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Noida News: छात्रों ने तैयार की नवग्रह वाटिका, नौ ग्रहों से जुड़े पौधों का होगा संरक्षण
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राजकीय स्नातकोत्तर कॉलेज में अनूठी पहल, वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व वाले पौधों का संरक्षण शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से अनोखी नवग्रह वाटिका स्थापित की गई है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, मंगल, राहु और केतु से संबंधित गुणों वाले मदार, पीपल, खैर सहित कई पौधों को संरक्षित किया गया है। प्राचार्य के अनुसार, इस वाटिका को छात्रों द्वारा तैयार किया गया है ताकि अन्य छात्र इन पौधों के वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व को समझ सकें।
विभागाध्यक्ष डॉ. संघमित्रा ने बताया कि प्रत्येक पौधे की तरह प्रत्येक ग्रह का अपना विशिष्ट प्रभाव माना जाता है। इसी आधार पर सूर्य का प्रतीक अर्क, चंद्र का पलाश, मंगल का खैर, बुध का अपामार्ग, गुरु का पीपल, शुक्र का गुलर, शनि का शमी, राहु का दूब और केतु का कुशा पौधा शामिल किया गया है। इन पौधों में ऊर्जा बढ़ाने, मानसिक शांति देने, रक्त शुद्ध करने, तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करने और ऑक्सीजन उत्सर्जन जैसे वैज्ञानिक लाभ पाए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि यह वाटिका छात्रों को भारतीय विरासत, पर्यावरणीय महत्व और पौधों के संरक्षण के प्रति जागरूक करेगी। इसके निर्माण में डॉ. अंजनी रानी, डॉ. प्रिया बजाज, डॉ. कविता सिंह चौधरी और याचना त्यागी का सहयोग रहा।
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मानव जीवन के लिए पेड़ होना जरूरी है। उन्हीं के सहारे हम सांस ले पाते हैं। कुछ पौधे किन्हीं विशेष ग्रहों को रिप्रेजेंट करते हैं और उनके औषधीय गुण होते हैं। छात्रों को पर्यावरण संरक्षण और उनके महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए यह नवग्रह वाटिका तैयार की गई है। -डॉ. दिनेश चंद, प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गौतमबुद्ध नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से अनोखी नवग्रह वाटिका स्थापित की गई है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, मंगल, राहु और केतु से संबंधित गुणों वाले मदार, पीपल, खैर सहित कई पौधों को संरक्षित किया गया है। प्राचार्य के अनुसार, इस वाटिका को छात्रों द्वारा तैयार किया गया है ताकि अन्य छात्र इन पौधों के वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व को समझ सकें।
विभागाध्यक्ष डॉ. संघमित्रा ने बताया कि प्रत्येक पौधे की तरह प्रत्येक ग्रह का अपना विशिष्ट प्रभाव माना जाता है। इसी आधार पर सूर्य का प्रतीक अर्क, चंद्र का पलाश, मंगल का खैर, बुध का अपामार्ग, गुरु का पीपल, शुक्र का गुलर, शनि का शमी, राहु का दूब और केतु का कुशा पौधा शामिल किया गया है। इन पौधों में ऊर्जा बढ़ाने, मानसिक शांति देने, रक्त शुद्ध करने, तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करने और ऑक्सीजन उत्सर्जन जैसे वैज्ञानिक लाभ पाए जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि यह वाटिका छात्रों को भारतीय विरासत, पर्यावरणीय महत्व और पौधों के संरक्षण के प्रति जागरूक करेगी। इसके निर्माण में डॉ. अंजनी रानी, डॉ. प्रिया बजाज, डॉ. कविता सिंह चौधरी और याचना त्यागी का सहयोग रहा।
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मानव जीवन के लिए पेड़ होना जरूरी है। उन्हीं के सहारे हम सांस ले पाते हैं। कुछ पौधे किन्हीं विशेष ग्रहों को रिप्रेजेंट करते हैं और उनके औषधीय गुण होते हैं। छात्रों को पर्यावरण संरक्षण और उनके महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए यह नवग्रह वाटिका तैयार की गई है। -डॉ. दिनेश चंद, प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गौतमबुद्ध नगर