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Noida News: नोएडा में छोटे उद्यमियों को मिल सकेगी सस्ती जमीन
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नए एमएसएमई पार्क विकसित करने के लिए जिला उद्योग केंद्र प्रस्ताव तैयार कर रहा
300 से ज्यादा उद्यमियों ने नोएडा में उद्योग स्थापित करने की इच्छा जताई
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में उद्योग लगाने की इच्छा रखने वाले छोटे उद्यमियों के सामने महंगे औद्योगिक भूखंड बड़ी अड़चन बने हुए हैं। 300 से ज्यादा उद्यमियों ने नोएडा में उद्योग स्थापित करने की इच्छा जताई है। ऐसे में छोटे उद्यमियों को जमीन उपलब्ध कराने के लिए नए एमएसएमई पार्क विकसित करने और छोटे आकार के प्लॉट उपलब्ध कराने को लेकर जिला उद्योग केंद्र प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों के अनुसार, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अतंर्गत आने वाली औद्योगिक जमीन की कीमत अधिक होने के कारण कम पूंजी वाले उद्यमियों के लिए अलग से भूखंड लेना मुश्किल होता है। इसी वजह से छोटे उद्यमियों को एक साथ कई सुविधाएं देने वाले एमएसएमई पार्क या फ्लैटेड फैक्टरी मॉडल पर जोर दिया जा रहा है। ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी एमएसएमई समेत अलग-अलग औद्योगिक पार्कों और फ्लैटेड फैक्टरी की योजनाओं पर काम हो रहा है।
प्रस्तावित व्यवस्था में कम क्षेत्रफल के भूखंडों के साथ साझा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है। इससे उद्यमियों को पूरी जमीन खरीदने और बुनियादी ढांचा विकसित करने का खर्च कम करने में मदद मिल सकती है। केंद्र की एमएसई-सीडीपी योजना में भी औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, बिजली वितरण और कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी सुविधाओं के विकास के लिए सहायता का प्रावधान है। बता दें कि यूपी की एमएसएमई नीति के तहत पार्क विकसित करने के लिए प्लेज योजना भी संचालित है। इसमें पात्र पार्कों में जमीन खरीदने या लीज पर लेने वाले उद्यमियों को सहायता का प्रावधान है। ऐसे में उम्मीद है कि यूपीसीडा की जमीन पर अपैरल पार्क की तरह ही एमएसएमई पार्क बनाया जा सकता है।
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अब जमीन उपलब्ध की चुनौती
जिला उद्योग केंद्र और प्राधिकरण के सामने अब चुनौती इच्छुक उद्यमियों के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध कराने की है। 300 से ज्यादा आवेदनों से यह संकेत मिलता है कि छोटे स्तर पर उद्योग लगाने में रुचि है। ऐसे में नए एमएसएमई पार्क की योजना में प्लॉट का आकार, दर, साझा सुविधाएं और आवंटन की प्रक्रिया अहम होगी। हालांकि, प्रस्तावित पार्क का स्थान, कुल क्षेत्रफल और प्लॉट की संख्या पर अंतिम निर्णय अभी सामने नहीं आया है।
एमएसएमई पार्क विकसित करने पर मंथन किया जा रहा है, इसकी डीपीआर तैयार की जा रही है। इसके बाद शासन स्तर पर पेश की जाएगी।
-पंकज निर्वाण, उद्योग उपायुक्त, गौतमबुद्ध नगर
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300 से ज्यादा उद्यमियों ने नोएडा में उद्योग स्थापित करने की इच्छा जताई
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में उद्योग लगाने की इच्छा रखने वाले छोटे उद्यमियों के सामने महंगे औद्योगिक भूखंड बड़ी अड़चन बने हुए हैं। 300 से ज्यादा उद्यमियों ने नोएडा में उद्योग स्थापित करने की इच्छा जताई है। ऐसे में छोटे उद्यमियों को जमीन उपलब्ध कराने के लिए नए एमएसएमई पार्क विकसित करने और छोटे आकार के प्लॉट उपलब्ध कराने को लेकर जिला उद्योग केंद्र प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों के अनुसार, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अतंर्गत आने वाली औद्योगिक जमीन की कीमत अधिक होने के कारण कम पूंजी वाले उद्यमियों के लिए अलग से भूखंड लेना मुश्किल होता है। इसी वजह से छोटे उद्यमियों को एक साथ कई सुविधाएं देने वाले एमएसएमई पार्क या फ्लैटेड फैक्टरी मॉडल पर जोर दिया जा रहा है। ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी एमएसएमई समेत अलग-अलग औद्योगिक पार्कों और फ्लैटेड फैक्टरी की योजनाओं पर काम हो रहा है।
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प्रस्तावित व्यवस्था में कम क्षेत्रफल के भूखंडों के साथ साझा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है। इससे उद्यमियों को पूरी जमीन खरीदने और बुनियादी ढांचा विकसित करने का खर्च कम करने में मदद मिल सकती है। केंद्र की एमएसई-सीडीपी योजना में भी औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, बिजली वितरण और कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी सुविधाओं के विकास के लिए सहायता का प्रावधान है। बता दें कि यूपी की एमएसएमई नीति के तहत पार्क विकसित करने के लिए प्लेज योजना भी संचालित है। इसमें पात्र पार्कों में जमीन खरीदने या लीज पर लेने वाले उद्यमियों को सहायता का प्रावधान है। ऐसे में उम्मीद है कि यूपीसीडा की जमीन पर अपैरल पार्क की तरह ही एमएसएमई पार्क बनाया जा सकता है।
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अब जमीन उपलब्ध की चुनौती
जिला उद्योग केंद्र और प्राधिकरण के सामने अब चुनौती इच्छुक उद्यमियों के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध कराने की है। 300 से ज्यादा आवेदनों से यह संकेत मिलता है कि छोटे स्तर पर उद्योग लगाने में रुचि है। ऐसे में नए एमएसएमई पार्क की योजना में प्लॉट का आकार, दर, साझा सुविधाएं और आवंटन की प्रक्रिया अहम होगी। हालांकि, प्रस्तावित पार्क का स्थान, कुल क्षेत्रफल और प्लॉट की संख्या पर अंतिम निर्णय अभी सामने नहीं आया है।
एमएसएमई पार्क विकसित करने पर मंथन किया जा रहा है, इसकी डीपीआर तैयार की जा रही है। इसके बाद शासन स्तर पर पेश की जाएगी।
-पंकज निर्वाण, उद्योग उपायुक्त, गौतमबुद्ध नगर