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Noida News: मेरठ और यूपी ऑल के ध्यानार्थ अब दार्जिलिंग के रास्ते से म्यांमार, बांग्लादेश पहुंचाई जा रहीं चोरी की कारें
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कमिश्नरेट पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई से दिल्ली-एनसीआर में ठंडा पड़ा चोरों का नेटवर्क फिर करने लगा घटनाएं
30 प्रतिशत कीमत पर बेची जा रहीं विदेशों में कारें
कार्रवाई और मेरठ का कबाड़ी बाजार टूटने पर 70 फीसदी कम हुईं घटनाएं
संदीप वर्मा
ग्रेटर नोएडा। दो वर्ष पहले मेरठ के सोतीगंज कबाड़ी बाजार मार्केट के टूटने और संगठित वाहन चोर गिरोहों पर कमिश्नरेट पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई से दिल्ली-एनसीआर में ठंडा पड़ा चोरों का नेटवर्क अब फिर से छुटपुट घटनाओं से सर उठाने लगा है। दिल्ली-एनसीआर से चोरी हो रही प्रीमियम, लग्जरी, हैचबैक और एसयूवी कारें अब गोरखपुर और बिहार के रास्ते नेपाल का रास्ता छोड़कर दार्जिलिंग-न्यू जलपाईगुड़ी के रास्ते म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल जा रही हैं।
पुलिस अधिकारियों और एसटीएफ के विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन चोर गिरोहों ने अपना-अपना काम बांट लिया है। दिल्ली-एनसीआर में चोरी करने वाला गिरोह अलग है, यहां से भारत की सीमा पार कराने वाला गिरोह अलग है और विदेशी धरती पर उसे नंबर प्लेट बदलकर बेचने या आरटीओ से घालमेल कर चलवाने वाला गिरोह अलग। स्थानीय पुलिस और एसटीएफ ने कई जगह कार्रवाई की है।
संगठित गिरोह पहले मेरठ में कबाड़ी बाजार वाहन ले जाते थे। गिरोह के लोग गोरखपुर और बिहार के सीवान, मोकामा, छपरा होते हुए नेपाल ले जाकर वाहन बेच देते थे। लगातार हो रही कार्रवाई के बाद अब गिरोहों ने अपने काम में तब्दीली ला दी है। अब गिरोह के लोग दिल्ली-एनसीआर में महंगी गाड़ियों पर हाथ साफ करते हैं और दार्जिलिंग, मिजोरम, मेघालय समेत नॉर्थ ईस्ट होते हुए म्यांमार और बांग्लादेश में गाड़ियां बेच देते हैं। कुछ माह पहले पकड़े गए हरियाणा के अमित महम गैंग ने सीधे ट्राॅला बुक कराकर न्यू जलपाईगुड़ी के रास्ते म्यांमार लग्जरी गाड़ियों को भेज दिया था।
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पुलिस ने की थी कार्रवाई
-मुरादाबाद निवासी कुलदीप के गैंग से सेक्टर-58 कोतवाली पुलिस ने 4 फॉरच्यूनर और कुछ प्रीमियम गाड़ियां बरामद की थीं। नाॅर्थ ईस्ट के जरिये म्यांमार गाड़ियां भेजा करता था।
-हरियाणा के महम क्षेत्र के गैंग लीडर अमित महम के गिरोह का पर्दाफाश कर उसके कब्जे से 17-18 गाड़ियों को बरामद किया गया था। गैंग से पुलिस ने रेंज रोवर, क्रेटा, स्कार्पियो जैसी गाड़ियां बरामद की थीं। गैंग ने एक ट्राॅला बुक कराकर सीधे म्यांमार गाड़ियां भेजी थी। इसके अलावा उसका जम्मू-काश्मीर में भी गाड़ियां बेचने का लिंक मिला था।
-मेरठ के डॉ. वाहिद गैंग से 11 एसयूवी समेत बड़ी गाड़ियां पकड़ी गई थीं। गाड़ियों को चोरी करने में महारथ हासिल करने पर उसे गैंग के लोग डॉक्टर के नाम से पुकारने लगे थे। यह मिजोरम और न्यू जलपाईगुड़ी के जरिए होते हुए बांग्लादेश में गाड़ियां सप्लाई करता था।
-मेरठ का ही मुस्तकीम गैंग छोटी गाड़ियों को टारगेट करता था।
-केतु गैंग से 8 लग्जरी गाड़ियां और एसयूवी बरामद हुई थीं। यह दूसरे रास्तों से नॉर्थ ईस्ट और नेपाल भेजता था गाड़ियां। यह गैंग आईपैड से लग्जरी गाड़ियों को रिमोट से खोल लेते थे।
-गुलफाम गैंग केवल बलेनो गाड़ियों को ही उठाता था। जिले में इसने कई घटनाएं की थीं।
-कुछ माह पहले बीटा-2 में दो फॉरच्यूनर और एक स्कार्पियो बरामद की गई थी।
-10 माह पहले बरौला भंगेल निवासी गैंग लीडर दुष्यंत को बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने पकड़ा था। 73 सेंट्रो चोरी कर स्क्रैप में बेची थीं।
नेपाली सांसद माफिया की मौत के बाद आई कमी
पुलिस अधिकारियों की मानें तो पूर्व में नेपाल के सांसद और माफिया मिर्जा दिलशाद बेग का नाम वाहन चोर गिरोह के संपर्क में आया था। सूत्रों के अनुसार, इनकी मौत के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र से नेपाल में गाड़ियों के पहुंचने में भारी कमी आई थी। इनकी मौत के बाद नेपाल के ही माफिया परवेज टांडा ने यह काम संभाला था। हालांकि, टांडा की मौत के बाद नेपाल में वाहन माफिया का वर्चस्व खत्म होता गया।
कारें फाइनेंस कराकर भी करते हैं फ्रॉड
विशेषज्ञों की मानें तो कुछ माह पहले वाहन चोर माफिया ने कारें फाइनेंस कराने और दूसरे देशों में नई गाड़ियों को पहुंचाकर वहां ऑनरशिप चेंज कराने का भी फ्रॉड शुरू किया था। आरोपी मुंबई-दिल्ली से गाड़ियां फाइनेंस कराकर ऑनरशिप चेंज कराते थे और चुपके से नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश ले जाते। इन देशों में आरटीओ इतना अधिक मजबूत नहीं है। इसका फायदा उठाकर आरोपी आरटीओ के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर इनके दूसरे पेपर बनवाकर इन देशों में चलाते थे।
शराब की तस्करी में होता है उपयोग
मेरठ में कबाड़ी बाजार टूटने के बाद अब चोरी की छोटी गाड़ियों को शराब माफिया को बेच दिया जाता है। अवैध शराब का कारोबार करने वाले जहां भी पकड़े जाने का डर होता है, वहां गाड़ियां छोड़कर भाग जाते हैं।
तकनीक में मजबूत हैं आरोपी
वाहन चोर गिरोहों के अभी तक पकड़े गए अधिकतर आरोपी पढ़े-लिखे हैं। यह आईपैड और लैपटॉप का उपयोग लग्जरी और अधिकतम सुरक्षा वाली गाड़ियों का लॉक तोड़ने के लिए करते हैं। यह आराम से गाड़ियों के रिमोट का नंबर डिटेक्ट कर लेते हैं और घटना को अंजाम देने लगे हैं।
कुछ वर्ष पहले वाहन चोर गिरोह गोरखपुर, बिहार के जरिये नेपाल में गाड़ियां ले जाकर बेचते थे। अब पकड़े गए गिरोह नॉर्थ ईस्ट राज्यों के जरिये म्यांमार और बांग्लादेश में गाड़ियाें को ले जाकर बेच रहे हैं। पिछले कुछ समय में कमिश्नरेट में वाहन चोर गिरोहों पर बड़ी कार्रवाई हुई है। इसके बाद से वाहन चोरी के मामलों में कमी आई है।
-रजनीश वर्मा, एसीपी
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30 प्रतिशत कीमत पर बेची जा रहीं विदेशों में कारें
कार्रवाई और मेरठ का कबाड़ी बाजार टूटने पर 70 फीसदी कम हुईं घटनाएं
संदीप वर्मा
ग्रेटर नोएडा। दो वर्ष पहले मेरठ के सोतीगंज कबाड़ी बाजार मार्केट के टूटने और संगठित वाहन चोर गिरोहों पर कमिश्नरेट पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई से दिल्ली-एनसीआर में ठंडा पड़ा चोरों का नेटवर्क अब फिर से छुटपुट घटनाओं से सर उठाने लगा है। दिल्ली-एनसीआर से चोरी हो रही प्रीमियम, लग्जरी, हैचबैक और एसयूवी कारें अब गोरखपुर और बिहार के रास्ते नेपाल का रास्ता छोड़कर दार्जिलिंग-न्यू जलपाईगुड़ी के रास्ते म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल जा रही हैं।
पुलिस अधिकारियों और एसटीएफ के विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन चोर गिरोहों ने अपना-अपना काम बांट लिया है। दिल्ली-एनसीआर में चोरी करने वाला गिरोह अलग है, यहां से भारत की सीमा पार कराने वाला गिरोह अलग है और विदेशी धरती पर उसे नंबर प्लेट बदलकर बेचने या आरटीओ से घालमेल कर चलवाने वाला गिरोह अलग। स्थानीय पुलिस और एसटीएफ ने कई जगह कार्रवाई की है।
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संगठित गिरोह पहले मेरठ में कबाड़ी बाजार वाहन ले जाते थे। गिरोह के लोग गोरखपुर और बिहार के सीवान, मोकामा, छपरा होते हुए नेपाल ले जाकर वाहन बेच देते थे। लगातार हो रही कार्रवाई के बाद अब गिरोहों ने अपने काम में तब्दीली ला दी है। अब गिरोह के लोग दिल्ली-एनसीआर में महंगी गाड़ियों पर हाथ साफ करते हैं और दार्जिलिंग, मिजोरम, मेघालय समेत नॉर्थ ईस्ट होते हुए म्यांमार और बांग्लादेश में गाड़ियां बेच देते हैं। कुछ माह पहले पकड़े गए हरियाणा के अमित महम गैंग ने सीधे ट्राॅला बुक कराकर न्यू जलपाईगुड़ी के रास्ते म्यांमार लग्जरी गाड़ियों को भेज दिया था।
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पुलिस ने की थी कार्रवाई
-मुरादाबाद निवासी कुलदीप के गैंग से सेक्टर-58 कोतवाली पुलिस ने 4 फॉरच्यूनर और कुछ प्रीमियम गाड़ियां बरामद की थीं। नाॅर्थ ईस्ट के जरिये म्यांमार गाड़ियां भेजा करता था।
-हरियाणा के महम क्षेत्र के गैंग लीडर अमित महम के गिरोह का पर्दाफाश कर उसके कब्जे से 17-18 गाड़ियों को बरामद किया गया था। गैंग से पुलिस ने रेंज रोवर, क्रेटा, स्कार्पियो जैसी गाड़ियां बरामद की थीं। गैंग ने एक ट्राॅला बुक कराकर सीधे म्यांमार गाड़ियां भेजी थी। इसके अलावा उसका जम्मू-काश्मीर में भी गाड़ियां बेचने का लिंक मिला था।
-मेरठ के डॉ. वाहिद गैंग से 11 एसयूवी समेत बड़ी गाड़ियां पकड़ी गई थीं। गाड़ियों को चोरी करने में महारथ हासिल करने पर उसे गैंग के लोग डॉक्टर के नाम से पुकारने लगे थे। यह मिजोरम और न्यू जलपाईगुड़ी के जरिए होते हुए बांग्लादेश में गाड़ियां सप्लाई करता था।
-मेरठ का ही मुस्तकीम गैंग छोटी गाड़ियों को टारगेट करता था।
-केतु गैंग से 8 लग्जरी गाड़ियां और एसयूवी बरामद हुई थीं। यह दूसरे रास्तों से नॉर्थ ईस्ट और नेपाल भेजता था गाड़ियां। यह गैंग आईपैड से लग्जरी गाड़ियों को रिमोट से खोल लेते थे।
-गुलफाम गैंग केवल बलेनो गाड़ियों को ही उठाता था। जिले में इसने कई घटनाएं की थीं।
-कुछ माह पहले बीटा-2 में दो फॉरच्यूनर और एक स्कार्पियो बरामद की गई थी।
-10 माह पहले बरौला भंगेल निवासी गैंग लीडर दुष्यंत को बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने पकड़ा था। 73 सेंट्रो चोरी कर स्क्रैप में बेची थीं।
नेपाली सांसद माफिया की मौत के बाद आई कमी
पुलिस अधिकारियों की मानें तो पूर्व में नेपाल के सांसद और माफिया मिर्जा दिलशाद बेग का नाम वाहन चोर गिरोह के संपर्क में आया था। सूत्रों के अनुसार, इनकी मौत के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र से नेपाल में गाड़ियों के पहुंचने में भारी कमी आई थी। इनकी मौत के बाद नेपाल के ही माफिया परवेज टांडा ने यह काम संभाला था। हालांकि, टांडा की मौत के बाद नेपाल में वाहन माफिया का वर्चस्व खत्म होता गया।
कारें फाइनेंस कराकर भी करते हैं फ्रॉड
विशेषज्ञों की मानें तो कुछ माह पहले वाहन चोर माफिया ने कारें फाइनेंस कराने और दूसरे देशों में नई गाड़ियों को पहुंचाकर वहां ऑनरशिप चेंज कराने का भी फ्रॉड शुरू किया था। आरोपी मुंबई-दिल्ली से गाड़ियां फाइनेंस कराकर ऑनरशिप चेंज कराते थे और चुपके से नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश ले जाते। इन देशों में आरटीओ इतना अधिक मजबूत नहीं है। इसका फायदा उठाकर आरोपी आरटीओ के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर इनके दूसरे पेपर बनवाकर इन देशों में चलाते थे।
शराब की तस्करी में होता है उपयोग
मेरठ में कबाड़ी बाजार टूटने के बाद अब चोरी की छोटी गाड़ियों को शराब माफिया को बेच दिया जाता है। अवैध शराब का कारोबार करने वाले जहां भी पकड़े जाने का डर होता है, वहां गाड़ियां छोड़कर भाग जाते हैं।
तकनीक में मजबूत हैं आरोपी
वाहन चोर गिरोहों के अभी तक पकड़े गए अधिकतर आरोपी पढ़े-लिखे हैं। यह आईपैड और लैपटॉप का उपयोग लग्जरी और अधिकतम सुरक्षा वाली गाड़ियों का लॉक तोड़ने के लिए करते हैं। यह आराम से गाड़ियों के रिमोट का नंबर डिटेक्ट कर लेते हैं और घटना को अंजाम देने लगे हैं।
कुछ वर्ष पहले वाहन चोर गिरोह गोरखपुर, बिहार के जरिये नेपाल में गाड़ियां ले जाकर बेचते थे। अब पकड़े गए गिरोह नॉर्थ ईस्ट राज्यों के जरिये म्यांमार और बांग्लादेश में गाड़ियाें को ले जाकर बेच रहे हैं। पिछले कुछ समय में कमिश्नरेट में वाहन चोर गिरोहों पर बड़ी कार्रवाई हुई है। इसके बाद से वाहन चोरी के मामलों में कमी आई है।
-रजनीश वर्मा, एसीपी