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50000 का इनाम घोषित होने पर एसटीएफ ने संभाली ‘महाठगों’ की गिरफ्तारी की कमान
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50000 का इनाम घोषित होने पर एसटीएफ ने संभाली ‘महाठगों’ की गिरफ्तारी की कमान
ग्रेटर नोएडा। बाइक बोट फर्जीवाड़े के आरोपी डेढ़ साल पहले नामजद किए गए थे। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर पुलिस, एनईओडब्ल्यू और मेरठ ईओडब्ल्यू की टीम ने आरोपियों की तलाश शुरू की और कई को गिरफ्तार भी किया, लेकिन 50 हजार रुपये का इनाम घोषित होने के बाद सात आरोपी एसटीएफ की हिट लिस्ट में शामिल हो गए। एसटीएफ ने महाठगों की गिरफ्तारी की कमान संभाल ली। टीम ने ईओडब्ल्यू मेरठ की मदद से डेढ़ साल से फरार चल रहे तीन आरोपियों संजय भाटी के भाई सचिन भाटी, पवन भाटी के अलावा करनपाल को गिरफ्तार भी कर लिया है। अब एसटीएफ ने संजय भाटी की पत्नी दीप्ति बहल समेत पांच अन्य इनामी की तलाश शुरू कर दी है।
फर्जीवाड़े में पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर नजर डालें तो संजय भाटी ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद पुलिस व अन्य जांच एजेंसियां उसके परिवार के एक भी आरोपी तक नहीं पहुंच पा रहीं थीं। पिछले महीने फर्जीवाड़े के सात आरोपियों पर 50 हजार का इनाम घोषित होने के बाद एसटीएफ ने ठगों को दबोचने कमान संभाली और मेरठ ईओडब्ल्यू के साथ मिलकर तीन बड़े आरोपियों की गिरफ्तारी की। कोर्ट में पुलिस द्वारा पेश की गई केस डायरी में मामले में 38 नाम थे। इनमें से 17 जेल पहुंच चुके हैं। वहीं, 21 आरोपी अब भी फरार हैं। पुलिस ने ही सात बड़े आरोपियों पर 50 हजार का इनाम घोषित किया था। करनपाल और सचिन की गिरफ्तारी के बाद अब दीप्ति बहल, भूदेव, ललित, जालंधर निवासी रविंद्र और उसकी पत्नी रेखा की गिरफ्तारी के प्रयास में एसटीएफ जुट गई है। इनके संबंध में कोट गांव स्थित निवेशकों से भी जानकारी जुटाई गई है। साथ ही गिरफ्तार आरोपियों से भी इनके ठिकानों के संबंध में पूछताछ की गई है।
आरोपी लोकेंद्र की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
बाइक बोट फर्जीवाड़े में फरार लोकेंद्र सिंह द्वारा 10 केसों में लगाई गई अग्रिम जमानत याचिका को जिला अदालत ने बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। अधिवक्ता धर्मेंद्र जयंत ने बताया कि एससी/एसटी विशेष न्यायाधीश वेदप्रकाश शर्मा ने सुनवाई की। आरोपी लोकेंद्र बाइक बोट कंपनी में एडिशनल निदेशक के पद पर कार्यरत था। आरोपी 56 केस में नामजद है। निवेशकों को अग्रिम तिथि के चेक देकर झांसा देने में लोकेंद्र भी शामिल रहा है। इस कारण अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। निवेशक मुन्ना बालियान ने बताया कि लोकेंद्र पूर्व फौजी है। इसने कई अन्य फौजियों और लोगों को फर्जीवाड़े में फंसाया था।
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सेबी ने कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव को लिखा पत्र
बाइक बोट निवेशकों ने देश के कई बड़े अधिकारियों और विभागों को आरोपियों पर कार्रवाई व रुपया वापस दिलाने की मांग को लेकर पत्र लिखा था। निवेशक मुन्ना बालियान ने बताया कि सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) को पत्र लिखे थे, लेकिन सेबी ने मामले को दायरे से अलग बताते हुए निवेशकों के प्रार्थना पत्रों को यूपी के मुख्य सचिव को भेज दिया। सेबी ने भेजे गए पत्र में कहा है कि निवेशकों ने बड़ी संख्या में शिकायत की हैं। यह मामला हवाला कारोबार, मनी सर्कुलेशन योजना से जुड़ा है। इसके चलते सेबी ने मुख्य सचिव को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
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ग्रेटर नोएडा। बाइक बोट फर्जीवाड़े के आरोपी डेढ़ साल पहले नामजद किए गए थे। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर पुलिस, एनईओडब्ल्यू और मेरठ ईओडब्ल्यू की टीम ने आरोपियों की तलाश शुरू की और कई को गिरफ्तार भी किया, लेकिन 50 हजार रुपये का इनाम घोषित होने के बाद सात आरोपी एसटीएफ की हिट लिस्ट में शामिल हो गए। एसटीएफ ने महाठगों की गिरफ्तारी की कमान संभाल ली। टीम ने ईओडब्ल्यू मेरठ की मदद से डेढ़ साल से फरार चल रहे तीन आरोपियों संजय भाटी के भाई सचिन भाटी, पवन भाटी के अलावा करनपाल को गिरफ्तार भी कर लिया है। अब एसटीएफ ने संजय भाटी की पत्नी दीप्ति बहल समेत पांच अन्य इनामी की तलाश शुरू कर दी है।
फर्जीवाड़े में पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर नजर डालें तो संजय भाटी ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद पुलिस व अन्य जांच एजेंसियां उसके परिवार के एक भी आरोपी तक नहीं पहुंच पा रहीं थीं। पिछले महीने फर्जीवाड़े के सात आरोपियों पर 50 हजार का इनाम घोषित होने के बाद एसटीएफ ने ठगों को दबोचने कमान संभाली और मेरठ ईओडब्ल्यू के साथ मिलकर तीन बड़े आरोपियों की गिरफ्तारी की। कोर्ट में पुलिस द्वारा पेश की गई केस डायरी में मामले में 38 नाम थे। इनमें से 17 जेल पहुंच चुके हैं। वहीं, 21 आरोपी अब भी फरार हैं। पुलिस ने ही सात बड़े आरोपियों पर 50 हजार का इनाम घोषित किया था। करनपाल और सचिन की गिरफ्तारी के बाद अब दीप्ति बहल, भूदेव, ललित, जालंधर निवासी रविंद्र और उसकी पत्नी रेखा की गिरफ्तारी के प्रयास में एसटीएफ जुट गई है। इनके संबंध में कोट गांव स्थित निवेशकों से भी जानकारी जुटाई गई है। साथ ही गिरफ्तार आरोपियों से भी इनके ठिकानों के संबंध में पूछताछ की गई है।
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आरोपी लोकेंद्र की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
बाइक बोट फर्जीवाड़े में फरार लोकेंद्र सिंह द्वारा 10 केसों में लगाई गई अग्रिम जमानत याचिका को जिला अदालत ने बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। अधिवक्ता धर्मेंद्र जयंत ने बताया कि एससी/एसटी विशेष न्यायाधीश वेदप्रकाश शर्मा ने सुनवाई की। आरोपी लोकेंद्र बाइक बोट कंपनी में एडिशनल निदेशक के पद पर कार्यरत था। आरोपी 56 केस में नामजद है। निवेशकों को अग्रिम तिथि के चेक देकर झांसा देने में लोकेंद्र भी शामिल रहा है। इस कारण अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। निवेशक मुन्ना बालियान ने बताया कि लोकेंद्र पूर्व फौजी है। इसने कई अन्य फौजियों और लोगों को फर्जीवाड़े में फंसाया था।
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सेबी ने कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव को लिखा पत्र
बाइक बोट निवेशकों ने देश के कई बड़े अधिकारियों और विभागों को आरोपियों पर कार्रवाई व रुपया वापस दिलाने की मांग को लेकर पत्र लिखा था। निवेशक मुन्ना बालियान ने बताया कि सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) को पत्र लिखे थे, लेकिन सेबी ने मामले को दायरे से अलग बताते हुए निवेशकों के प्रार्थना पत्रों को यूपी के मुख्य सचिव को भेज दिया। सेबी ने भेजे गए पत्र में कहा है कि निवेशकों ने बड़ी संख्या में शिकायत की हैं। यह मामला हवाला कारोबार, मनी सर्कुलेशन योजना से जुड़ा है। इसके चलते सेबी ने मुख्य सचिव को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।