फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Suicide: Women attempt more, but men lose their lives

आत्महत्या : महिलाएं करती हैं ज्यादा प्रयास, लेकिन जान गंवाते हैं पुरुष

Sat, 13 Sep 2025 03:07 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 13 Sep 2025 03:07 AM IST
विज्ञापन
Suicide: Women attempt more, but men lose their lives
लखनऊ। आत्महत्या की कोशिशों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है, लेकिन आत्महत्या कर जान गंवाने वालों में पुरुषों की संख्या ज्यादा है। इसके पीछे वजह ये है कि पुरुष क्षणिक आवेश में फैसला लेकर आत्महत्या कर गुजरते हैं, जबकि महिलाएं अपनी भावनात्मक सोच के कारण अंतिम कदम तक नहीं पहुंच पातीं।
विज्ञापन


यह तथ्य किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के मनोचिकित्सक डॉ. आदर्श त्रिपाठी ने अपने शोध के आधार पर साझा किया है। डॉ. आदर्श से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार आत्महत्या से होने वाली मौतों में करीब 75 प्रतिशत पुरुष होते हैं और 25 प्रतिशत महिलाएं। वहीं, महिलाएं पुरुषों की तुलना में सात से आठ गुना अधिक आत्महत्या की कोशिश करती हैं।
विज्ञापन


विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट भी यही इशारा करती है। डॉ. आदर्श बताते हैं कि इसी वजह से इस वर्ष डब्ल्यूएचओ ने आत्महत्या रोकथाम का थीम ‘विचारों को बदलना’ रखा है। इसका मतलब है कि लोग मानसिक समस्याओं पर खुलकर बातचीत करें और पीड़ितों को आंकने के बजाय उन्हें सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
हर दस में से तीन मानसिक समस्या से पीड़ित
डॉ. आदर्श की शोध के अनुसार हर 10 में से तीन व्यक्ति जीवन में किसी न किसी मानसिक समस्या से जूझ रहे हैं। अक्सर लोग तनाव और परिस्थितियों का सामना नहीं कर पाते। क्षणिक आवेश में आकर आत्महत्या का कदम उठा लेते हैं। समय रहते ऐसे लोगों की बात समझी जाए, समाधान बताया जाए और भावनात्मक सहारा दिया जाए तो अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है। दवाइयों व काउंसलिंग से 99 प्रतिशत मामलों में सुधार देखा गया है।
--
युवाओं में बढ़ रहा दबाव : केजीएमयू की ओपीडी में रोजाना 350 से 400 मरीज आते हैं। इनमें बड़ी संख्या युवा वर्ग की है। युवाओं में अवसाद का कारण अधिकतर भविष्य की चिंता, वर्तमान से निराशा और शैक्षणिक दबाव होता है। वहीं, महिलाओं में अवसाद का बड़ा कारण घरेलू हिंसा है।

--
ये लक्षण दिखें तो मनोचिकित्सक से करें संपर्क

अनिद्रा, भूख न लगना, अकेलापन, चिड़चिड़ापन, लोगों से दूरी बनाना, मौत की बातें करना, ऐसे लक्षण दिखें तो व्यक्ति को मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित व्यायाम और अपनों से संवाद, तनाव को काफी हद तक कम कर देता हैं। सही समय पर काउंसिलिंग और दवाओं से न केवल जीवन बचाया जा सकता है, बल्कि आत्महत्या जैसी सोच को भी जड़ से खत्म किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed