{"_id":"6907586ecc2abdf40100f783","slug":"the-funeral-procession-of-three-friends-was-taken-out-together-every-eye-was-moist-grnoida-news-c-23-1-lko1064-79479-2025-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: एक साथ उठी तीन दोस्तों की अर्थी, हर आंख दिखी नम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: एक साथ उठी तीन दोस्तों की अर्थी, हर आंख दिखी नम
विज्ञापन
परिजनों ने अब तक दादरी पुलिस को नहीं दी तहरीर
संवाद न्यूज एजेंसी
दादरी। कोतवाली दादरी क्षेत्र में सड़क हादसे में मरने वाले तीनों दोस्तों के शव शनिवार रात में करीब साढ़े 10 बजे गांव में पहुंचे। शवों को देख परिजन, ग्रामीण बिलख उठे। गमगीन माहौल में तीनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। रविवार शाम तक पुलिस को तहरीर नहीं मिली थी।
गांव शेरपुर निवासी रोहित, मोंटू, श्वेत की दादरी कोतवाली क्षेत्र में हायर कंपनी के पास मोड़ पर डंपर की टक्कर से मौत हो गई थी। तीनों सुरक्षा बल में भर्ती होने की तैयारी कर रहे थे। परिजनों ने शासन, प्रशासन से आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है। रविवार को गांव में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के बुजुर्ग धर्मा, दुलीचंद, खचेड़ू का कहना है कि उन्होंने पहली बार एक साथ तीन युवाओं की अर्थियां उठती देखी हैं।
पिता विनोद ने बताया कि मोंटू परिवार में सबसे बड़ा था। छोटा बेटा दीपांशु हाईस्कूल, बेटी पारूल कक्षा आठ में है। वह पंचर लगाते हैं। श्वेत के पिता राजकुमार ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं। श्वेत उनका बड़ा बेटा था। छोटा बेड़ा स्पर्श हाईस्कूल का छात्र है। श्वेत के सफल होने से परिवार के हालात बदल जाएंगे यही सोचा था। रोहित के पिता जितेंद्र ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं। रोहित उनका छोटा बेटा था।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
दादरी। कोतवाली दादरी क्षेत्र में सड़क हादसे में मरने वाले तीनों दोस्तों के शव शनिवार रात में करीब साढ़े 10 बजे गांव में पहुंचे। शवों को देख परिजन, ग्रामीण बिलख उठे। गमगीन माहौल में तीनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। रविवार शाम तक पुलिस को तहरीर नहीं मिली थी।
गांव शेरपुर निवासी रोहित, मोंटू, श्वेत की दादरी कोतवाली क्षेत्र में हायर कंपनी के पास मोड़ पर डंपर की टक्कर से मौत हो गई थी। तीनों सुरक्षा बल में भर्ती होने की तैयारी कर रहे थे। परिजनों ने शासन, प्रशासन से आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है। रविवार को गांव में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के बुजुर्ग धर्मा, दुलीचंद, खचेड़ू का कहना है कि उन्होंने पहली बार एक साथ तीन युवाओं की अर्थियां उठती देखी हैं।
विज्ञापन
पिता विनोद ने बताया कि मोंटू परिवार में सबसे बड़ा था। छोटा बेटा दीपांशु हाईस्कूल, बेटी पारूल कक्षा आठ में है। वह पंचर लगाते हैं। श्वेत के पिता राजकुमार ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं। श्वेत उनका बड़ा बेटा था। छोटा बेड़ा स्पर्श हाईस्कूल का छात्र है। श्वेत के सफल होने से परिवार के हालात बदल जाएंगे यही सोचा था। रोहित के पिता जितेंद्र ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं। रोहित उनका छोटा बेटा था।
विज्ञापन