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एयरपोर्ट के निकट लेज़र उत्सर्जन एवं ड्रोन गतिविधियों को रोकें: डीएम
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- हवाई अड्डे के आसपास पक्षियों एवं जानवरों की उपस्थिति विमान सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती
- हवाई अड्डे के आसपास बिना एनओसी हो रहे निर्माणों की करें पहचान
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नोएडा एयरपोर्ट पर्यावरण प्रबंधन समिति की बैठक बुधवार को जिलाधिकारी मेधा रूपम की अध्यक्षता में हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि हवाई अड्डे के 10 किलोमीटर दायरे में साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। मृत पशु, कूड़ा न फेंका जाए और न जमा होने दिया जाए, ताकि पक्षी या जानवर आकर्षित न हों। पूरे क्षेत्र को ज़ोन-वाइज चिन्हित कर सर्वेक्षण कराया जाए। सभी संबंधित विभागीय अधिकारी एईएमसी सदस्यों के साथ मासिक निरीक्षण करें और प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत करें।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि पथवाया ड्रेन सहित एयरपोर्ट क्षेत्र की सभी जल निकासी प्रणालियों को सही किया जाए, ताकि जलभराव की समस्या न हो। हवाई अड्डे के आसपास बिना एनओसी हो रहे निर्माणों की पहचान कर उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण सुनिश्चित किया जाए। एयरपोर्ट के निकट लेज़र उत्सर्जन एवं ड्रोन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। तथा ग्रामीण क्षेत्रों में इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। लीड (एयरसाइड सर्विस एवं डब्ल्यू.एच.एम) विनीत सिकरवार ने हवाई अड्डे के 10 किलोमीटर के दायरे में पर्यावरणीय परिस्थितियों और विमान संचालन से जुड़े खतरों की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि हवाई अड्डे के आसपास पक्षियों एवं जानवरों की उपस्थिति विमान सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है, जिसे नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है। इस मौैके पर मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर शिवाकांत द्विवेदी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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- हवाई अड्डे के आसपास बिना एनओसी हो रहे निर्माणों की करें पहचान
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नोएडा एयरपोर्ट पर्यावरण प्रबंधन समिति की बैठक बुधवार को जिलाधिकारी मेधा रूपम की अध्यक्षता में हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि हवाई अड्डे के 10 किलोमीटर दायरे में साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। मृत पशु, कूड़ा न फेंका जाए और न जमा होने दिया जाए, ताकि पक्षी या जानवर आकर्षित न हों। पूरे क्षेत्र को ज़ोन-वाइज चिन्हित कर सर्वेक्षण कराया जाए। सभी संबंधित विभागीय अधिकारी एईएमसी सदस्यों के साथ मासिक निरीक्षण करें और प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत करें।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि पथवाया ड्रेन सहित एयरपोर्ट क्षेत्र की सभी जल निकासी प्रणालियों को सही किया जाए, ताकि जलभराव की समस्या न हो। हवाई अड्डे के आसपास बिना एनओसी हो रहे निर्माणों की पहचान कर उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण सुनिश्चित किया जाए। एयरपोर्ट के निकट लेज़र उत्सर्जन एवं ड्रोन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। तथा ग्रामीण क्षेत्रों में इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। लीड (एयरसाइड सर्विस एवं डब्ल्यू.एच.एम) विनीत सिकरवार ने हवाई अड्डे के 10 किलोमीटर के दायरे में पर्यावरणीय परिस्थितियों और विमान संचालन से जुड़े खतरों की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि हवाई अड्डे के आसपास पक्षियों एवं जानवरों की उपस्थिति विमान सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है, जिसे नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है। इस मौैके पर मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर शिवाकांत द्विवेदी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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