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Noida News: अब राज्य मानवाधिकार आयोग ने डीएम से मांगी बस हादसे की जांच रिपोर्ट
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- 7 दिसंबर तक देनी होगी रिपोर्ट, 8 दिसंबर को सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी ले चुके हैं मामले का संज्ञान
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। राज्य मानवाधिकार आयोग ने यमुना एक्सप्रेसवे पर 23 सितंबर की रात स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने जिलाधिकारी मेधा रूपम को नोटिस जारी कर मामले की जांच रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने डीएम को 7 दिसंबर 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले को सुनवाई 8 दिसंबर को होगी।
दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही एसी स्लीपर बस में जेवर क्षेत्र में दयानतपुर के पास आग लग गई थी। बस में करीब 35 यात्री सवार थे। हादसे में नौ यात्रियों की जलकर मौत हो गई जबकि 20 से अधिक यात्री किसी तरह बस से बाहर निकलकर बच गए थे। आग लगने के बाद यात्रियों के फंसने और बस में सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठे थे।
दिल्ली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा राजपूत ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी। इसमें बस में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही की जांच की मांग की गई थी।
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चार आरोपी भेजे जा चुके हैं जेल
हादसे के मामले में पुलिस अब तक बस के दो चालक पवन और योगेश दीक्षित, परिचालक रोहित कुमार और राज कल्पना ट्रैवल्स के मैनेजर विकास को गिरफ्तार कर चुकी है। चारों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है। पुलिस बस संचालन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। बस में खराबी की शिकायत चालक-परिचालक की ओर से प्रबंधन तक पहुंचाए जाने के बावजूद बस चलती रही। वहीं, आरटीओ रिकॉर्ड में बस के खिलाफ पहले से कई चालान भी दर्ज होने की बात सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी मांगा जवाब
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी 29 सितंबर को संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से जवाब मांगा था। कोर्ट ने बस में आग लगने के कारण, स्वामित्व, पंजीकरण, परमिट, फिटनेस, बीमा, निर्धारित यात्री क्षमता और निर्माण व अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन से संबंधित जानकारी मांगी है। इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट भी हादसे का स्वतः संज्ञान ले चुका है। हाईकोर्ट ने स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था, परमिट, फिटनेस, निरीक्षण और नियमों के पालन को लेकर संबंधित अधिकारियों से जानकारी मांगी है।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। राज्य मानवाधिकार आयोग ने यमुना एक्सप्रेसवे पर 23 सितंबर की रात स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने जिलाधिकारी मेधा रूपम को नोटिस जारी कर मामले की जांच रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने डीएम को 7 दिसंबर 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले को सुनवाई 8 दिसंबर को होगी।
दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही एसी स्लीपर बस में जेवर क्षेत्र में दयानतपुर के पास आग लग गई थी। बस में करीब 35 यात्री सवार थे। हादसे में नौ यात्रियों की जलकर मौत हो गई जबकि 20 से अधिक यात्री किसी तरह बस से बाहर निकलकर बच गए थे। आग लगने के बाद यात्रियों के फंसने और बस में सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठे थे।
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दिल्ली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा राजपूत ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी। इसमें बस में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही की जांच की मांग की गई थी।
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चार आरोपी भेजे जा चुके हैं जेल
हादसे के मामले में पुलिस अब तक बस के दो चालक पवन और योगेश दीक्षित, परिचालक रोहित कुमार और राज कल्पना ट्रैवल्स के मैनेजर विकास को गिरफ्तार कर चुकी है। चारों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है। पुलिस बस संचालन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। बस में खराबी की शिकायत चालक-परिचालक की ओर से प्रबंधन तक पहुंचाए जाने के बावजूद बस चलती रही। वहीं, आरटीओ रिकॉर्ड में बस के खिलाफ पहले से कई चालान भी दर्ज होने की बात सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी मांगा जवाब
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी 29 सितंबर को संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से जवाब मांगा था। कोर्ट ने बस में आग लगने के कारण, स्वामित्व, पंजीकरण, परमिट, फिटनेस, बीमा, निर्धारित यात्री क्षमता और निर्माण व अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन से संबंधित जानकारी मांगी है। इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट भी हादसे का स्वतः संज्ञान ले चुका है। हाईकोर्ट ने स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था, परमिट, फिटनेस, निरीक्षण और नियमों के पालन को लेकर संबंधित अधिकारियों से जानकारी मांगी है।