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Noida News: अध्यापकों को बताया संस्कृत भाषा का महत्व
Fri, 21 Nov 2025 12:22 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Fri, 21 Nov 2025 12:22 AM IST
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प्रशिक्षण शिविर के दौरान मौजूद शिक्षक। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। डायट तेजली में चल रही तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुक्रवार को समापन हो गया। इस प्रशिक्षण शिविर में खंड जगाधरी और रादौर के संस्कृत के कुल 60 अध्यापकों ने भाग लिया। शिविर में नवीन शिक्षण पद्धतियों, भाषा कौशल विकास, व्याकरणिक समझ व नवाचार आधारित शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
शिविर में विशेषज्ञ ममता त्रिखा, राजिंद्र कुमार और अंजू ने आधुनिक शिक्षण संसाधनों, आईसीटी आधारित अध्यापन विधियों, भाषा कौशल विकसित करने वाली व्यावहारिक गतिविधियों, संस्कृत व्याकरण के जटिल नियमों की सरल व्याख्या तथा कक्षा में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने की तकनीक के बारे में बताया। संस्कृत अध्यापक महेंद्र सिंह कलेर, वंदना कांबोज, सुनील शास्त्री, मीनाक्षी अरोड़ा, भूपेश अरोड़ा, मीनाक्षी, मीनू कांबोज ने कहा कि संस्कृत भाषा न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा की धरोहर है, बल्कि आधुनिक भाषाओं और विज्ञान के क्षेत्र में भी उसका योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
ऐसे प्रशिक्षण शिविर संस्कृत शिक्षण की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार लाते हैं। अध्यापकों को नए संसाधनों और गतिविधि आधारित शिक्षण से परिचित होने का अवसर मिलता है। एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और नवाचार को बढ़ावा देने का उत्तम वातावरण तैयार होता है। डाइट तेजली प्रभारी दुष्यंत चहल ने सभी प्रतिभागी संस्कृत अध्यापकों को उनकी उत्कृष्ट सहभागिता के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। शिविर में जयकुमार गोयल, नरेंद्र सिंह राणा, सुधीर कुमार, संजीव कुमार, गीतू साहनी का योगदान रहा।
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जगाधरी। डायट तेजली में चल रही तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुक्रवार को समापन हो गया। इस प्रशिक्षण शिविर में खंड जगाधरी और रादौर के संस्कृत के कुल 60 अध्यापकों ने भाग लिया। शिविर में नवीन शिक्षण पद्धतियों, भाषा कौशल विकास, व्याकरणिक समझ व नवाचार आधारित शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
शिविर में विशेषज्ञ ममता त्रिखा, राजिंद्र कुमार और अंजू ने आधुनिक शिक्षण संसाधनों, आईसीटी आधारित अध्यापन विधियों, भाषा कौशल विकसित करने वाली व्यावहारिक गतिविधियों, संस्कृत व्याकरण के जटिल नियमों की सरल व्याख्या तथा कक्षा में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने की तकनीक के बारे में बताया। संस्कृत अध्यापक महेंद्र सिंह कलेर, वंदना कांबोज, सुनील शास्त्री, मीनाक्षी अरोड़ा, भूपेश अरोड़ा, मीनाक्षी, मीनू कांबोज ने कहा कि संस्कृत भाषा न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा की धरोहर है, बल्कि आधुनिक भाषाओं और विज्ञान के क्षेत्र में भी उसका योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
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ऐसे प्रशिक्षण शिविर संस्कृत शिक्षण की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार लाते हैं। अध्यापकों को नए संसाधनों और गतिविधि आधारित शिक्षण से परिचित होने का अवसर मिलता है। एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और नवाचार को बढ़ावा देने का उत्तम वातावरण तैयार होता है। डाइट तेजली प्रभारी दुष्यंत चहल ने सभी प्रतिभागी संस्कृत अध्यापकों को उनकी उत्कृष्ट सहभागिता के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। शिविर में जयकुमार गोयल, नरेंद्र सिंह राणा, सुधीर कुमार, संजीव कुमार, गीतू साहनी का योगदान रहा।
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