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Noida News: 37.5 क्यूसेक गंगाजल की पाइपलाइन का काम 10 अप्रैल तक होगा पूरा
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-सीईओ ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देश, गंगाजल लाइनों के नेटवर्क को दुरुस्त करने की होगी कवायद
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। 37.5 क्यूसेक गंगाजल की पाइपलाइन का काम 10 अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है। सीईओ ने समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने गंगाजल की लाइनों को दुरुस्त करते हुए नेटवर्क को बेहतर तरीके से क्रियाशील करने को कहा।
समीक्षा बैठक में तीन रेनीवेलों की अनुबंध प्रक्रिया को इसी माह में पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही बाकी बचे तीन रेनीवेलों का टेंडर 31 मार्च तक निकालने को कहा। पानी के स्मार्ट मीटर के तहत लगाए जा रहे बल्क मीटरों के जल खपत के सापेक्ष गणना कर तुलनात्मक अध्ययन करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए जिन शहरों में ऐसे स्मार्ट मीटर प्रभावी हैं उनकी जल राजस्व प्रक्रिया का अध्ययन करते हुए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। सीईओ ने वर्तमान में लगाए जा रहे वाटर मीटरों का डाटा 15 मार्च तक तैयार करने को कहा।
कोंडली ड्रेन के अंतर्गत तैयार हो चुके वेटलैंड के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम शीघ्र स्थापित करने का निर्देश सिंचाई विभाग को दिया गया। एनएसईजेड के इन-सिटु वेटलैंड को 20 मार्च और सेक्टर-135 के वेटलैंड को एक माह में पूरा करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा जल विभाग की ओर से नए सेक्टरों 145, 146, 164, 161 व 162 में जल-सीवर के समस्त कार्यों को उपलब्ध भूमि पर सिविल विभाग से तालमेल बैठाते हुए अनुबंध के मुताबिक जल्द से जल्द काम करने के निर्देश दिए गए।
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शहर में संचालित सभी छह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को एनजीटी के दिशा-निर्देशों के क्रम में आगे की कार्यवाही पूरी करने के निर्देश मिले। शहर में संचालित सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से प्राप्त होने वाले शोधित जल का उपयोग पूरी क्षमता से करने के लिए कहा गया। इसके अलावा प्राधिकरण में कार्यरत सभी विभागों में इस शोधित जल का उपयोग प्रभावी रूप से करने के लिए कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा गया। भविष्य में इस शोधित जल बिक्री के लिए प्रभावी दरों को भी शामिल किया जाएगा। स्वच्छता सर्वेक्षण में वाटर प्लस कैटेगरी के लिए इंदौर में उनके एसटीपी से प्राप्त होने वाले शोधित जल के उपयोग किए जाने वाले प्रबंधों के संबंध में अध्ययन करने को कहा गया है। इसका प्रयोग नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे के सेक्टरों में किया जाएगा।
नोएडा में जल-सीवर नेटवर्क को सुचारु करने की कवायद होगी। इसके अलावा शहर में संचालित 30 ड्रेनों के अंतर्गत एनजीटी के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में प्राधिकरण की ओर से नियुक्त सलाहार एनईईआरई की ओर से प्रस्तुत की गई। इसमें अध्ययन के बाद परियोजना की पूरी रिपोर्ट तैयार होगी। इसमें भविष्य में एसीईओ की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया जाएगा।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। 37.5 क्यूसेक गंगाजल की पाइपलाइन का काम 10 अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है। सीईओ ने समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने गंगाजल की लाइनों को दुरुस्त करते हुए नेटवर्क को बेहतर तरीके से क्रियाशील करने को कहा।
समीक्षा बैठक में तीन रेनीवेलों की अनुबंध प्रक्रिया को इसी माह में पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही बाकी बचे तीन रेनीवेलों का टेंडर 31 मार्च तक निकालने को कहा। पानी के स्मार्ट मीटर के तहत लगाए जा रहे बल्क मीटरों के जल खपत के सापेक्ष गणना कर तुलनात्मक अध्ययन करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए जिन शहरों में ऐसे स्मार्ट मीटर प्रभावी हैं उनकी जल राजस्व प्रक्रिया का अध्ययन करते हुए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। सीईओ ने वर्तमान में लगाए जा रहे वाटर मीटरों का डाटा 15 मार्च तक तैयार करने को कहा।
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कोंडली ड्रेन के अंतर्गत तैयार हो चुके वेटलैंड के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम शीघ्र स्थापित करने का निर्देश सिंचाई विभाग को दिया गया। एनएसईजेड के इन-सिटु वेटलैंड को 20 मार्च और सेक्टर-135 के वेटलैंड को एक माह में पूरा करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा जल विभाग की ओर से नए सेक्टरों 145, 146, 164, 161 व 162 में जल-सीवर के समस्त कार्यों को उपलब्ध भूमि पर सिविल विभाग से तालमेल बैठाते हुए अनुबंध के मुताबिक जल्द से जल्द काम करने के निर्देश दिए गए।
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शहर में संचालित सभी छह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को एनजीटी के दिशा-निर्देशों के क्रम में आगे की कार्यवाही पूरी करने के निर्देश मिले। शहर में संचालित सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से प्राप्त होने वाले शोधित जल का उपयोग पूरी क्षमता से करने के लिए कहा गया। इसके अलावा प्राधिकरण में कार्यरत सभी विभागों में इस शोधित जल का उपयोग प्रभावी रूप से करने के लिए कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा गया। भविष्य में इस शोधित जल बिक्री के लिए प्रभावी दरों को भी शामिल किया जाएगा। स्वच्छता सर्वेक्षण में वाटर प्लस कैटेगरी के लिए इंदौर में उनके एसटीपी से प्राप्त होने वाले शोधित जल के उपयोग किए जाने वाले प्रबंधों के संबंध में अध्ययन करने को कहा गया है। इसका प्रयोग नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के किनारे के सेक्टरों में किया जाएगा।
नोएडा में जल-सीवर नेटवर्क को सुचारु करने की कवायद होगी। इसके अलावा शहर में संचालित 30 ड्रेनों के अंतर्गत एनजीटी के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में प्राधिकरण की ओर से नियुक्त सलाहार एनईईआरई की ओर से प्रस्तुत की गई। इसमें अध्ययन के बाद परियोजना की पूरी रिपोर्ट तैयार होगी। इसमें भविष्य में एसीईओ की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया जाएगा।