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Noida News: कोरोना के असर से उबरा टैक्सियों का कारोबार
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- रोजाना 40 लाख रुपये तक पहुंचा, एक साल पहले था 28 लाख
- टैक्सियों की संख्या भी बढ़ी, जनवरी से अब तक 881 टैक्सियां हुईं पंजीकृत
हर्ष मिश्रा
नोएडा। टैक्सियों का कारोबार कोरोना के असर से उबरना शुरू हो गया है। बीते साल की तुलना में इस वर्ष 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2022 में 28 लाख रुपये का कारोबार प्रतिदिन होता था, लेकिन इस वर्ष यह 40 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया है। कारोबार बढ़ता देख कैब ड्राइवर भी वापसी करने लगे हैं। साथ ही लोगों ने वाणिज्यिक श्रेणी में वाहनों का पंजीकरण कराना भी शुरू कर दिया है। जनवरी से अब तक 881 कॉमर्शियल वाहन पंजीकृत हुए हैं। जो कि बीते तीन वर्षों में रिकॉर्ड हैं। वर्ष 2020 में 778, 2021 में 249, 2022 में 1097 टैक्सियां ही पंजीकृत हुई हैं। वहीं इस वर्ष के शुरुआती पांच माह के आंकड़ें देखे जाएं तो यह रिकॉर्ड संख्या में दर्ज हुए हैं। कैब एसोसिएशन के पदाधिकारियों का मानना है कि कोरोना का जो बुरा असर ट्रांसपोर्ट सुविधाओं पर पड़ा था, उससे उबरने के दिन शुरू हो गए हैं।
अहम है कि जिले में कुल टैक्सियों की संख्या 13098 है। यह सभी निजी कंपनियों में संचालित होती हैं। नोएडा कैब एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश वर्मा ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि कोरोना के असर से टैक्सियों का कारोबार उबरना शुरू हो गया है। बीते वर्ष एक कैब रोजाना 1500 से 1700 रुपये तक ही कमा पाती थी, जबकि पहली कोरोना लहर के ठीक बाद कमाई शून्य से 500 रुपये तक हो गई थी। अब हालात यह है कि एक कैब रोजाना तीन हजार रुपये तक कमा पा रही है। इससे उसके संचालकों को ईएमआई, टैक्स ड्राइवर को वेतन देने में कोई परेशानी नहीं हो रही है। इस वर्ष के अंत तक हालात और सुधरेंगे। यह आंकड़ा कम से कम पांच हजार रुपये तक पहुंच जाएगा। ऐसी उम्मीद की जा रही है। इसके अलावा उप संभागीय परिवहन अधिकारी सियाराम वर्मा ने बताया कि कॉमर्शियल वाहनों के पंजीकरण में अच्छा खासा उछाल देखने को मिला है। इससे विभाग के रेवेन्यू में भी खासा सुधार हुआ है, जो कि बीते तीन साल से प्रभावित हो रहा था। जिस हिसाब से यह संख्या बढ़ रही है ऐसे मे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्ष के अंत तक लगभग तीन हजार टैक्सियां पंजीकृत हो सकती हैं। ऐसा होने पर लोगों को और भी ज्यादा सुविधा मिल सकेगी।
इस वर्ष इतने हुए पंजीकरण
माह वाहन हुए पंजीकृत
जनवरी 156
फरवरी 122
मार्च 202
अप्रैल 238
मई 163
और बढ़ सकती थी संख्या
एनसीआर में जाने वाली गाड़ियों जैसे- स्कूल वैन, कैब, एम्बुलेंस आदि पर टैक्स ना लगे इसके लिए यूपी कैबिनेट में प्रस्ताव लाया गया था जिसके बाद टैक्सी संचालकों में खुशी का माहौल था, एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश वर्मा ने बताया कि सरकार के इस प्रस्ताव पर अमल नहीं किया गया नहीं तो पंजीकृत टैक्सियों का आंकड़ा और भी अधिक होता।
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- टैक्सियों की संख्या भी बढ़ी, जनवरी से अब तक 881 टैक्सियां हुईं पंजीकृत
हर्ष मिश्रा
नोएडा। टैक्सियों का कारोबार कोरोना के असर से उबरना शुरू हो गया है। बीते साल की तुलना में इस वर्ष 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2022 में 28 लाख रुपये का कारोबार प्रतिदिन होता था, लेकिन इस वर्ष यह 40 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया है। कारोबार बढ़ता देख कैब ड्राइवर भी वापसी करने लगे हैं। साथ ही लोगों ने वाणिज्यिक श्रेणी में वाहनों का पंजीकरण कराना भी शुरू कर दिया है। जनवरी से अब तक 881 कॉमर्शियल वाहन पंजीकृत हुए हैं। जो कि बीते तीन वर्षों में रिकॉर्ड हैं। वर्ष 2020 में 778, 2021 में 249, 2022 में 1097 टैक्सियां ही पंजीकृत हुई हैं। वहीं इस वर्ष के शुरुआती पांच माह के आंकड़ें देखे जाएं तो यह रिकॉर्ड संख्या में दर्ज हुए हैं। कैब एसोसिएशन के पदाधिकारियों का मानना है कि कोरोना का जो बुरा असर ट्रांसपोर्ट सुविधाओं पर पड़ा था, उससे उबरने के दिन शुरू हो गए हैं।
अहम है कि जिले में कुल टैक्सियों की संख्या 13098 है। यह सभी निजी कंपनियों में संचालित होती हैं। नोएडा कैब एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश वर्मा ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि कोरोना के असर से टैक्सियों का कारोबार उबरना शुरू हो गया है। बीते वर्ष एक कैब रोजाना 1500 से 1700 रुपये तक ही कमा पाती थी, जबकि पहली कोरोना लहर के ठीक बाद कमाई शून्य से 500 रुपये तक हो गई थी। अब हालात यह है कि एक कैब रोजाना तीन हजार रुपये तक कमा पा रही है। इससे उसके संचालकों को ईएमआई, टैक्स ड्राइवर को वेतन देने में कोई परेशानी नहीं हो रही है। इस वर्ष के अंत तक हालात और सुधरेंगे। यह आंकड़ा कम से कम पांच हजार रुपये तक पहुंच जाएगा। ऐसी उम्मीद की जा रही है। इसके अलावा उप संभागीय परिवहन अधिकारी सियाराम वर्मा ने बताया कि कॉमर्शियल वाहनों के पंजीकरण में अच्छा खासा उछाल देखने को मिला है। इससे विभाग के रेवेन्यू में भी खासा सुधार हुआ है, जो कि बीते तीन साल से प्रभावित हो रहा था। जिस हिसाब से यह संख्या बढ़ रही है ऐसे मे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्ष के अंत तक लगभग तीन हजार टैक्सियां पंजीकृत हो सकती हैं। ऐसा होने पर लोगों को और भी ज्यादा सुविधा मिल सकेगी।
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इस वर्ष इतने हुए पंजीकरण
माह वाहन हुए पंजीकृत
जनवरी 156
फरवरी 122
मार्च 202
अप्रैल 238
मई 163
और बढ़ सकती थी संख्या
एनसीआर में जाने वाली गाड़ियों जैसे- स्कूल वैन, कैब, एम्बुलेंस आदि पर टैक्स ना लगे इसके लिए यूपी कैबिनेट में प्रस्ताव लाया गया था जिसके बाद टैक्सी संचालकों में खुशी का माहौल था, एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश वर्मा ने बताया कि सरकार के इस प्रस्ताव पर अमल नहीं किया गया नहीं तो पंजीकृत टैक्सियों का आंकड़ा और भी अधिक होता।
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