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Noida News: एक से होंगे तीनों प्राधिकरण में निर्माण मानक, बदलेंगे कई नियम
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-शासनस्तर पर बन रही औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के बिल्डिंग बायलॉज की यूनिफाइड पॉलिसी
-एफएआर बढ़ाने, ग्राउंड कवरेज की बाध्यता, सेटबैक, ग्रीन व ओपन एरिया कम करने की तैयारी
माई सिटी रिपोर्टर,
नोएडा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना समेत प्रदेश के सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरण में बिल्डिंग बायलॉज (भवन उपविधि) को यूनिफाइड पॉलिसी शासन स्तर से लागू करने की तैयारी है। इस नई पॉलिसी से जिले के तीनों प्राधिकरण क्षेत्र में ग्रुप हाउसिंग, औद्योगिक इकाई, कार्यालय व आईटी कंपनियों के निर्माण के कई नियम बदलने जा रहे हैं। इसके साथ ही ग्राउंड कवरेज, सेटबैक के नियमों में बदलाव से मकानों को भी नया आकार मिलेगा। यह पॉलिसी महानगरों में कम पड़ती जमीन और बढ़ती मांग को देखते हुए बनाई गई है।
प्रदेश स्तर पर इस पॉलिसी को तैयार करने के लिए बनाई गई समिति ने अपनी सिफारिशों के साथ प्रारूप सौंप दिया है। अब प्रारूप को पॉलिसी बनाने के लिए प्रस्ताव की शक्ल देने के लिए समिति बनाई गई है। औद्योगिक विकास प्राधिकरणों से आपत्ति सुझाव भी मंगवा लिए गए हैं। बृहस्पतिवार को लखनऊ में इसको लेकर अहम बैठक प्रस्तावित है। यूनिफाइड पॉलिसी का प्रारूप तैयार करने वाली समिति में नोएडा व यमुना प्राधिकरण की पूर्व जीएम प्लानिंग शामिल थीं। इसमें भारतीय मानक ब्यूरो की तरफ से नोएडा के लिए 2024 में तैयार किए गए बिल्डिंग बायलॉज का भी अध्ययन किया गया है। भारतीय मानक ब्यूरो की तरफ से दिए गए बायलॉज पर पहले तीनों प्राधिकरण के लिए यूनिफाइड पॉलिसी बनाने की तैयारी थी। इसको लेकर कई बैठकें भी हुई थीं। फिर इसे प्रदेश स्तर पर ले जाया गया और कई बड़े बदलाव की सिफारिश बनाई गई समिति ने की है।
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2010 के बायलाॅज हैं लागू
समिति ने गुजरात, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों तथा सिंगापुर-हांगकांग जैसे वैश्विक शहरों के मॉडल को भी देखा है। नोएडा प्राधिकरण में अभी तक 2010 में बनाए गए बिल्डिंग बायलॉज लागू हैं।
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समिति की सिफारिशें और होने वाले बदलाव-
ग्राउंड कवरेज की बाध्यता को खत्म किया जाना-
प्लॉट का वह भाग जो निर्माण से ढका हुआ होता है ग्राउंड कवरेज होता है। नोएडा, ग्रेनो, यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में अभी तक उद्योग के लिए 35–60 , आवास 35–40 और वाणिज्यिक 30–60 प्रतिशत पर ही निर्माण होता था। समिति की सिफारिश यह है कि लचीलापन देकर इस बाध्यता को हटाया जाए।
ग्रुप हाउसिंग, औद्योगिक, आईटी, वाणिज्यिक प्लॉट का एफएआर बढ़ाया जाना-
फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाए जाने की सिफारिश भी पॉलिसी के प्रारूप में शामिल है। अभी औद्योगिक प्लॉट का एफएआर 0.6 से 2 है, इसे बढ़ाकर 2.5 से 3, ग्रुप हाउसिंग का 2.75 से 3.5 तक है जिसे 3.5 किए जाने, आईटी और संस्थागत का 0.8 से 2.75 है इसे 1.2 से 3 करने और वाणिज्यिक का एफआर 1.2 से 4 तक है जिसे 1.5 से 4 किया जाना प्रस्तावित है।
सेटबैक घटाए जाने की तैयारी-
सेटबैक यानी भवन और भूखंड सीमा के बीच की दूरी को भी सरल किया गया है। मौजूदा समय में बड़े प्लॉट्स में 16 मीटर तक का सेटबैक जरूरी था, अब इसे 3 से 9 मीटर तक किया जाना जरूरी समझा गया है। इसी तरह ग्रीन एरिया की शर्त में भी राहत देना प्रस्तावित किया गया है। अभी अभी तक 25–50% जमीन ग्रीन एरिया के तौर पर छोड़नी होती है। इसे 5 से 10 प्रतिशत किया जा सकता है। एयरपोर्ट व अन्य धरोहर स्थल के आस-पास को छोड़कर ऊंचाई की सीमा से भी छूट मिल सकती है।
पार्किंग नियमों में भी बदलाव हो सकते हैं-
समिति ने सिफारिश की है कि पार्किंग नियमों में राहत दी जाए। अभी औद्योगिक परियोजनाओं में हर 100 वर्गमीटर पर एक पार्किंग जरूरी है, वाणिज्यिक में हर 30 से 100 वर्गमीटर एक पार्किंग का मानक है। अब इसे ढील देकर उद्योग में हर 300 वर्गमीटर पर, समूह आवास में प्रति फ्लैट 1 से 1.5, संस्थानों में 85 से200 वर्गमीटर पर और वाणिज्यिक परियोजनाओं में 50 से 500 वर्गमीटर पर एक पार्किंग स्थान अनिवार्य किया गया है।
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-एफएआर बढ़ाने, ग्राउंड कवरेज की बाध्यता, सेटबैक, ग्रीन व ओपन एरिया कम करने की तैयारी
माई सिटी रिपोर्टर,
नोएडा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना समेत प्रदेश के सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरण में बिल्डिंग बायलॉज (भवन उपविधि) को यूनिफाइड पॉलिसी शासन स्तर से लागू करने की तैयारी है। इस नई पॉलिसी से जिले के तीनों प्राधिकरण क्षेत्र में ग्रुप हाउसिंग, औद्योगिक इकाई, कार्यालय व आईटी कंपनियों के निर्माण के कई नियम बदलने जा रहे हैं। इसके साथ ही ग्राउंड कवरेज, सेटबैक के नियमों में बदलाव से मकानों को भी नया आकार मिलेगा। यह पॉलिसी महानगरों में कम पड़ती जमीन और बढ़ती मांग को देखते हुए बनाई गई है।
प्रदेश स्तर पर इस पॉलिसी को तैयार करने के लिए बनाई गई समिति ने अपनी सिफारिशों के साथ प्रारूप सौंप दिया है। अब प्रारूप को पॉलिसी बनाने के लिए प्रस्ताव की शक्ल देने के लिए समिति बनाई गई है। औद्योगिक विकास प्राधिकरणों से आपत्ति सुझाव भी मंगवा लिए गए हैं। बृहस्पतिवार को लखनऊ में इसको लेकर अहम बैठक प्रस्तावित है। यूनिफाइड पॉलिसी का प्रारूप तैयार करने वाली समिति में नोएडा व यमुना प्राधिकरण की पूर्व जीएम प्लानिंग शामिल थीं। इसमें भारतीय मानक ब्यूरो की तरफ से नोएडा के लिए 2024 में तैयार किए गए बिल्डिंग बायलॉज का भी अध्ययन किया गया है। भारतीय मानक ब्यूरो की तरफ से दिए गए बायलॉज पर पहले तीनों प्राधिकरण के लिए यूनिफाइड पॉलिसी बनाने की तैयारी थी। इसको लेकर कई बैठकें भी हुई थीं। फिर इसे प्रदेश स्तर पर ले जाया गया और कई बड़े बदलाव की सिफारिश बनाई गई समिति ने की है।
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2010 के बायलाॅज हैं लागू
समिति ने गुजरात, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों तथा सिंगापुर-हांगकांग जैसे वैश्विक शहरों के मॉडल को भी देखा है। नोएडा प्राधिकरण में अभी तक 2010 में बनाए गए बिल्डिंग बायलॉज लागू हैं।
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समिति की सिफारिशें और होने वाले बदलाव-
ग्राउंड कवरेज की बाध्यता को खत्म किया जाना-
प्लॉट का वह भाग जो निर्माण से ढका हुआ होता है ग्राउंड कवरेज होता है। नोएडा, ग्रेनो, यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में अभी तक उद्योग के लिए 35–60 , आवास 35–40 और वाणिज्यिक 30–60 प्रतिशत पर ही निर्माण होता था। समिति की सिफारिश यह है कि लचीलापन देकर इस बाध्यता को हटाया जाए।
ग्रुप हाउसिंग, औद्योगिक, आईटी, वाणिज्यिक प्लॉट का एफएआर बढ़ाया जाना-
फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाए जाने की सिफारिश भी पॉलिसी के प्रारूप में शामिल है। अभी औद्योगिक प्लॉट का एफएआर 0.6 से 2 है, इसे बढ़ाकर 2.5 से 3, ग्रुप हाउसिंग का 2.75 से 3.5 तक है जिसे 3.5 किए जाने, आईटी और संस्थागत का 0.8 से 2.75 है इसे 1.2 से 3 करने और वाणिज्यिक का एफआर 1.2 से 4 तक है जिसे 1.5 से 4 किया जाना प्रस्तावित है।
सेटबैक घटाए जाने की तैयारी-
सेटबैक यानी भवन और भूखंड सीमा के बीच की दूरी को भी सरल किया गया है। मौजूदा समय में बड़े प्लॉट्स में 16 मीटर तक का सेटबैक जरूरी था, अब इसे 3 से 9 मीटर तक किया जाना जरूरी समझा गया है। इसी तरह ग्रीन एरिया की शर्त में भी राहत देना प्रस्तावित किया गया है। अभी अभी तक 25–50% जमीन ग्रीन एरिया के तौर पर छोड़नी होती है। इसे 5 से 10 प्रतिशत किया जा सकता है। एयरपोर्ट व अन्य धरोहर स्थल के आस-पास को छोड़कर ऊंचाई की सीमा से भी छूट मिल सकती है।
पार्किंग नियमों में भी बदलाव हो सकते हैं-
समिति ने सिफारिश की है कि पार्किंग नियमों में राहत दी जाए। अभी औद्योगिक परियोजनाओं में हर 100 वर्गमीटर पर एक पार्किंग जरूरी है, वाणिज्यिक में हर 30 से 100 वर्गमीटर एक पार्किंग का मानक है। अब इसे ढील देकर उद्योग में हर 300 वर्गमीटर पर, समूह आवास में प्रति फ्लैट 1 से 1.5, संस्थानों में 85 से200 वर्गमीटर पर और वाणिज्यिक परियोजनाओं में 50 से 500 वर्गमीटर पर एक पार्किंग स्थान अनिवार्य किया गया है।