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Noida News: ग्रेटर नोएडा में वाहनों पार्किंग की व्यवस्था होगी स्मार्ट
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा और ग्रेनो वेस्ट में पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए प्राधिकरण पीपीपी माॅडल पर काम करेगा। निजी कंपनी से क्षेत्र का सर्वे करायागा। पार्किंग की आवश्यकता वाली जगह भी चिह्नित की जाएंगी। यह पूरी व्यवस्था स्मार्ट रहेगी। विकसित पार्किंग में मौजूद खाली जगह को भी मोबाइल एप के जरिये पता किया जा सकेगा। इसके अलावा पार्किंग के बाहर ही उपलब्धता की संख्या डिस्पले रहेगी।
सीईओ एनजी रवि कुमार ने अर्बन सर्विस विभाग को यह सर्वे कराने के लिए कहा है। ग्रेनो प्राधिकरण ने अनुभवी कंपनी की तलाश शुरू कर दी है। दावा है कि अगले महीने तक एजेंसी को तय कर लिया जाएगा।
प्रबंधक अभिषेक सिंह ने बताया कि पीएमएस से वाहनों की पार्किंग को बाधारहित बनाया जा सकेगा। इसमें सुनिश्चित किया जाना है कि ऐसी किसी जगह पार्किंग नहीं बने, जहां लोगों को दिक्कतें हों। खासतौर पर सड़कों पर पार्किंग की अनुमति देने के समय इसका ध्यान रखा जाएगा।
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कंपनी को ये काम करने होंगे
-किन सार्वजनिक जगहों और औद्योगिक सेक्टरों में पार्किंग विकसित करने की जरूरत है?
-कहां मल्टीलेवल या भूमिगत पार्किंग बनानी होगी?
-कहां सड़क किनारे मौजूद खाली या अतिरिक्त जगह पर ऑन रोड पार्किंग शुरू की जा सकती है?
-इसकी रिपोर्ट प्राधिकरण के अर्बन सर्विस विभाग को देनी है जिससे सक्षम स्तर से अनुमति लेकर यहां पार्किंग व्यवस्था कराई जा सके।
क्या है प्राधिकरण की योजना
ग्रेटर नोएडा के लिए वृहद पार्किंग प्रबंधन व्यवस्था-पीएमएस विकसित की जाए। इसमें पार्किंग के लिए जगह चिह्नित करने से लेकर पार्किंग की क्षमता, डिजाइन, संचालन पर भी काम शामिल होगा। इससे प्राधिकरण में प्रस्तावित इंटिग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर से भी जोड़ा जाना है। इससे कंट्रोल सेंटर से ही पार्किंगों की निगरानी भी तय हो सकेगी। इन पार्किंग में वाहनों से शुल्क की वसूली भी पूरी तरह कैशलेस रखी जानी है। इसके लिए ऑटोमेटेड व्यवस्था भी कंपनी विकसित करेगी।
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कैमरों से होगी वाहनों की पहचान
पार्किंग संचालन में कंपनी को ऐसे कैमरे लगाने होंगे जिनसे नंबर प्लेट की पहचान हो सके। इससे वाहनों की एंट्री का डाटा भी कंट्रोल रूम में अपडेट होता रहेगा। इससे आवश्यकता के समय पुलिस भी कंट्रोल रूम की मदद ले सकेगी।
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ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा और ग्रेनो वेस्ट में पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए प्राधिकरण पीपीपी माॅडल पर काम करेगा। निजी कंपनी से क्षेत्र का सर्वे करायागा। पार्किंग की आवश्यकता वाली जगह भी चिह्नित की जाएंगी। यह पूरी व्यवस्था स्मार्ट रहेगी। विकसित पार्किंग में मौजूद खाली जगह को भी मोबाइल एप के जरिये पता किया जा सकेगा। इसके अलावा पार्किंग के बाहर ही उपलब्धता की संख्या डिस्पले रहेगी।
सीईओ एनजी रवि कुमार ने अर्बन सर्विस विभाग को यह सर्वे कराने के लिए कहा है। ग्रेनो प्राधिकरण ने अनुभवी कंपनी की तलाश शुरू कर दी है। दावा है कि अगले महीने तक एजेंसी को तय कर लिया जाएगा।
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प्रबंधक अभिषेक सिंह ने बताया कि पीएमएस से वाहनों की पार्किंग को बाधारहित बनाया जा सकेगा। इसमें सुनिश्चित किया जाना है कि ऐसी किसी जगह पार्किंग नहीं बने, जहां लोगों को दिक्कतें हों। खासतौर पर सड़कों पर पार्किंग की अनुमति देने के समय इसका ध्यान रखा जाएगा।
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कंपनी को ये काम करने होंगे
-किन सार्वजनिक जगहों और औद्योगिक सेक्टरों में पार्किंग विकसित करने की जरूरत है?
-कहां मल्टीलेवल या भूमिगत पार्किंग बनानी होगी?
-कहां सड़क किनारे मौजूद खाली या अतिरिक्त जगह पर ऑन रोड पार्किंग शुरू की जा सकती है?
-इसकी रिपोर्ट प्राधिकरण के अर्बन सर्विस विभाग को देनी है जिससे सक्षम स्तर से अनुमति लेकर यहां पार्किंग व्यवस्था कराई जा सके।
क्या है प्राधिकरण की योजना
ग्रेटर नोएडा के लिए वृहद पार्किंग प्रबंधन व्यवस्था-पीएमएस विकसित की जाए। इसमें पार्किंग के लिए जगह चिह्नित करने से लेकर पार्किंग की क्षमता, डिजाइन, संचालन पर भी काम शामिल होगा। इससे प्राधिकरण में प्रस्तावित इंटिग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर से भी जोड़ा जाना है। इससे कंट्रोल सेंटर से ही पार्किंगों की निगरानी भी तय हो सकेगी। इन पार्किंग में वाहनों से शुल्क की वसूली भी पूरी तरह कैशलेस रखी जानी है। इसके लिए ऑटोमेटेड व्यवस्था भी कंपनी विकसित करेगी।
कैमरों से होगी वाहनों की पहचान
पार्किंग संचालन में कंपनी को ऐसे कैमरे लगाने होंगे जिनसे नंबर प्लेट की पहचान हो सके। इससे वाहनों की एंट्री का डाटा भी कंट्रोल रूम में अपडेट होता रहेगा। इससे आवश्यकता के समय पुलिस भी कंट्रोल रूम की मदद ले सकेगी।