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Noida News: एसआईटी ने दो प्रभारी समेत छह सब रजिस्ट्रार को भेजा आरोप पत्र, 15 दिन में जवाब मांगा

Tue, 28 Feb 2023 01:31 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 28 Feb 2023 01:31 AM IST
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SIT sent charge sheet to six sub-registrars including two in-charge, sought reply in 15 days
अमर उजाला की खबर का असर
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एसआईटी ने दो प्रभारी समेत छह सब रजिस्ट्रार को भेजा आरोप पत्र, 15 दिन में जवाब मांगा



-शासन से जल्द होगी निलंबन की कार्रवाई, अमर उजाला ने उठाया था मुददा
-पांच नोएडा और एक जेवर में रहे हैं तैनात
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर में मुख्तारनामे के नाम पर प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि पहुंचाने वाले आरोपी सब रजिस्ट्रार के खिलाफ जांच में छह अधिकारियों को दोषी पाया गया है। इन पर अब निलंबन की कार्रवाई होगी। हालांकि एसआईटी यह भी जांच कर रही है कि मुख्तारनामों से कितनी जमीन एक दूसरे के नाम पर ट्रांसफर की गई है। इसके बाद शासन दोषी अधिकरियों से नुकसान की वसूली करने का भी विचार कर रहा है। एसआईटी ने जिले के दो प्रभारी समेत छह सब रजिस्ट्रार को आरोप पत्र भेजकर 15 दिन में जवाब मांगा है। वहीं दादरी के पूर्व और ग्रेटर नोएडा के सब रजिस्ट्रार को आरोप पत्र नहीं मिले हैं। जो चर्चा का विषय बना हुआ है।

गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में भू माफिया और रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों का खेल दिसंबर-2023 में सरकार के सामने आ गया है। शासन ने इन दोनों जिलों में होने वाले मुख्तारनामा (पॉवर ऑफ अटॉर्नी) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। इस घोटाले में सिर्फ स्टांप चोरी ही नहीं की गई बल्कि बड़े स्तर पर मोटी रकम की जमीन का हस्तांतरण नाममात्र राशि देकर करा लिया गया। भू माफिया यशपाल तोमर समेत कई लोगों ने इस व्यवस्था का जमकर लाभ उठाया था। इसी के तहत अधिकारियों ने भी मोटी रिश्वत ली है। गौतमबुद्ध नगर में 11 हजार मुख्तारनामा रजिस्टर्ड किए गए थे। इनमें हरियाणा, दिल्ली समेत कई अन्य प्रदेशों के लोगों ने यहां पर मुख्तारनमा से जमीन का लेन देन किया। एसआईटी की जांच में गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में 25 हजार मुख्यतारनामा बाहरी प्रदेश के मिले हैं। गाजियाबाद में चार सब रजिस्ट्रार पर निलंबन की कार्रवाई की गई थी। मगर गौतमबुद्धनगर के अधिकारियों पर कार्रवाई न होने से सवाल खड़े हो रहे थे। अमर उजाला ने इस घोटाले को प्रमुखता से उठाया था। नोएडा के सब रजिस्ट्रार प्रथम के यशवंत कुमार सिंह, नोएडा सब रजिस्ट्रार द्वितीय कैलाश नाथ सिंह, नोएडा सब रजिस्ट्रार तृतीय प्रभारी विकास वर्मा, नोएडा सब रजिस्ट्रार द्वितीय के प्रभारी रह चुके बाबू ओमकार वर्मा समेत एक अन्य सब रजिस्ट्रार के अलावा जेवर के पूर्व सब रजिस्ट्रार आलोक कुमार को आरोप पत्र भेजा गया है। आलोक कुमार इस समय लखनऊ मुख्यालय से अटैच हैं।
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जेवर सब रजिस्ट्रार ने कराया था करोड़ों
का घोटाला


नोएडा एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इसमें जेवर सब रजिस्ट्रार के रहते हुए आलोक कुमार ने 10 से 50 वर्गमीटर खेती की जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। जबकि जिलाधिकारी ने इस पर रोक लगाई थी। भूमाफिया और कुछ दलालों से मिलकर हजारों की संख्या में ऐसी रजिस्ट्री कराई थी। जबकि 10 से 50 वर्गमीटर पर कोई खेती नहीं की जा सकती है। इसके बावजूद आलोक कुमार छह से आठ करोड़ रुपये का प्रदेश सरकार को नुकसान पहुंचाया था।
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जिले का निवासी या संपत्ति होनी जरूरी

नियमों के तहत अगर कोई व्यक्ति मुख्तारनामा कराता है तो वह जिले का निवासी होना चाहिए। अगर वह निवासी नहीं है तो उनके नाम से जिले में जमीन होनी चाहिए। दोनों में से एक शर्त पूरी करने पर ही मुख्तारनामा जायज माना जाएगा। अगर इनका पालन नहीं किया गया तो फिर उसे शून्य माना जाएगा।

अवैध प्लॉटिंग काटने में होता है सबसे अधिक प्रयोग

मुख्तारनामे का सबसे अधिक प्रयोग अवैध प्लाॅटिंग काटने में किया जाता है। काॅलोनाइजर और भूमाफिया किसानों से जीपीए करा लेते हैं। उसी के आधार पर कॉलोनी में भूखंडो की रजिस्ट्री खरीदारों के नाम कर देते है। कॉलोनी काटने के बाद भूमाफिया फरार हो जाते हैं। उसके बाद जब प्रशासन या प्राधिकरण अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई होती है तो किसान उसमें फंस जाता है।
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