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डॉक्टरों को निशाना बनाना निराधार, जनहित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है : दिल्ली हाईकोर्ट

Wed, 05 Jul 2023 07:26 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jul 2023 07:26 PM IST
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Targeting doctors baseless, adversely affects public interest: Delhi HC
महिला की मौत के बाद मेडिकल रजिस्टर से एक रेडियोलॉजिस्ट का नाम अस्थायी रूप से हटाने का निर्णय रद्द
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कहा, कांपते हाथों से छुरी नहीं चलाई जा सकती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों को आधारहीन निशाना बनाने से जनहित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अदालत ने 21 वर्षीय महिला मरीज की मौत के बाद मेडिकल रजिस्टर से एक रेडियोलॉजिस्ट का नाम अस्थायी रूप से हटाने के निर्णय को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।
न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने इस बात पर जोर दिया कि गंभीर लापरवाही से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, क्योंकि हिलते हुए हाथ से स्केलपेल को नहीं चलाया जा सकता है। भारतीय मेडिकल रजिस्टर से एक डॉक्टर का नाम काटने से न केवल उसके कॅरिअर की मृत्यु हो जाती है, बल्कि यह भी इसके व्यापक पारिवारिक और सामाजिक प्रभाव हैं।
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अदालत ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के आदेश के खिलाफ रेडियोलॉजिस्ट की याचिका पर सुनवाई करते हुए तीन महीने के लिए उनका नाम हटाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि काउंसिल ने उनके खिलाफ चिकित्सा लापरवाही के आरोप को हटा दिया है और उन पर किसी अन्य आरोप नहीं लगाया गया है। अभिलेखों में हेराफेरी के मामले में सजा को कानून में बरकरार नहीं रखा जा सकता है। हालांकि यह सच है कि ऐसा आचरण जो न्यूनतम चिकित्सा मानक से भी कम हो या किसी मरीज के कल्याण के प्रति गंभीर लापरवाही प्रदर्शित करता हो, उससे गंभीरता से निपटा जाना चाहिए।
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अदालत ने कहा यह भी उतना ही सच है कि कांपते हाथ से छुरी नहीं चलाई जा सकती। अदालत ने 3 जुलाई में पारित एक आदेश में कहा नतीजों से बेपरवाह डॉक्टरों को आधारहीन निशाना बनाना अंततः सार्वजनिक हित पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है।

एमसीआई ने काफी निष्पक्षता से याचिकाकर्ता को चिकित्सीय लापरवाही के आरोप से बरी कर दिया है। ऐसा मानने के बाद भी एमसीआई रिकॉर्ड में हेराफेरी के लिए याचिकाकर्ता को दंडित करने के लिए आगे नहीं बढ़ सका।
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