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गुरुग्राम के भी ध्यानार्थ::: बिल्डर की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक
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- घर खरीदारों से धोखाधड़ी का आरोपी है बिल्डर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने घर खरीदारों से धोखाधड़ी के आरोपी बिल्डर को राहत देते हुए उसकी गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि आरोपी बिल्डर सिद्धार्थ चौहान 25 बार जांच में शामिल हुए हैं। साथ ही जांच अधिकारी को जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध कराए हैं।
न्यायमूर्ति विकास महाजन ने बिल्डर की जमानत याचिका पर सुनवाई करने के दौरान कहा कि दिल्ली पुलिस बिल्डर के खिलाफ अगली सुनवाई तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं करे। उन्होंने इसके साथ ही पुलिस को नोटिस जारी कर स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा और सुनवाई 10 अगस्त के लिए स्थगित कर दी। याचिकाकर्ता सिद्धार्थ चौहान ने इससे पहले साकेत कोर्ट से जमानत मांगी थी, जिसे कोर्ट ने देने से इनकार कर दिया था। उस आदेश को चौहान ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। चौहान के खिलाफ घर खरीदारों की शिकायत पर धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश रचने समेत अन्य धाराओं के तहत वर्ष 2018 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
कई प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि घर खरीदारों ने भवन बुक करने के लिए 95 फीसदी धनराशि का भुगतान किया था। घर खरीदारों को आश्वासन दिया गया था कि उन लोगों को 36 महीने में घर दे दिया जाएगा। लेकिन तीन साल पांच महीने बीतने के बाद भी घर नहीं दिया गया। उसके खिलाफ यह भी आरोप लगाया कि है कि खरीदारों की रकम को दूसरे कामों में लगा दिया है। इसके अलावा गुरुग्राम में भी एक आवासीय योजना के मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी हुई थी। याचिकाकर्ता चौहान की पहली अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट ने 13 दिसंबर 2021 को खारिज कर दी थी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने घर खरीदारों से धोखाधड़ी के आरोपी बिल्डर को राहत देते हुए उसकी गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि आरोपी बिल्डर सिद्धार्थ चौहान 25 बार जांच में शामिल हुए हैं। साथ ही जांच अधिकारी को जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध कराए हैं।
न्यायमूर्ति विकास महाजन ने बिल्डर की जमानत याचिका पर सुनवाई करने के दौरान कहा कि दिल्ली पुलिस बिल्डर के खिलाफ अगली सुनवाई तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं करे। उन्होंने इसके साथ ही पुलिस को नोटिस जारी कर स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा और सुनवाई 10 अगस्त के लिए स्थगित कर दी। याचिकाकर्ता सिद्धार्थ चौहान ने इससे पहले साकेत कोर्ट से जमानत मांगी थी, जिसे कोर्ट ने देने से इनकार कर दिया था। उस आदेश को चौहान ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। चौहान के खिलाफ घर खरीदारों की शिकायत पर धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश रचने समेत अन्य धाराओं के तहत वर्ष 2018 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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कई प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि घर खरीदारों ने भवन बुक करने के लिए 95 फीसदी धनराशि का भुगतान किया था। घर खरीदारों को आश्वासन दिया गया था कि उन लोगों को 36 महीने में घर दे दिया जाएगा। लेकिन तीन साल पांच महीने बीतने के बाद भी घर नहीं दिया गया। उसके खिलाफ यह भी आरोप लगाया कि है कि खरीदारों की रकम को दूसरे कामों में लगा दिया है। इसके अलावा गुरुग्राम में भी एक आवासीय योजना के मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी हुई थी। याचिकाकर्ता चौहान की पहली अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट ने 13 दिसंबर 2021 को खारिज कर दी थी।
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