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बीट सिपाही से थानेदार तक की भूमिका की होगी जांच
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ग्रेटर नोएडा। नेपाल सीमा पर चीन के दो नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। इससे पहले घरबरा के गेस्ट हाउस और जेपी ग्रींस में आरोपी बिना वीजा के बेखौफ रहकर जिले में अवैध गतिविधियों में लिप्त रहे, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। ऐसे में डीसीपी मीनाक्षी कात्यायन ने पूरे प्रकरण में ईकोटेक-1 और बीटा-2 थाना पुलिस के बीट सिपाही, हलका इंचार्ज और थानेदार की भूमिका की जांच बैठा दी है। जांच एडीसीपी विशाल पांडेय को सौंपी गई है।
सूत्रों का कहना है कि तीन माह पहले कुछ लोगों ने ट्वीट कर पुलिस को घरबरा के गेस्ट हाउस में अवैध गतिविधियों की जानकारी दी थी और पुलिस व आबकारी विभाग ने वहां जाकर जांच भी की, लेकिन इस दौरान कोई कार्रवाई नहीं की गई। ये पहला मामला नहीं है जब क्षेत्र में बिना वीजा के विदेशियों के पकड़े जाने का मामला सामने आया है। इससे पहले भी अफ्रीका के कई नागरिक बिना वीजा के पकड़े और डिपोर्ट किए गए हैं, लेकिन चीन के नागरिक के बिना वीजा के पकड़े जाने के मामले को पुलिस ही नहीं अन्य एजेंसियां भी गंभीरता से ले रही हैं। चीन की गतिविधियां भारत को लेकर लंबे समय से संदिग्ध रही हैं। ग्रेटर नोएडा में कुछ सालों में चीन की कंपनियों ने अपने कारोबार को बढ़ाया है। ऐसे में बड़ी संख्या में चीन के नागरिक यहां कारोबार के सिलसिले में रह रहे हैं, लेकिन अभी तक इसकी जानकारी कोई नहीं दे पाया है कि यहां चीन के कितने नागरिक रह रहे हैं। वहीं, चीन के नागरिकों की बिना वीजा के यहां रहने, अवैध कंपनियों का कागजों में संचालन और गेस्ट हाउस में मौज मस्ती की पार्टियां चलने की जानकारी स्थानीय पुलिस को कैसे नहीं हुई? इसकी जांच के लिए डीसीपी ने आदेश दिए हैं।
इस साल 69 दिन का लाइसेंस, कोरोना काल में किसकी शह पर हुई शराब पार्टी
आबकारी निरीक्षक पीसी दीक्षित ने बताया कि घरबरा गेस्ट हाउस में ऑनलाइन प्रतिदिन का लाइसेंस लिया जाता था। जांच में अब तक इस वर्ष 69 दिन का लाइसेंस लेने की पुष्टि हुई है। वर्ष 2021 और 2020 में कितने दिन लाइसेंस लिया गया इसकी जांच की जा रही है। अब सवाल ये उठता है कोरोना काल के दौरान आरोपी यहां किसकी शह पर शराब पार्टी करते रहे। जिला आबकारी अधिकारी राकेश बहादुर सिंह का कहना है कि ट्विटर पर शिकायत मिलने के बाद भी जांच की गई, लेकिन वहां से विदेशी शराब नहीं मिली और ऑनलाइन लाइसेेंस भी लिया गया था।
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रवि ठक्कर उर्फ नटवर लाल को पुलिस तलाश रही है। उसके संबंध में चीन के लिंक को लेकर कई अपुष्ट जानकारी मिली हैं। आरोपी ने चीन से एमबीबीएस किया है। आरोपियों का मकसद हनीट्रैप-जासूसी, आयात शुल्क की धोखाधड़ी और हवाला के जरिये धन का का हस्तांतरण हो सकता है। सभी एंगल से जांच चल रही है। बीट के सिपाही से लेकर थानेदार की पूरे प्रकरण में भूमिका की भी जांच की जा रही है। - मीनाक्षी कात्यायन, डीसीपी ग्रेटर नोएडा
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सूत्रों का कहना है कि तीन माह पहले कुछ लोगों ने ट्वीट कर पुलिस को घरबरा के गेस्ट हाउस में अवैध गतिविधियों की जानकारी दी थी और पुलिस व आबकारी विभाग ने वहां जाकर जांच भी की, लेकिन इस दौरान कोई कार्रवाई नहीं की गई। ये पहला मामला नहीं है जब क्षेत्र में बिना वीजा के विदेशियों के पकड़े जाने का मामला सामने आया है। इससे पहले भी अफ्रीका के कई नागरिक बिना वीजा के पकड़े और डिपोर्ट किए गए हैं, लेकिन चीन के नागरिक के बिना वीजा के पकड़े जाने के मामले को पुलिस ही नहीं अन्य एजेंसियां भी गंभीरता से ले रही हैं। चीन की गतिविधियां भारत को लेकर लंबे समय से संदिग्ध रही हैं। ग्रेटर नोएडा में कुछ सालों में चीन की कंपनियों ने अपने कारोबार को बढ़ाया है। ऐसे में बड़ी संख्या में चीन के नागरिक यहां कारोबार के सिलसिले में रह रहे हैं, लेकिन अभी तक इसकी जानकारी कोई नहीं दे पाया है कि यहां चीन के कितने नागरिक रह रहे हैं। वहीं, चीन के नागरिकों की बिना वीजा के यहां रहने, अवैध कंपनियों का कागजों में संचालन और गेस्ट हाउस में मौज मस्ती की पार्टियां चलने की जानकारी स्थानीय पुलिस को कैसे नहीं हुई? इसकी जांच के लिए डीसीपी ने आदेश दिए हैं।
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इस साल 69 दिन का लाइसेंस, कोरोना काल में किसकी शह पर हुई शराब पार्टी
आबकारी निरीक्षक पीसी दीक्षित ने बताया कि घरबरा गेस्ट हाउस में ऑनलाइन प्रतिदिन का लाइसेंस लिया जाता था। जांच में अब तक इस वर्ष 69 दिन का लाइसेंस लेने की पुष्टि हुई है। वर्ष 2021 और 2020 में कितने दिन लाइसेंस लिया गया इसकी जांच की जा रही है। अब सवाल ये उठता है कोरोना काल के दौरान आरोपी यहां किसकी शह पर शराब पार्टी करते रहे। जिला आबकारी अधिकारी राकेश बहादुर सिंह का कहना है कि ट्विटर पर शिकायत मिलने के बाद भी जांच की गई, लेकिन वहां से विदेशी शराब नहीं मिली और ऑनलाइन लाइसेेंस भी लिया गया था।
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रवि ठक्कर उर्फ नटवर लाल को पुलिस तलाश रही है। उसके संबंध में चीन के लिंक को लेकर कई अपुष्ट जानकारी मिली हैं। आरोपी ने चीन से एमबीबीएस किया है। आरोपियों का मकसद हनीट्रैप-जासूसी, आयात शुल्क की धोखाधड़ी और हवाला के जरिये धन का का हस्तांतरण हो सकता है। सभी एंगल से जांच चल रही है। बीट के सिपाही से लेकर थानेदार की पूरे प्रकरण में भूमिका की भी जांच की जा रही है। - मीनाक्षी कात्यायन, डीसीपी ग्रेटर नोएडा