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Noida News: प्राधिकरण की लापरवाही से सूख सकता है सूरजपुर वेटलैंड
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प्राधिकरण की लापरवाही से सूख सकता है सूरजपुर वेटलैंड
दो साल बाद भी प्राधिकरण नहीं लगाया पाया है वेटलैंड के नाले पर एसटीपी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण की लापरवाही के कारण सूरजपुर वेटलैंड सूख सकता है। प्राधिकरण अब तक वेटलैंड में जा रहे नाले पर एसटीपी नहीं लगा सका है। इस कारण गंदे पानी को बाईपास कर लोहिया नाले में डाला जा रहा है।
पानी का मुख्य स्रोत नहीं होने के कारण अब वेटलैंड नहर के पानी पर निर्भर है। नहर में पानी आने पर ही वेटलैंड में पानी छोड़ा जाता है। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि पिछले दो साल से प्राधिकरण को पत्र लिख रहे हैं। प्राधिकरण ने सर्वे भी किया लेकिन कोई काम अब तक शुरू नहीं किया गया। सूरजपुर वेटलैंड करीब 300 हेक्टेयर जमीन पर फैला हुआ है। इसमें से 60 हेक्टेयर जमीन वॉटर बॉडी है। पिछले साल गंदे पानी के कारण वहां पर हजारों पेड़ सूख गए थे। अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। उसके बाद वन विभाग हरकत में आया और प्राधिकरण को गंदे पानी के नाले पर एसटीपी लगाने को पत्र लिखा। साथ ही मई माह में गंदे पानी को वेटलैंड से बाईपास कर लोहिया नोले में डाला गया। उसके बाद से गंदा पानी नाले में जा रहा है। केवल बारिश का पानी वेटलैंड में भरा हुआ है। इस समय पानी की मात्रा पूर्व के वर्षों की अपेक्षा कम है। ऐसे में वेटलैंड का पानी सूख सकता है। इस समय प्रवासी पक्षी आ रहे हैं। इससे उन पर भी असर पड़ेगा। हालांकि वन विभाग के अफसरों का कहना है कि पानी का ध्यान रखा जा रहा है। अगर पानी की जरूरत होती है तो नहर से साफ पानी छोड़ा जाता है।
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दो साल बाद भी प्राधिकरण नहीं लगाया पाया है वेटलैंड के नाले पर एसटीपी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण की लापरवाही के कारण सूरजपुर वेटलैंड सूख सकता है। प्राधिकरण अब तक वेटलैंड में जा रहे नाले पर एसटीपी नहीं लगा सका है। इस कारण गंदे पानी को बाईपास कर लोहिया नाले में डाला जा रहा है।
पानी का मुख्य स्रोत नहीं होने के कारण अब वेटलैंड नहर के पानी पर निर्भर है। नहर में पानी आने पर ही वेटलैंड में पानी छोड़ा जाता है। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि पिछले दो साल से प्राधिकरण को पत्र लिख रहे हैं। प्राधिकरण ने सर्वे भी किया लेकिन कोई काम अब तक शुरू नहीं किया गया। सूरजपुर वेटलैंड करीब 300 हेक्टेयर जमीन पर फैला हुआ है। इसमें से 60 हेक्टेयर जमीन वॉटर बॉडी है। पिछले साल गंदे पानी के कारण वहां पर हजारों पेड़ सूख गए थे। अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। उसके बाद वन विभाग हरकत में आया और प्राधिकरण को गंदे पानी के नाले पर एसटीपी लगाने को पत्र लिखा। साथ ही मई माह में गंदे पानी को वेटलैंड से बाईपास कर लोहिया नोले में डाला गया। उसके बाद से गंदा पानी नाले में जा रहा है। केवल बारिश का पानी वेटलैंड में भरा हुआ है। इस समय पानी की मात्रा पूर्व के वर्षों की अपेक्षा कम है। ऐसे में वेटलैंड का पानी सूख सकता है। इस समय प्रवासी पक्षी आ रहे हैं। इससे उन पर भी असर पड़ेगा। हालांकि वन विभाग के अफसरों का कहना है कि पानी का ध्यान रखा जा रहा है। अगर पानी की जरूरत होती है तो नहर से साफ पानी छोड़ा जाता है।
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