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दिल्ली दंगा : गवाहों के बयान मनगढ़ंत, अभियोजन को शर्म आनी चाहिए - खालिद
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नई दिल्ली। दिल्ली दंगों में आरोपी जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद ने अदालत में कहा कि दंगों की साजिश मामले में गवाहों के जो बयान दर्ज किए वे मनगढ़ंत थे। इसके लिए अभियोजन को शर्मिंदा होना चाहिए। खालिद समेत अन्य कई को अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत नामजद किया गया है।
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष उमर खालिद की ओर से जमानत याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पायस ने कहा कि गवाहों के बयान विरोधाभासी हैं और वे कानून की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। उन्होंने एक गवाह का बयान पढ़ते हुए कहा कि 12 साल का बच्चा भी बता देगा कि ये बयान मनगढ़ंत है। इसके लिए अभियोजन को शर्म आनी चाहिए। इसमें कोई साक्ष्य नहीं है।
पायस ने एक अंग्रेजी फिल्म ‘द ट्रायल ऑफ शिकागो 7’ का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें सरकार के गवाहों ने सरकार का गवाह बनने की योजना पहले ही बना ली थी। वह अभियोजन के उस आरोप का जवाब दे रहे थे कि जंतर मंतर पर वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडियन की ओर से आयोजित एक धरने में उमर खालिद और उनके पिता मौजूद थे। इसमें महिलाओं और बच्चों को बसों में भरकर ले जाया गया था।
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जमानत याचिका पर अपनी जिरह खत्म करते हुए पायस ने कहा कि लोगों को सीएए का विरोध करना चाहिए, इसकी वकालत करना, किस तरह से अपराध है? पायस ने 23 अगस्त को जमानत याचिका पर जिरह शुरू की थी। वहीं विशेष अधिवक्ता अमित प्रसाद ने कहा कि वे अभियोजन की ओर से जमानत याचिका पर पांच जनवरी से जिरह शुरू करेंगेे।
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कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष उमर खालिद की ओर से जमानत याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पायस ने कहा कि गवाहों के बयान विरोधाभासी हैं और वे कानून की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। उन्होंने एक गवाह का बयान पढ़ते हुए कहा कि 12 साल का बच्चा भी बता देगा कि ये बयान मनगढ़ंत है। इसके लिए अभियोजन को शर्म आनी चाहिए। इसमें कोई साक्ष्य नहीं है।
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पायस ने एक अंग्रेजी फिल्म ‘द ट्रायल ऑफ शिकागो 7’ का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें सरकार के गवाहों ने सरकार का गवाह बनने की योजना पहले ही बना ली थी। वह अभियोजन के उस आरोप का जवाब दे रहे थे कि जंतर मंतर पर वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडियन की ओर से आयोजित एक धरने में उमर खालिद और उनके पिता मौजूद थे। इसमें महिलाओं और बच्चों को बसों में भरकर ले जाया गया था।
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जमानत याचिका पर अपनी जिरह खत्म करते हुए पायस ने कहा कि लोगों को सीएए का विरोध करना चाहिए, इसकी वकालत करना, किस तरह से अपराध है? पायस ने 23 अगस्त को जमानत याचिका पर जिरह शुरू की थी। वहीं विशेष अधिवक्ता अमित प्रसाद ने कहा कि वे अभियोजन की ओर से जमानत याचिका पर पांच जनवरी से जिरह शुरू करेंगेे।