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उपभोक्ता आयोग पहुंचे शाहबेरी के खरीदार
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उपभोक्ता आयोग पहुंचे शाहबेरी के खरीदार
ग्रेटर नोएडा। शाहबेरी के खरीदारों ने उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) से न्याय नहीं मिलने के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया है। करीब 6 खरीदारों ने बिल्डरों के खिलाफ प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। इस पर आयोग ने बिल्डरों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। आगामी सोमवार को शाहबेरी के मामलों पर पहली सुनवाई होगी।
17 जुलाई, 2018 की रात दो इमारतें गिरने और 9 लोगों की मौत के बाद ग्रेनो प्राधिकरण ने शाहबेरी के निर्माण को अवैध करार दिया था। साथ ही निर्माण को गिराने की तैयारी शुरू कर दी थी। इसके बाद कई खरीदार यूपी रेरा पहुंच गए। खरीदारों ने यूपी रेरा से पैसा वापस दिलाने की मांग की। पहले यूपी रेरा ने खरीदारों की शिकायतों पर सुनवाई की, लेकिन बाद में अधिकार क्षेत्र से बाहर बताकर सुनवाई से इंकार कर दिया। साथ ही शाहबेरी की 17 परियोजनाओं का पंजीकरण भी रद्द कर दिया था। खरीदारों ने प्राधिकरण से लेकर मुख्यमंत्री तक न्याय मांगा। इसके बाद यूपी रेरा ने फिर से मामलों को सुनने का फैसला लिया। पीठ दो ने सुनवाई की। प्राधिकरण ने भी अपना पक्ष रखा। सुनवाई पूरी होने के बाद पीठ ने यूपी रेरा की संपूर्ण बेंच के पास मामला भेज दिया। खरीदारों का कहना है कि करीब 8 माह से यूपी रेरा की संपूर्ण बेंच लगने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कुछ मालूम नहीं है। न्याय मिलने की उम्मीद खत्म होने के बाद अब उपभोक्ता आयोग से न्याय मांगा है। आयोग के पदाधिकारियों ने बताया कि इंद्र देव सचदेव और अंगदप्रीत सिंह समेत छह केस दायर हो चुके हैं। इनमें बिल्डरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
एक करोड़ तक के मामलों पर होगी सुनवाई
जिला उपभोक्ता फोरम अब जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बन गया है। अब यहां पर एक करोड़ रुपये तक के मामलों को सुना जा सकेगा। अभी तक यहां पर केवल 20 लाख रुपये तक के मामलों पर ही सुनवाई होती थी। इस समय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य दयाशंकर पांडेय हैं। यहीं नहीं, 5 लाख रुपये तक के मामलों की सुनवाई में कोई वाद शुल्क नहीं लगेगा। साथ ही अब पीड़ित किसी भी आयोग में वाद दायर कर सकता है। अभी तक केवल वहीं पर वाद दायर किया जाता था, जहां पर विपक्षी रहता हो।
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यूपी रेरा से न्याय की उम्मीद नहीं है। सभी शिकायतों को वापस लिया जाएगा। आयोग में अभी दो खरीदारों के प्रार्थना पत्र दाखिल किए हैं। बाकी 6 और खरीदारों के प्रार्थना पत्र जल्द दाखिल करेंगे। अब आयोग से ही न्याय की उम्मीद है। यूपी रेरा को एक पक्ष बनाया है। सोमवार को पहली सुनवाई होगी।
- हरप्रीत सिंह अरोड़ा, शाहबेरी खरीदार व अधिवक्ता
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ग्रेटर नोएडा। शाहबेरी के खरीदारों ने उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) से न्याय नहीं मिलने के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया है। करीब 6 खरीदारों ने बिल्डरों के खिलाफ प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। इस पर आयोग ने बिल्डरों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। आगामी सोमवार को शाहबेरी के मामलों पर पहली सुनवाई होगी।
17 जुलाई, 2018 की रात दो इमारतें गिरने और 9 लोगों की मौत के बाद ग्रेनो प्राधिकरण ने शाहबेरी के निर्माण को अवैध करार दिया था। साथ ही निर्माण को गिराने की तैयारी शुरू कर दी थी। इसके बाद कई खरीदार यूपी रेरा पहुंच गए। खरीदारों ने यूपी रेरा से पैसा वापस दिलाने की मांग की। पहले यूपी रेरा ने खरीदारों की शिकायतों पर सुनवाई की, लेकिन बाद में अधिकार क्षेत्र से बाहर बताकर सुनवाई से इंकार कर दिया। साथ ही शाहबेरी की 17 परियोजनाओं का पंजीकरण भी रद्द कर दिया था। खरीदारों ने प्राधिकरण से लेकर मुख्यमंत्री तक न्याय मांगा। इसके बाद यूपी रेरा ने फिर से मामलों को सुनने का फैसला लिया। पीठ दो ने सुनवाई की। प्राधिकरण ने भी अपना पक्ष रखा। सुनवाई पूरी होने के बाद पीठ ने यूपी रेरा की संपूर्ण बेंच के पास मामला भेज दिया। खरीदारों का कहना है कि करीब 8 माह से यूपी रेरा की संपूर्ण बेंच लगने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कुछ मालूम नहीं है। न्याय मिलने की उम्मीद खत्म होने के बाद अब उपभोक्ता आयोग से न्याय मांगा है। आयोग के पदाधिकारियों ने बताया कि इंद्र देव सचदेव और अंगदप्रीत सिंह समेत छह केस दायर हो चुके हैं। इनमें बिल्डरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
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एक करोड़ तक के मामलों पर होगी सुनवाई
जिला उपभोक्ता फोरम अब जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बन गया है। अब यहां पर एक करोड़ रुपये तक के मामलों को सुना जा सकेगा। अभी तक यहां पर केवल 20 लाख रुपये तक के मामलों पर ही सुनवाई होती थी। इस समय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य दयाशंकर पांडेय हैं। यहीं नहीं, 5 लाख रुपये तक के मामलों की सुनवाई में कोई वाद शुल्क नहीं लगेगा। साथ ही अब पीड़ित किसी भी आयोग में वाद दायर कर सकता है। अभी तक केवल वहीं पर वाद दायर किया जाता था, जहां पर विपक्षी रहता हो।
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यूपी रेरा से न्याय की उम्मीद नहीं है। सभी शिकायतों को वापस लिया जाएगा। आयोग में अभी दो खरीदारों के प्रार्थना पत्र दाखिल किए हैं। बाकी 6 और खरीदारों के प्रार्थना पत्र जल्द दाखिल करेंगे। अब आयोग से ही न्याय की उम्मीद है। यूपी रेरा को एक पक्ष बनाया है। सोमवार को पहली सुनवाई होगी।
- हरप्रीत सिंह अरोड़ा, शाहबेरी खरीदार व अधिवक्ता