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Noida News: समर कैंप में हिंदी, अंग्रेजी और गणित सीखेंगे छात्र
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- सरकारी स्कूलों में 11 मई से 10 जून तक होगा समर कैंप का आयोजन
- हालांकि इसके लिए स्कूल प्रमुख का अभिभावकों से एनओसी लेना जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान समर कैंप में तीसरी से आठवीं तक के बच्चे हिंदी, अंग्रेजी लिखना बोलना, गणित की जमा घटा, गुणा-भाग सीखने सहित अपने हुनर को विकसित करते नजर आएंगे। मिशन बुनियाद के तहत यह समर कैंप 11 मई से 10 जून तक चलेगा। इसमें बच्चों को सह-शैक्षिक गतिविधियों में भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि बच्चों के कैंप में हिस्सा लेने के लिए स्कूल प्रमुख के पास उनके अभिभावकों की एनओसी होना जरूरी है। समर कैंप के तहत 45-45 मिनट की क्लास सुबह 7:30 बजे से 11 बजे तक लगेंगी। दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कैंप में टीचिंग लर्निंग सत्र का आयोजन बच्चों के वर्तमान पठन और स्मृति स्तर को ध्यान में रखते हुए ही किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए तीसरी से पांचवीं तक के छात्र जो पैराग्राफ आसानी पढ़ सकते हों, उनसे ऐसी ही छोटी कहानियों को पढ़वाने पर फोकस होना चाहिए।
वहीं छठी से आठवीं तक के छात्रों को एडवांस कहानी पढ़वाने पर भी फोकस होना चाहिए। कैंप से समाप्त होने से पहले बच्चों का मूल्यांकन भी किया जाएगा। इसका अंतिम मूल्यांकन डाटा मिशन बुनियाद पोर्टल पर 12 जून तक अपलोड करना होगा। वहीं निदेशालय की ओर से कैंप के लिए मिशन बुनियाद के अंतर्गत अतिरिक्त फंड भी स्कूलों को उपलब्ध कराया जाएगा। इसमेंं माता-पिता को अपने बच्चों के स्तर व उनकी रचनात्मकता की झलक देखने के लिए आमंत्रित भी किया जाएगा।
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- हालांकि इसके लिए स्कूल प्रमुख का अभिभावकों से एनओसी लेना जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान समर कैंप में तीसरी से आठवीं तक के बच्चे हिंदी, अंग्रेजी लिखना बोलना, गणित की जमा घटा, गुणा-भाग सीखने सहित अपने हुनर को विकसित करते नजर आएंगे। मिशन बुनियाद के तहत यह समर कैंप 11 मई से 10 जून तक चलेगा। इसमें बच्चों को सह-शैक्षिक गतिविधियों में भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि बच्चों के कैंप में हिस्सा लेने के लिए स्कूल प्रमुख के पास उनके अभिभावकों की एनओसी होना जरूरी है। समर कैंप के तहत 45-45 मिनट की क्लास सुबह 7:30 बजे से 11 बजे तक लगेंगी। दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कैंप में टीचिंग लर्निंग सत्र का आयोजन बच्चों के वर्तमान पठन और स्मृति स्तर को ध्यान में रखते हुए ही किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए तीसरी से पांचवीं तक के छात्र जो पैराग्राफ आसानी पढ़ सकते हों, उनसे ऐसी ही छोटी कहानियों को पढ़वाने पर फोकस होना चाहिए।
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वहीं छठी से आठवीं तक के छात्रों को एडवांस कहानी पढ़वाने पर भी फोकस होना चाहिए। कैंप से समाप्त होने से पहले बच्चों का मूल्यांकन भी किया जाएगा। इसका अंतिम मूल्यांकन डाटा मिशन बुनियाद पोर्टल पर 12 जून तक अपलोड करना होगा। वहीं निदेशालय की ओर से कैंप के लिए मिशन बुनियाद के अंतर्गत अतिरिक्त फंड भी स्कूलों को उपलब्ध कराया जाएगा। इसमेंं माता-पिता को अपने बच्चों के स्तर व उनकी रचनात्मकता की झलक देखने के लिए आमंत्रित भी किया जाएगा।
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