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नोएडा में वाहन चोर गिरोह का खुलासा: जैमर से बंद करते थे जीपीएस, ट्रैकिंग गिरोह ने चुराए 200 से ज्यादा वाहन
Thu, 05 Feb 2026 08:04 AM IST
राहुल तिवारी
माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा
Published by: राहुल तिवारी
Updated Thu, 05 Feb 2026 08:04 AM IST
सार
नोएडा सेक्टर-39 पुलिस ने अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश कर सरगना समेत छह बदमाशों को गिरफ्तार किया। गिरोह जीपीएस जैमर लगाकर 200 से ज्यादा वाहन चोरी कर चुका है। तीन कार व उपकरण बरामद हुए, कई आरोपियों पर विभिन्न राज्यों में दर्जनों केस दर्ज हैं।
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छह शातिर चोर गिरफ्तार (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नोएडा कोतवाली सेक्टर-39 पुलिस ने वाहन चुराने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। सरगना समेत छह बदमाश दबोचे भी हैं। बदमाश चोरी के वाहनों में जीपीएस जैमर लगाते थे ताकि ट्रेस न किया जा सकें। ये कई राज्यों में 200 से अधिक वाहन चुरा चुके हैं। इनसे चोरी की तीन कार और उपकरण बरामद हुए हैं। कई बदमाशों पर अलग-अलग राज्यों में 50 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं।
नोएडा जोन के डीसीपी यमुना प्रसाद ने बताया कि कोतवाली सेक्टर-39 की टीम ने बुधवार को संभल के नीमखेड़ा निवासी समीर उर्फ दाऊद उर्फ कुंजा, कोडगर्भी निवासी सलीम व इचोड़ा निवासी सलीम, दिल्ली के मुस्तफाबाद निवासी आजाद, राजस्थान के जोधपुर निवासी मोहसिन और फैसल को दबोचा। समीर गिरोह का सरगना है। उसके खिलाफ दिल्ली, नोएडा, अमरोहा के विभिन्न थानों में 14 एफआईआर दर्ज हैं। सलीम के खिलाफ सात, आजाद के खिलाफ 38 केस दर्ज हैं।
पांचवीं पास है गिरोह का सरगना
इस गिरोह में शामिल बदमाश कम पढ़े लिखे हैं लेकिन इन्हें वाहनों की तकनीकी जानकारी है। इस गिरोह का सरगना समीर पांचवीं तक पढ़ा है। अन्य पांचवीं से नौवीं तक पढ़े हैं। पूछताछ में बदमाशों ने बताया कि ये लोग कम समय में अधिक पैसे कमाने की लालच में वाहन चुराने लगे। इसके बाद इसमें पूरी तरह से शामिल हो गए। ये बदमाश कई बार जेल भी जा चुके हैं। अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करने वाली सेक्टर-39 थाना पुलिस की टीम को डीसीपी ने 25 हजार का इनाम देने की घोषणा की है।
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2013से सक्रिय थे गिरोह के बदमाश
पुलिस पूछताछ में पता चला कि बदमाशों का नेटवर्क यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब से लेकर राजस्थान तक है। ये 2013 से वाहनों की चोरी कर रहे थे। हाल के महीनों में इन बदमाशों ने नोएडा और गाजियाबाद के अलावा अमरोहा और राजस्थान में भी वाहन की घटनाएं की हैं।
ऐसे करते थे वारदात
डीसीपी ने बताया कि गिरोह के बदमाश टैक्सी गाड़ी से रेकी करते थे। अलग-अलग शहरों में घूमकर देखते थे। रेकी के बाद गिरोह के सदस्य तय समय पर पहुंचते थे। रात में प्रोग्रामर की मदद से चिह्नित गाड़ी का लॉक तोड़ते थे। इसके बाद चोरी की गई कार में तुरंत जीपीएस जैमर लगा देते थे। इससे वाहन का जीपीएस सिस्टम काम करना बंद कर देता है और पुलिस को लोकेशन ट्रेस करने में परेशानी होती है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि चोरी की गई कारों को राजस्थान, हरियाणा और अन्य राज्यों में ऑन-डिमांड बेचते थे। जो गाड़ियां नहीं बिक पाती थीं उनके पुर्जा अलग कर दिल्ली के अलग-अलग ऑटो पार्ट्स बाजारों में बेचा जाता था। इससे मिलने वाली रकम को गिरोह के सभी सदस्य आपस में बांट लेते थे।
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नोएडा जोन के डीसीपी यमुना प्रसाद ने बताया कि कोतवाली सेक्टर-39 की टीम ने बुधवार को संभल के नीमखेड़ा निवासी समीर उर्फ दाऊद उर्फ कुंजा, कोडगर्भी निवासी सलीम व इचोड़ा निवासी सलीम, दिल्ली के मुस्तफाबाद निवासी आजाद, राजस्थान के जोधपुर निवासी मोहसिन और फैसल को दबोचा। समीर गिरोह का सरगना है। उसके खिलाफ दिल्ली, नोएडा, अमरोहा के विभिन्न थानों में 14 एफआईआर दर्ज हैं। सलीम के खिलाफ सात, आजाद के खिलाफ 38 केस दर्ज हैं।
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पांचवीं पास है गिरोह का सरगना
इस गिरोह में शामिल बदमाश कम पढ़े लिखे हैं लेकिन इन्हें वाहनों की तकनीकी जानकारी है। इस गिरोह का सरगना समीर पांचवीं तक पढ़ा है। अन्य पांचवीं से नौवीं तक पढ़े हैं। पूछताछ में बदमाशों ने बताया कि ये लोग कम समय में अधिक पैसे कमाने की लालच में वाहन चुराने लगे। इसके बाद इसमें पूरी तरह से शामिल हो गए। ये बदमाश कई बार जेल भी जा चुके हैं। अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करने वाली सेक्टर-39 थाना पुलिस की टीम को डीसीपी ने 25 हजार का इनाम देने की घोषणा की है।
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2013से सक्रिय थे गिरोह के बदमाश
पुलिस पूछताछ में पता चला कि बदमाशों का नेटवर्क यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब से लेकर राजस्थान तक है। ये 2013 से वाहनों की चोरी कर रहे थे। हाल के महीनों में इन बदमाशों ने नोएडा और गाजियाबाद के अलावा अमरोहा और राजस्थान में भी वाहन की घटनाएं की हैं।
ऐसे करते थे वारदात
डीसीपी ने बताया कि गिरोह के बदमाश टैक्सी गाड़ी से रेकी करते थे। अलग-अलग शहरों में घूमकर देखते थे। रेकी के बाद गिरोह के सदस्य तय समय पर पहुंचते थे। रात में प्रोग्रामर की मदद से चिह्नित गाड़ी का लॉक तोड़ते थे। इसके बाद चोरी की गई कार में तुरंत जीपीएस जैमर लगा देते थे। इससे वाहन का जीपीएस सिस्टम काम करना बंद कर देता है और पुलिस को लोकेशन ट्रेस करने में परेशानी होती है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि चोरी की गई कारों को राजस्थान, हरियाणा और अन्य राज्यों में ऑन-डिमांड बेचते थे। जो गाड़ियां नहीं बिक पाती थीं उनके पुर्जा अलग कर दिल्ली के अलग-अलग ऑटो पार्ट्स बाजारों में बेचा जाता था। इससे मिलने वाली रकम को गिरोह के सभी सदस्य आपस में बांट लेते थे।