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Noida News: अपने ऊपर हुए हमले को भी साबित न कर सकी पुलिस, आरोपी बरी

Sat, 29 Nov 2025 12:11 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा Updated Sat, 29 Nov 2025 12:11 AM IST
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The police could not even prove the attack on him, the accused was acquitted.
सांकेतिक  - फोटो : सांकेतिक
फिरोजाबाद। एडीजे कोर्ट से पुलिस पर जानलेवा हमले और अवैध हथियार बरामदगी के आरोपी को राहत मिली है। कोर्ट में पुलिस अपने ऊपर हुए हमले को मजबूत साक्ष्य व गवाहों के जरिये साबित न सकी। साक्ष्यों व गवाही के अभाव में अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया।
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रिजवान निवासी पानी की टंकी, रसूलपुर को दक्षिण थाना पुलिस ने 2 अप्रैल 2011 को गोवर्धन की ठार तिराहा के पास से गिरफ्तार किया था। एसआई सीमेंद्र सोलंकी ने केस दर्ज कराया था। आरोप था कि घटना वाली रात को पुलिस ने चेकिंग के दौरान शक होने पर रिजवान को रोका-टोका था, तभी रिजवान ने पुलिस टीम पर फायर कर दिया था। पुलिस ने बल प्रयोग कर रिजवान को दबोच लिया और उसके पास से तमंचा बरामद किया था। कोर्ट ट्रायल में न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों पर गंभीर संदेह जताते हुए कई ऐसी कमियां गिनाईं जो पुलिस की कहानी को संदिग्ध बना गईं। कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि पुलिस के अनुसार आरोपी रिजवान ने 25-30 कदम की दूरी से पुलिस पर फायरिंग की थी, लेकिन किसी भी पुलिसकर्मी को कोई चोट नहीं आई। इससे भी अहम, पुलिस घटना स्थल से चली हुई गोली या खोखा कारतूस बरामद नहीं कर सकी। घटनास्थल एक सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाला तिराहा था, जहां लोगों का आना-जाना बना रहता है। इसके बावजूद किसी भी स्वतंत्र साक्षी को न्यायालय में परीक्षित नहीं कराया। आरोपी से बरामद तमंचे की बैलिस्टिक (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) रिपोर्ट संलग्न नहीं की। कोर्ट ने कहा कि बिना विशेषज्ञ की राय के यह साबित नहीं होता कि आयुध कार्यशील अवस्था में था या नहीं। पुलिस ने गश्त पर रवानगी की जनरल डायरी (जीडी) की मूल प्रति या सत्यापित प्रति न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की। पुलिस के दो गवाहों के बयानों में अंतर था, एक ने कहा कि उसने तमंचा चलाकर नहीं देखा, जबकि दूसरे ने कहा कि चलाकर देखा था। इन संदेहों के चलते कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया।
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