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Noida News: पुलिस रिकॉर्ड में धड़कनें थीं बंद, जांच हुई तो चल पड़ीं

Sat, 11 Oct 2025 06:39 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 11 Oct 2025 06:39 PM IST
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The police records showed no heartbeats
---------------- गोरखपुर के लिए उपयोगी।
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-मुकदमों से बचने के लिए खुद को कर दिया था मृत घोषित
- दिल्ली नगर निगम से बनवा लिया था मृत्यु प्रमाण पत्र
-जांच में जिंदा पाए जाने पर आरोपी को किया गया गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मूलरूप से गोरखपुर, उत्तरप्रदेश निवासी वीरेंद्र विमल ने आपराधिक मुकदमों से बचने के लिए खुद को मृत घोषित कर दिया। उसने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) से अपनी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर अदालत में जमा करा दिया था। इसके बाद कोर्ट ने इसके केसों को बंद कर दिया था। मगर दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने आरोपी बदमाश के झूठ से पर्दा उठा कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के गैर जमानती वारंट जारी हो रखे थे। पुलिस ने कोर्ट को आरोपी के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के बारे में जानकारी दे दी है।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने बताया कि आरोपी गांव राजौरा खुर्द, थाना पानीयारा, जिला महाराजगंज यूपी निवासी वीरेंद्र के अदालत में पेश न होने और जाली एमसीडी मृत्यु प्रमाण पत्र के माध्यम से उसे मृत घोषित किए जाने के बाद शाखा की आईएससी यूनिट में तैनात दो इंस्पेक्टरों की टीम ने इस मामले में फिर से जांच करने के आदेश दिए गए थे। डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच और स्थानीय सत्यापन के माध्यम से टीम ने ये पता लगा लिया कि आरोपी की मृत्यु नहीं हुई है। ये भी पता लगा कि न्यायिक प्रक्रिया को धोखा देने के लिए धोखाधड़ी से प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया था। इंस्पेक्टर सतेंद्र पूनिया और सोहन लाल की टीम ने आरोपी को गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि दिल्ली के मुंगेशपुर में रह रहा वीरेंद्र विमल बाहरी उत्तरी जिले के बवाना थाना अंतर्गत घर में सेंधमारी, चोरी और अवैध हथियार रखने के कई मामलों में शामिल रहा है। उसने 24 अगस्त, 2021 को अपनी मौत का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया था।
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आरोपी की ऐसे खुली पोल-
अपराध कुंडली एप्लिकेशन के माध्यम से डिजिटल सत्यापन द्वारा आरोपी की पहचान निर्णायक रूप से स्थापित की गई। फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (एफआरआरएस) ने उसकी वर्तमान तस्वीर का मिलान उसके पिछले पुलिस दस्तावेज़ से किया, जिससे यह संदेह दूर हो गया कि गिरफ्तार व्यक्ति वही व्यक्ति है जिसने अदालत में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जमा किया था। इसके खिलाफ चार आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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ऐसे करता था वारदात-
आरोपी मुख्य रूप से रात में औद्योगिक इकाइयों और आवासीय संपत्तियों को निशाना बनाता था। ये नकदी, इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन चुराता था। वह चोरी के वाहनों का इस्तेमाल आगे की चोरियों को अंजाम देने और पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए करता था।
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