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Noida News: संशोधित-पांच जालसाजों के गिरोह ने उड़ाए थे प्राधिकरण के 3.8 करोड़
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पांच जालसाजों के गिरोह ने उड़ाए थे प्राधिकरण के 3.8 करोड़
- अलग-अलग शहरों से नोएडा पहुंचे थे आरोपी, तीन के नाम आए सामने
- मनु पोला को बताया जा रहा मास्टर माइंड, अब्दुल खादर की गिरफ्तारी के बाद आरोपी
10 लाख रुपये मिलने से अब्दुल को
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के खाते से 3.8 करोड़ रुपये निकालने की वारदात के माइस्टमांइड समेत तीन बदमाशों की पहचान कर ली गई है। पुलिस के मुताबिक अलग-अलग शहरों से नोएडा पहुंचे पांच जालसाजों के गिरोह ने वारदात को अंजाम दिया था। सूत्रों के मुताबिक इनमें से तीन की पहचान गिरोह के मास्टरमांइड मनु पोला, राजेश और अब्दुल खादर के रूप में हुई है। पुलिस ने जल्द ही दो और नामों का खुलासा करने की बात कही है। वहीं मामले में फर्जी अकाउंट अधिकारी बनकर खाते से पैसे निकालने वाले जालसाज अब्दुल खादर को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी की सूचना मिलने पर अन्य जालसाज फरार हो गए। जिन्हें पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है। गिरफ्तार अब्दुल के पास से दो विजिटिंग कार्ड, अब्दुल खादर नाम के नोएडा प्राधिकरण का फर्जी आईकार्ड, प्राधिकरण का मुहर, बैंक ऑफ इंडिया के दो नकदी निकासी फॉर्म, आधार कार्ड, पैन कार्ड बरामद हुए हैं।
पुलिस पूछताछ में अब्दुल ने बताया कि मनु पोला ने उसे आईकार्ड, विजिटिंग कार्ड और मोहर आदि बनवाकर दिए थे। मनु ने ही उसे फर्जी कागजात देकर विकास प्राधिकरण की एफडी का खाता खोलने के लिए भेजा था। इसके लिए उसे 10 लाख रुपये मिलने थे। प्राधिकरण का अधिकारी बनकर अब्दुल ने बैंक में खाता खुलवाया। खाता खुलवाने के बाद उसने मैनेजर से एफडी बनाने को कहा। मैनेजर ने उसे 30 जून तक एफडी बनाने को कहा। बैंक मैनेजर से ठेकेदारों के लिए तीन अलग-अलग नामों के खाते खुलवाए। उसने 23 जून को बैंक मैनेजर से 200 करोड़ रुपये खाते में आने की बात कही। राशि 26 जून को ट्रांसफर की गई। अब्दुल का कहना है कि मनु पोला और राजेश उसे जैसा बोलते थे। वह बैंक में वही काम करता था।
खाता खोलने में देरी पर अब्दुल ने दी थी धमकी
मैनेजर ने जब खाता खोलने में देरी की तो अब्दुल ने मैनेजर को धमकाते हुए सारे पैसे किसी दूसरे बैंक में जमा करने की धमकी दी थी। इसके बाद मैनेजर ने तुरंत खाता खोल दिया था। इस दौरान तीन फर्जी खाताधारकों को भी अब्दुल अपने साथ मैनेजर के पास ले गया था। 30 जून को खाता खोलने के बाद मैनेजर से करेंट अकाउंट में 3.8 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद मनु पोला के निर्देश पर उसने पूरी राशि गुजरात के 15 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा दी।
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मैनेजर के वेरिफिकेशन के सवाल पर अब्दुल ने उलझाया
बैंक मैनेजर ने जब खाते के वेरिफिकेशन के लिए बोला तो अब्दुल ने मैनेजर को उलझाते हुए कहा कि मामले में देरी हुई तो पैसा डिपार्टमेंट बोर्ड में वापस चला जाएगा। पहली जून को मनु पोला और उसके साथियों ने अब्दुल को फिर से बैंक भेजा। वहां अब्दुल ने मैनेजर को तीन-तीन करोड़ रुपये तीन खातों में डालने के लिए फर्जी पत्र दिया। बैंक मैनेजर ने शनिवार होने की बात करते हुए सोमवार को काम होने की बात कही। उसके बाद मनु पोला ने अब्दुल को बैंक नहीं जाने के निर्देश दिया। उसका कहना था कि मैनेजर को शक हो गया है। मनु ने पैसे में से हिस्सा देने के लिए बुलाया, जहां पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
देश के अलग-अलग स्थानों से जालसाजों को किया गया था इकट्ठा
नोएडा प्राधिकरण के पैसों की ठगी के लिए देश के अलग-अलग स्थानों से पांच जालसाजों को बुलाया गया था। पांचों आरोपियों को अलग-अलग काम बांटे गए थे। आरोपियों ने 200 करोड़ रुपये उड़ाने की सजिश रची थी। मास्टर माइंड मनुपोला सभी को व्हाट्सएप से निर्देश देता था। अब्दुल खादिर के पकड़े जाने की सूचना मिलने पर मनु फ्लाइट से कोलकाता भाग गया। सूत्रों का कहना है कि अब्दुल ने हायर किए जाने की बात कही थी। यह भी बताया जा रहा है कि अब्दुल और मनु पोला चार वर्ष पहले किसी अन्य के जरिए पुडुचेरी में मिले थे। इसके बाद साथ काम करने लगे। दूसरे अन्य आरोपियों को एक दूसरे के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।
नोएडा के होटल में रुक कर दो महीने तक की थी रेकी
सूत्रों का कहना है कि नोएडा के सेक्टर-32 स्थित होटल में पांचों जालसाज रुके थे। करीब दो महीने तक इन्होंने रेकी की थी। आरोपियों ने बैंक और प्राधिकरण के कई चक्कर लगाए थे। बैंक में अब्दुल प्राधिकरण का अकाउंट्स ऑफिसर बनकर जाता था। इन लोगों ने फर्जी पहचान पत्र बनवाए थे। प्राधिकरण के पैसे आने-जाने को लेकर सूचनाएं इकट्ठी की थी। बताया जा रहा है कि यहां सफल होने के बाद गिरोह के सदस्य ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले थे। गिरोह का मास्टरमाइंड वहां भी रेकी करने गया हुआ था। इनके पास एक डिजायर गाड़ी भी थी, जिसकी पुलिस को तलाश है। पुलिस ने इसके लिए कई सीसीटीवी चेक किए हैं।
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- अलग-अलग शहरों से नोएडा पहुंचे थे आरोपी, तीन के नाम आए सामने
- मनु पोला को बताया जा रहा मास्टर माइंड, अब्दुल खादर की गिरफ्तारी के बाद आरोपी
10 लाख रुपये मिलने से अब्दुल को
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के खाते से 3.8 करोड़ रुपये निकालने की वारदात के माइस्टमांइड समेत तीन बदमाशों की पहचान कर ली गई है। पुलिस के मुताबिक अलग-अलग शहरों से नोएडा पहुंचे पांच जालसाजों के गिरोह ने वारदात को अंजाम दिया था। सूत्रों के मुताबिक इनमें से तीन की पहचान गिरोह के मास्टरमांइड मनु पोला, राजेश और अब्दुल खादर के रूप में हुई है। पुलिस ने जल्द ही दो और नामों का खुलासा करने की बात कही है। वहीं मामले में फर्जी अकाउंट अधिकारी बनकर खाते से पैसे निकालने वाले जालसाज अब्दुल खादर को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी की सूचना मिलने पर अन्य जालसाज फरार हो गए। जिन्हें पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है। गिरफ्तार अब्दुल के पास से दो विजिटिंग कार्ड, अब्दुल खादर नाम के नोएडा प्राधिकरण का फर्जी आईकार्ड, प्राधिकरण का मुहर, बैंक ऑफ इंडिया के दो नकदी निकासी फॉर्म, आधार कार्ड, पैन कार्ड बरामद हुए हैं।
पुलिस पूछताछ में अब्दुल ने बताया कि मनु पोला ने उसे आईकार्ड, विजिटिंग कार्ड और मोहर आदि बनवाकर दिए थे। मनु ने ही उसे फर्जी कागजात देकर विकास प्राधिकरण की एफडी का खाता खोलने के लिए भेजा था। इसके लिए उसे 10 लाख रुपये मिलने थे। प्राधिकरण का अधिकारी बनकर अब्दुल ने बैंक में खाता खुलवाया। खाता खुलवाने के बाद उसने मैनेजर से एफडी बनाने को कहा। मैनेजर ने उसे 30 जून तक एफडी बनाने को कहा। बैंक मैनेजर से ठेकेदारों के लिए तीन अलग-अलग नामों के खाते खुलवाए। उसने 23 जून को बैंक मैनेजर से 200 करोड़ रुपये खाते में आने की बात कही। राशि 26 जून को ट्रांसफर की गई। अब्दुल का कहना है कि मनु पोला और राजेश उसे जैसा बोलते थे। वह बैंक में वही काम करता था।
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खाता खोलने में देरी पर अब्दुल ने दी थी धमकी
मैनेजर ने जब खाता खोलने में देरी की तो अब्दुल ने मैनेजर को धमकाते हुए सारे पैसे किसी दूसरे बैंक में जमा करने की धमकी दी थी। इसके बाद मैनेजर ने तुरंत खाता खोल दिया था। इस दौरान तीन फर्जी खाताधारकों को भी अब्दुल अपने साथ मैनेजर के पास ले गया था। 30 जून को खाता खोलने के बाद मैनेजर से करेंट अकाउंट में 3.8 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद मनु पोला के निर्देश पर उसने पूरी राशि गुजरात के 15 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा दी।
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मैनेजर के वेरिफिकेशन के सवाल पर अब्दुल ने उलझाया
बैंक मैनेजर ने जब खाते के वेरिफिकेशन के लिए बोला तो अब्दुल ने मैनेजर को उलझाते हुए कहा कि मामले में देरी हुई तो पैसा डिपार्टमेंट बोर्ड में वापस चला जाएगा। पहली जून को मनु पोला और उसके साथियों ने अब्दुल को फिर से बैंक भेजा। वहां अब्दुल ने मैनेजर को तीन-तीन करोड़ रुपये तीन खातों में डालने के लिए फर्जी पत्र दिया। बैंक मैनेजर ने शनिवार होने की बात करते हुए सोमवार को काम होने की बात कही। उसके बाद मनु पोला ने अब्दुल को बैंक नहीं जाने के निर्देश दिया। उसका कहना था कि मैनेजर को शक हो गया है। मनु ने पैसे में से हिस्सा देने के लिए बुलाया, जहां पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
देश के अलग-अलग स्थानों से जालसाजों को किया गया था इकट्ठा
नोएडा प्राधिकरण के पैसों की ठगी के लिए देश के अलग-अलग स्थानों से पांच जालसाजों को बुलाया गया था। पांचों आरोपियों को अलग-अलग काम बांटे गए थे। आरोपियों ने 200 करोड़ रुपये उड़ाने की सजिश रची थी। मास्टर माइंड मनुपोला सभी को व्हाट्सएप से निर्देश देता था। अब्दुल खादिर के पकड़े जाने की सूचना मिलने पर मनु फ्लाइट से कोलकाता भाग गया। सूत्रों का कहना है कि अब्दुल ने हायर किए जाने की बात कही थी। यह भी बताया जा रहा है कि अब्दुल और मनु पोला चार वर्ष पहले किसी अन्य के जरिए पुडुचेरी में मिले थे। इसके बाद साथ काम करने लगे। दूसरे अन्य आरोपियों को एक दूसरे के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।
नोएडा के होटल में रुक कर दो महीने तक की थी रेकी
सूत्रों का कहना है कि नोएडा के सेक्टर-32 स्थित होटल में पांचों जालसाज रुके थे। करीब दो महीने तक इन्होंने रेकी की थी। आरोपियों ने बैंक और प्राधिकरण के कई चक्कर लगाए थे। बैंक में अब्दुल प्राधिकरण का अकाउंट्स ऑफिसर बनकर जाता था। इन लोगों ने फर्जी पहचान पत्र बनवाए थे। प्राधिकरण के पैसे आने-जाने को लेकर सूचनाएं इकट्ठी की थी। बताया जा रहा है कि यहां सफल होने के बाद गिरोह के सदस्य ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले थे। गिरोह का मास्टरमाइंड वहां भी रेकी करने गया हुआ था। इनके पास एक डिजायर गाड़ी भी थी, जिसकी पुलिस को तलाश है। पुलिस ने इसके लिए कई सीसीटीवी चेक किए हैं।