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Noida News: निजी स्कूलों के शिक्षकों के मामले में एकल पीठ का आदेश रद्द
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-छठे और सातवें केंद्रीय वेतन आयोग के अनुसार वेतन, एरिया व पेंशन मामले में दायर की थी याचिका
-कहा, शिक्षकों की योग्यता व फीस वृद्धि मामले में नए सिरे से सुनवाई होगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निजी अनुदान रहित स्कूलों के शिक्षकों को छठे और सातवें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) के अनुसार वेतन, एरियर और पेंशन देने के एकलपीठ के आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की बेंच ने मामले को रोस्टर बेंच के पास ताजा सुनवाई के लिए भेज दिया।
बेंच ने कहा कि एकलपीठ ने शिक्षकों की सीपीसी लाभ की पात्रता, नियुक्ति प्रक्रिया और स्कूलों के फीस बढ़ाने के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार नहीं किया। कोर्ट ने कमेटियों को न्यायिक शक्तियां सौंपने पर भी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि न्यायिक कार्य कमेटियों पर नहीं सौंपा जा सकता। कमेटी में शिक्षकों का कोई प्रतिनिधि भी नहीं है।
यह है मामला
दिल्ली के 50 से अधिक निजी स्कूलों (जैसे सेंट मारग्रेट, जीडी गोयनका, रायन इंटरनेशनल, अहलकों, युवशक्ति आदि) के सैकड़ों शिक्षकों ने 6ठी-7वीं वेतन आयोग लागू करने की मांग की थी। 17 नवंबर 2023 को न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला देते हुए कहा था कि ‘स्कूलों को वित्तीय तंगी का बहाना देकर वेतन आयोग लागू करने से छूट नहीं मिल सकती। अल्पसंख्यक स्कूल भी बाध्य हैं।’ उन्होंने फीस वृद्धि और वेतन निर्धारण के लिए कमेटियां गठित की थीं।
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दोनों ही पक्षों ने खंडपीठ में की थी अपील
स्कूलों और शिक्षकों दोनों ने अपील की। स्कूलों ने कहा कि उनका फीस तय करने का अधिकार छीना गया, जबकि शिक्षकों ने कमेटी के फैसले पर असहमति जताई। डिवीजन बेंच ने एकलपीठ के फैसले को अधूरा बताया और रद्द कर दिया। अब रोस्टर बेंच में सभी मुद्दों पर नई सुनवाई होगी। ऐसे में शिक्षकों का इंतजार बढ़ गया है।
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-कहा, शिक्षकों की योग्यता व फीस वृद्धि मामले में नए सिरे से सुनवाई होगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निजी अनुदान रहित स्कूलों के शिक्षकों को छठे और सातवें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) के अनुसार वेतन, एरियर और पेंशन देने के एकलपीठ के आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की बेंच ने मामले को रोस्टर बेंच के पास ताजा सुनवाई के लिए भेज दिया।
बेंच ने कहा कि एकलपीठ ने शिक्षकों की सीपीसी लाभ की पात्रता, नियुक्ति प्रक्रिया और स्कूलों के फीस बढ़ाने के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार नहीं किया। कोर्ट ने कमेटियों को न्यायिक शक्तियां सौंपने पर भी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि न्यायिक कार्य कमेटियों पर नहीं सौंपा जा सकता। कमेटी में शिक्षकों का कोई प्रतिनिधि भी नहीं है।
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यह है मामला
दिल्ली के 50 से अधिक निजी स्कूलों (जैसे सेंट मारग्रेट, जीडी गोयनका, रायन इंटरनेशनल, अहलकों, युवशक्ति आदि) के सैकड़ों शिक्षकों ने 6ठी-7वीं वेतन आयोग लागू करने की मांग की थी। 17 नवंबर 2023 को न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला देते हुए कहा था कि ‘स्कूलों को वित्तीय तंगी का बहाना देकर वेतन आयोग लागू करने से छूट नहीं मिल सकती। अल्पसंख्यक स्कूल भी बाध्य हैं।’ उन्होंने फीस वृद्धि और वेतन निर्धारण के लिए कमेटियां गठित की थीं।
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दोनों ही पक्षों ने खंडपीठ में की थी अपील
स्कूलों और शिक्षकों दोनों ने अपील की। स्कूलों ने कहा कि उनका फीस तय करने का अधिकार छीना गया, जबकि शिक्षकों ने कमेटी के फैसले पर असहमति जताई। डिवीजन बेंच ने एकलपीठ के फैसले को अधूरा बताया और रद्द कर दिया। अब रोस्टर बेंच में सभी मुद्दों पर नई सुनवाई होगी। ऐसे में शिक्षकों का इंतजार बढ़ गया है।