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Noida News: मिट्टी हुई फसल, अब गेहूं के लिए करना पड़ेगा संघर्ष
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सिरसा। घग्गर के तटबंधों पर निगरानी करते हुए सिंचाई विभाग के कर्मचारी। सूचना विभाग
सिरसा। घग्गर नदी के बहाव में आने वाली फसलों के कारण किसानों के हालत खराब हो गए हैं। बहाव क्षेत्र में आने वाली भूमि पर अब मिट्टी की परत जम जाएगी। यह परत हटाने के लिए किसानों को हजारों रुपये प्रति एकड़ खर्च करना होगा। खर्च करने के साथ-साथ इसमें वक्त लगेगा और किसानों के लिए गेहूं की अगली फसल लेना मुनासिब नहीं हो पाएगा।
नरमा, ग्वार, धान और बाजरे की फसल में ज्यादा नुकसान हुआ है। ओटू हेड पर लगातार पानी कम हो रहा है। मौजूदा समय में 25,500 क्यूसेक पानी की मात्रा है। सितंबर माह में मौसम साफ होने के साथ ही पनिहारी एरिया में फसलों का पानी जरूर सूख जाएगा, लेकिन गांव मल्लेवाला, खैरेकां, झोरड़नाली में पानी सूखने की उम्मीद सितंबर माह में नहीं है। अभी यह घग्गर के बहाव क्षेत्र में है और यहां पर पानी बह रहा है।
ऐसे में अक्तूबर माह के अंत तक इस हजारों एकड़ भूमि से पानी सूखेगा। वहीं, चोपटा क्षेत्र में सेम के एरिया के पानी में भी गेहूं की फसल होने की उम्मीद न के बराबर है। ऐसे में सभी समीकरण मिलकर एक निष्कर्ष निकालते हैं कि हजारों एकड़ भूमि बिना गेहूं की फसल के रहने वाली है। ऐसे में छह माह की किसान की मेहनत का कोई मोल नहीं मिलेगा।
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पक्के तटबंधों पर काम जारी
भले ही किसान को नुकसान उठाना पड़ रहा है और घग्गर का पानी कम हो रहा है। इसके बाद भी प्रशासन पक्के तटबंधों पर मजबूती के साथ खड़ा है। इन तटबंधों को मजबूत करने का काम जारी है। वहीं, अधिकारी रात के समय में जाकर गांवों का निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि कोई हादसा न हो।
झोरड़नाली का अब कई माह तक के लिए कटा केलनियां से संपर्क
गांव झोरड़नाली का गांव केलनियां से संपर्क पूरी तरह से कट गया है। क्योंकि कटाव के चलते इस क्षेत्र में आठ फीट तक पानी भर चुका है, जो अभी निरंतर बह रहा है। इस कारण झोरड़नाली के टूटे पुल का निर्माण कार्य भी प्रशासन शुरू नहीं कर सकता है। जब तक पुल का निर्माण नहीं होगा, ग्रामीणों का केलनियां से संपर्क टूटा रहेगा। वहीं, शहर आने के लिए 30 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर उन्हें करना होगा।
ठेके पर 70 से 90 हजार रुपये प्रति एकड़ है रकबा
भूमि ठेके पर लेने वाले किसान कर्ज में डूब गए हैं। उक्त किसानों ने 70 से 90 हजार रुपये प्रति एकड़ ठेके पर ले रखी है। गांव अहमदपुर के देवीलाल ने बताया कि वह चार एकड़ भूमि के मालिक हैं। नदी में बहाव में उन्होंने तीन एकड़ भूमि 82 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से ठेके पर ली हुई है। इस तीन एकड़ भूमि पर प्रति एकड़ 25 हजार रुपये खर्च आ चुका है, अन्य आना बाकी था। मौजूदा समय में नदी के बहाव में आने के कारण पूरी भूमि जलमग्न हो चुकी है। धान की अच्छी फसल होने की उम्मीद थी, जो अब टूट चुकी है। सरकार से मांग है कि मुआवजा दिया जाए, ताकि आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े।
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नरमा, ग्वार, धान और बाजरे की फसल में ज्यादा नुकसान हुआ है। ओटू हेड पर लगातार पानी कम हो रहा है। मौजूदा समय में 25,500 क्यूसेक पानी की मात्रा है। सितंबर माह में मौसम साफ होने के साथ ही पनिहारी एरिया में फसलों का पानी जरूर सूख जाएगा, लेकिन गांव मल्लेवाला, खैरेकां, झोरड़नाली में पानी सूखने की उम्मीद सितंबर माह में नहीं है। अभी यह घग्गर के बहाव क्षेत्र में है और यहां पर पानी बह रहा है।
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ऐसे में अक्तूबर माह के अंत तक इस हजारों एकड़ भूमि से पानी सूखेगा। वहीं, चोपटा क्षेत्र में सेम के एरिया के पानी में भी गेहूं की फसल होने की उम्मीद न के बराबर है। ऐसे में सभी समीकरण मिलकर एक निष्कर्ष निकालते हैं कि हजारों एकड़ भूमि बिना गेहूं की फसल के रहने वाली है। ऐसे में छह माह की किसान की मेहनत का कोई मोल नहीं मिलेगा।
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पक्के तटबंधों पर काम जारी
भले ही किसान को नुकसान उठाना पड़ रहा है और घग्गर का पानी कम हो रहा है। इसके बाद भी प्रशासन पक्के तटबंधों पर मजबूती के साथ खड़ा है। इन तटबंधों को मजबूत करने का काम जारी है। वहीं, अधिकारी रात के समय में जाकर गांवों का निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि कोई हादसा न हो।
झोरड़नाली का अब कई माह तक के लिए कटा केलनियां से संपर्क
गांव झोरड़नाली का गांव केलनियां से संपर्क पूरी तरह से कट गया है। क्योंकि कटाव के चलते इस क्षेत्र में आठ फीट तक पानी भर चुका है, जो अभी निरंतर बह रहा है। इस कारण झोरड़नाली के टूटे पुल का निर्माण कार्य भी प्रशासन शुरू नहीं कर सकता है। जब तक पुल का निर्माण नहीं होगा, ग्रामीणों का केलनियां से संपर्क टूटा रहेगा। वहीं, शहर आने के लिए 30 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर उन्हें करना होगा।
ठेके पर 70 से 90 हजार रुपये प्रति एकड़ है रकबा
भूमि ठेके पर लेने वाले किसान कर्ज में डूब गए हैं। उक्त किसानों ने 70 से 90 हजार रुपये प्रति एकड़ ठेके पर ले रखी है। गांव अहमदपुर के देवीलाल ने बताया कि वह चार एकड़ भूमि के मालिक हैं। नदी में बहाव में उन्होंने तीन एकड़ भूमि 82 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से ठेके पर ली हुई है। इस तीन एकड़ भूमि पर प्रति एकड़ 25 हजार रुपये खर्च आ चुका है, अन्य आना बाकी था। मौजूदा समय में नदी के बहाव में आने के कारण पूरी भूमि जलमग्न हो चुकी है। धान की अच्छी फसल होने की उम्मीद थी, जो अब टूट चुकी है। सरकार से मांग है कि मुआवजा दिया जाए, ताकि आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े।