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Noida News: पराली संरक्षण बल ने दाैरा करके किसानों से पराली न जलाने की अपील की
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संवाद न्यूज एजेंसी
तरनतारन। तरनतारन के उपायुक्त राहुल, आईएएस के निर्देशानुसार, एसडीएम खुशप्रीत सिंह के नेतृत्व में, पराली संरक्षण बल की एक टीम ने पराली जलाने से रोकने के लिए विभिन्न गांवों का दौरा किया।
टीम में शामिल नायब तहसीलदार नवजोत तिवारी, क्लस्टर अधिकारी एवं कृषि विभाग के प्रतिनिधि डॉ. यादविंदर सिंह, सब इंस्पेक्टर प्रभजीत सिंह ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि पराली जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति कम होती है और मित्र कीट मर जाते हैं। जाने-अनजाने में पराली जलाने से कई बार जान-माल का नुकसान होता है। पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और सांस संबंधी बीमारियां होती हैं। फसल अवशेषों को जलाने से कई सूक्ष्मजीव, कीट, पक्षी विलुप्त हो जाते हैं, जो अधिकतर मिट्टी और फसलों के मित्र होते हैं। इससे भूमि की उर्वरता कम होती है।
नवजोत तिवारी, नायब तहसीलदार, खडूर साहिब ने किसानों से अपील की कि वे बेलर से पराली की गांठें बनाएं या मल्चर से पराली को काटकर हल की सहायता से खेतों में दबाएं। ऐसा करने से भूमि की उर्वरता बढ़ेगी और खाद की लागत भी कम होगी।
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तरनतारन। तरनतारन के उपायुक्त राहुल, आईएएस के निर्देशानुसार, एसडीएम खुशप्रीत सिंह के नेतृत्व में, पराली संरक्षण बल की एक टीम ने पराली जलाने से रोकने के लिए विभिन्न गांवों का दौरा किया।
टीम में शामिल नायब तहसीलदार नवजोत तिवारी, क्लस्टर अधिकारी एवं कृषि विभाग के प्रतिनिधि डॉ. यादविंदर सिंह, सब इंस्पेक्टर प्रभजीत सिंह ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि पराली जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति कम होती है और मित्र कीट मर जाते हैं। जाने-अनजाने में पराली जलाने से कई बार जान-माल का नुकसान होता है। पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और सांस संबंधी बीमारियां होती हैं। फसल अवशेषों को जलाने से कई सूक्ष्मजीव, कीट, पक्षी विलुप्त हो जाते हैं, जो अधिकतर मिट्टी और फसलों के मित्र होते हैं। इससे भूमि की उर्वरता कम होती है।
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नवजोत तिवारी, नायब तहसीलदार, खडूर साहिब ने किसानों से अपील की कि वे बेलर से पराली की गांठें बनाएं या मल्चर से पराली को काटकर हल की सहायता से खेतों में दबाएं। ऐसा करने से भूमि की उर्वरता बढ़ेगी और खाद की लागत भी कम होगी।
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