स्कूल को छोड़कर तीन स्कूलों रोही, नगला गणेशी (इसमें नगला छीतर गांव के बच्चे भी हैं) और नगला शरीफ के स्कूल ध्वस्त कर दिए गए थे। यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण (यीडा) 16 कमरों के स्कूल का निर्माण करा रहा है। हालांकि निर्माण कार्य पूरा होने में करीब एक वर्ष का समय लग सकता है। फिलहाल भवन नहीं होने से दोनों स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई अधर में है।
विज्ञापन
दो वर्षों से बाधित हो रही पढ़ाई
रोही और नगला गणेशी स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि कोरोना के दौरान इन स्कूलों की ऑफलाइन पढ़ाई नहीं हो पा रही है। अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन या लैपटॉप नहीं होने का खामियाजा बच्चे भुगत रहे हैं। अब नियमित कक्षाएं शुरू हो गई हैं। लेकिन गांव के बच्चों की पढ़ाई नहीं शुरू हो सकी है। वहीं, दो वर्षों में नए बच्चों के दाखिले भी नहीं हो पाए हैं। ऐसे में कक्षा-1 और कक्षा-2 तक आने वाले बड़ी संख्या में बच्चे भी दाखिला लेना चाहते हैं।
शिक्षक तीनों स्कूल को आंगनबाड़ी केंद्र में चलाने की मांग कर रहे हैं। तीनों स्कूलों के शिक्षकों को बुलाकर बातचीत की गई है। जल्द ही कोई रास्ता निकाला जाएगा।
- धर्मेंद्र सक्सेना, बीएसए, गौतमबुद्ध नगर