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Noida News: रोजगार का सशक्त माध्यम बन रहा रेशम उद्योग, छह हजार से ज्यादा लोग कर रहे काम
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Iउत्तराखंड में रेशम उद्योग नई ऊंचाई पर पहुंच चुका है। प्रदेश में सक्रिय उत्तराखंड कोऑपरेटिव रेशम फेडरेशन और सेंट्रल सिल्क बोर्ड के सहयोग से यह उद्योग रोजगार का भी सशक्त माध्यम बन रहा है। इसमें छह हजार से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं जिसमें पांच हजार केवल किसान ही हैं। उत्तराखंड कोऑपरेटिव रेशम फेडरेशन के एमडी आनंद एडी शुक्ल ने बताया कि प्रदेश में सबसे ज्यादा मलबरी रेशम का उत्पादन किया जा रहा है। इसकी गुणवत्ता देशभर में सराही जा रही है। रेशम उत्पादन में तकनीकी सहायता केंद्र सरकार से मिल रही है। इससे स्थानीय किसान और उद्यमी उच्च गुणवत्ता वाले कोकून तैयार कर रहे हैं। उत्तराखंड में तैयार किया गया रेशम का सामान बंगलूरू, कर्नाटका, दिल्ली, मुंबई, हिमांचल समेत देश-विदेश तक जा रहा है। उत्तराखंड में रेशम धागा निर्माण की फैक्टरी सेलाकुई में स्थित है। यहां बुक्सा जनजाति की महिलाएं विशेष रूप से कार्यरत हैं। इसमें धागा बनाने के लिए केवल महिलाएं ही हैं। इस रेशम धागे से उत्तराखंड में 500 से ज्यादा बुनकर सक्रिय हैं। एक बुनकर महीने में 25 से 30 हजार रुपये तक कमा लेते हैं। रेशम कीट पालन करने वाले किसान, रीलर, बुनकर और कारीगरों को मिलाकर छह हजार से ज्यादा लोगों को इस उद्योग से रोजगार मिला है।I
Iरेशम बनने की प्रक्रिया, कीड़े से कपड़े तक का सफरI
Iरेशम बनाने वाला कीड़ा मुख्य रूप से शहतूत की पत्तियां खाता है। एक कीड़ा लगभग 24 दिनों तक खाता है, फिर सात दिनों में कोकून बनाता है। एक महीने बाद ये कोकून संग्रहित किए जाते हैं। लगभग आठ कोकून मिलाकर एक धागा तैयार होता है। कोकून को गर्म पानी में डाला जाता है जिससे वह धागा छोड़ता है। धागे की रंगाई और बुनाई होती है। सिल्क में मुख्य दो प्रोटीन पाए जाते हैं सेरिसिन और फाइब्रोइन। सेरिसिन की परत हटाई जाती है जिससे सिल्क मुलायम बनती है। एक साड़ी तैयार करने में लगभग 20 से अधिक लोग काम करते हैं।I
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Iरेशम बनने की प्रक्रिया, कीड़े से कपड़े तक का सफरI
Iरेशम बनाने वाला कीड़ा मुख्य रूप से शहतूत की पत्तियां खाता है। एक कीड़ा लगभग 24 दिनों तक खाता है, फिर सात दिनों में कोकून बनाता है। एक महीने बाद ये कोकून संग्रहित किए जाते हैं। लगभग आठ कोकून मिलाकर एक धागा तैयार होता है। कोकून को गर्म पानी में डाला जाता है जिससे वह धागा छोड़ता है। धागे की रंगाई और बुनाई होती है। सिल्क में मुख्य दो प्रोटीन पाए जाते हैं सेरिसिन और फाइब्रोइन। सेरिसिन की परत हटाई जाती है जिससे सिल्क मुलायम बनती है। एक साड़ी तैयार करने में लगभग 20 से अधिक लोग काम करते हैं।I
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