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Noida News: पीजीआई की गेट लैब बंद होने से रिसर्च ठप, देशभर की जॉइंट परियोजनाओं पर ब्रेक

Mon, 24 Nov 2025 12:13 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 24 Nov 2025 12:13 AM IST
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The closure of PGI's Gate Lab has stalled research, halting joint projects across the country.
चंडीगढ़। पीजीआई की गेट लैब सिर्फ मरीजों की चाल (गेट) जांच का केंद्र नहीं थी बल्कि मेडिकल साइंस और टेक्नोलॉजी के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में काम कर रही थी। लैब के अचानक बंद होने से अब उन कई अहम रिसर्च परियोजनाओं पर रोक लग गई है जिन्हें सीएसआईओ, पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू), पैक और आईआईटी जैसे शीर्ष संस्थानों के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा था। विशेषज्ञ मानते हैं कि लैब का जल्द खुलना न सिर्फ मरीजों के लिए बल्कि ठप पड़े वैज्ञानिक काम को फिर से पटरी पर लाने के लिए भी बेहद जरूरी है।
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गेट लैब में सीएसआईओ के साथ मिलकर बैलेंस सिस्टम वैलिडेशन, फुट प्लेटफॉर्म और सेंसर-आधारित फुट इनसोल्स जैसे उपकरण विकसित किए जा रहे थे। ये डिवाइस मरीज के गेट पैटर्न को मापकर सही इलाज और थेरेपी तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। लैब बंद होने से इन सभी उपकरणों के फील्ड-टेस्ट और वैलिडेशन पूरी तरह रुक गए हैं।
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वहीं, आईआईटी के वैज्ञानिकों के साथ बच्चों में पाई जाने वाली हड्डियों और मांसपेशियों की विकृतियों पर विस्तृत गेट एनालिसिस स्टडी चल रही थी। इस रिसर्च का लक्ष्य था कि कम उम्र में ही डिफॉर्मिटी की पहचान कर भविष्य की बड़ी सर्जरी को रोका जा सके। लैब बंद होने से यह डेटा-आधारित रिसर्च अधर में लटक गया है।
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गेट लैब वह प्लेटफॉर्म थी जहां डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक एक साथ आकर नए मेडिकल डिवाइस, बेहतर इलाज तकनीकें और भारतीय मरीजों के लिए उपयुक्त प्रोटोकॉल विकसित कर रहे थे। लेकिन लैब बंद होते ही यह पूरा इकोसिस्टम थम गया है। वैज्ञानिकों का काम, छात्रों का रिसर्च डेटा और मरीजों की उम्मीदें—सब कुछ फ्रीज़ हो गया है।

पैक और पीयू के ऑर्थोटिक डिवाइस प्रोजेक्ट पर सीधा असर
गेट लैब से मिलने वाले बायोमैकेनिकल डेटा के आधार पर पैक और पीयू की टीमें फुट ड्रॉप मरीजों के लिए कस्टमाइज्ड एएफओे (एंकल–फुट ऑर्थोसिस) और स्ट्रोक मरीजों के लिए स्प्लिंट्स डिजाइन कर रही थीं। ये पूरी तरह पर्सनलाइज्ड मेडिकल डिवाइस होते हैं जिनके लिए गेट टेस्ट अनिवार्य हैं। लैब बंद होने से डिजाइनिंग और प्रोटोटाइप टेस्टिंग पर ब्रेक लग गया है।


इनसेट
दुर्लभ रोगों और जटिल केस मैनेजमेंट में बाधा
गेट लैब का डेटा कई दुर्लभ और जटिल मरीजों के इलाज में आधारभूत भूमिका निभाता है। इनमें रेयर पीडियाट्रिक डिजीजेज़, घुटने-पैर की विकृतियां, अनडायग्नोज्ड न्यूरोमस्कुलोस्केलेटल केस और लंबे फॉलो-अप से जुड़े मरीज शामिल हैं। लैब के बंद रहने से ऐसे कई केस अब इलाज और फॉलो-अप के लिए अटक गए हैं।
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