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देरी से कब्जा देने में सुपरटेक बिल्डर पर जुर्माना
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ग्रेटर नोएडा। फ्लैट पर समय से कब्जा नहीं देने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बिल्डर पर जुर्माना लगाया है। बिल्डर को 5 रुपये वर्गफुट प्रतिमाह के हिसाब से तीस दिन के अंदर जुर्माना देना होगा। वहीं फ्लैट खरीदार को बकाया राशि तीस दिन में जमा करनी होगी। बिल्डर को मानसिक संताप के लिए 10 हजार रुपये और वाद खर्च का भी भुगतान करना होगा।
नोएडा के सेक्टर-62 निवासी शिशिर कुमार और पत्नी गरिमा ने मेसर्स सुपरटेक लिमिटेड की आवासीय योजना में नोएडा के सेक्टर-74 में फ्लैट बुक किया था। 23 सितंबर 2012 को अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे। बिल्डर को अक्तूबर 2013 तक फ्लैट का कब्जा देना था। खरीदार ने बिल्डर की मांग के मुताबिक बैंक से कर्ज लेकर अप्रैल 2013 तक भुगतान कर दिया गया। निर्धारित समय से कई माह की देरी पर खरीदार को 8 जुलाई 2016 को कब्जा के लिए लेटर दिया गया। खरीदार ने देर से कब्जा देने के लिए पांच रुपये वर्गफुट के हिसाब से जुर्माना के तौर पर 4.60 लाख रुपये देने की मांग करके हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में गुहार लगाई थी। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने साक्ष्य रखे।
आयोग ने माना कि बिल्डर के द्वारा फ्लैट खरीदार को देर से कब्जा दिया। आवंटन की शर्तों के मुताबिक 6 माह का ग्रेस पीरियड जोड़ने के बाद अप्रैल 2014 में कब्जा दिया जाना था। फ्लैट पर कब्जा समय से नहीं दिया जाना सेवा में कमी है। साथ ही आयोग ने माना कि खरीदार की पार्क फेंसिंग फ्लैट, सर्विस टैक्स, अतिरिक्त ओपन कार पार्किंग की मांग उचित नहीं है। साथ ही खरीदार को 1.91 लाख रुपये तीस दिन के अंदर भुगतान करने का आदेश दिया है।
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नोएडा के सेक्टर-62 निवासी शिशिर कुमार और पत्नी गरिमा ने मेसर्स सुपरटेक लिमिटेड की आवासीय योजना में नोएडा के सेक्टर-74 में फ्लैट बुक किया था। 23 सितंबर 2012 को अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे। बिल्डर को अक्तूबर 2013 तक फ्लैट का कब्जा देना था। खरीदार ने बिल्डर की मांग के मुताबिक बैंक से कर्ज लेकर अप्रैल 2013 तक भुगतान कर दिया गया। निर्धारित समय से कई माह की देरी पर खरीदार को 8 जुलाई 2016 को कब्जा के लिए लेटर दिया गया। खरीदार ने देर से कब्जा देने के लिए पांच रुपये वर्गफुट के हिसाब से जुर्माना के तौर पर 4.60 लाख रुपये देने की मांग करके हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में गुहार लगाई थी। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने साक्ष्य रखे।
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आयोग ने माना कि बिल्डर के द्वारा फ्लैट खरीदार को देर से कब्जा दिया। आवंटन की शर्तों के मुताबिक 6 माह का ग्रेस पीरियड जोड़ने के बाद अप्रैल 2014 में कब्जा दिया जाना था। फ्लैट पर कब्जा समय से नहीं दिया जाना सेवा में कमी है। साथ ही आयोग ने माना कि खरीदार की पार्क फेंसिंग फ्लैट, सर्विस टैक्स, अतिरिक्त ओपन कार पार्किंग की मांग उचित नहीं है। साथ ही खरीदार को 1.91 लाख रुपये तीस दिन के अंदर भुगतान करने का आदेश दिया है।
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