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Noida News: हैंडओवर के 5 साल बाद बिल्डर की वापसी, करोड़ों का मरम्मत कार्य शुरू
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-सोसाइटी की एओए ने हैंडओवर मिलने के पांच वर्ष बाद बिल्डर को जवाबदेह ठहराया-एओए ने प्रयास करके मरम्मत का जिम्मा बिल्डर के कंधों पर डलवाया
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर की हाईराइज सोसाइटियों में आए दिन गिरते प्लास्टर और इमारतों के जर्जर ढांचे की खबरों के बीच सेक्टर 78 हाइड पार्क सोसाइटी ने एक नजीर पेश की है। सोसाइटी की अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन (एओए) ने हैंडओवर मिलने के पांच वर्ष बाद बिल्डर को न सिर्फ जवाबदेह ठहराया, बल्कि करोड़ों रुपये की व्यापक मरम्मत का पूरा जिम्मा भी बिल्डर के कंधों पर डलवाया।
सोसाइटी के एओए पदाधिकारियों ने बताया कि सोसाइटी में लंबे समय से प्लास्टर गिरने और लोगों के चोटिल होने की घटनाएं सामने आ रही थीं। स्थिति का तकनीकी आकलन कराने पर सामने आया कि बिल्डिंग की मरम्मत में करोड़ों रुपये का खर्च आएगा। एओए के पास सीमित मेंटेनेंस फंड था और आम सोसाइटियों की तरह निवासियों पर लाखों रुपये का अतिरिक्त चंदा थोपना उचित नहीं था। ऐसे में एओए ने निवासियों पर वित्तीय बोझ डालने के बजाय मूल निर्माणकर्ता संस्था से जवाबदेही तय करने का फैसला किया।
महीनों की वार्ताओं के बाद तैयार हुआ बिल्डर
सोसाइटी के एओए अध्यक्ष सुजीत कुमार ने बताया कि एओए की ओर से निंबस रियल्टी के सीएमडी बिपिन अग्रवाल के साथ लगातार कई दौर की बैठकें की गईं। सोसाइटी की वास्तविक और जोखिम भरी स्थिति से अवगत कराने के बाद बिल्डर मरम्मत का जिम्मा उठाने पर राजी हुआ।
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विरोधी हवाओं के बीच साधी मंजिल
एओए प्रतिनिधियों ने बताया कि इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें अंदरूनी राजनीति और कुछ तत्वों के भारी विरोध का सामना भी करना पड़ा, जिन्होंने बिल्डर को भ्रमित करने की कोशिश की। इसके बावजूद संवाद जारी रखा गया। एओए ने सहयोग के लिए निवासियों के भरोसे और सकारात्मक रुख के लिए बिल्डर प्रबंधन का आभार जताया है।
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जर्जर फ्लैट के अंदर भी हो रहा रेनोवेशन
एओए अध्यक्ष सुजीत कुमार ने बताया कि सोसाइटी में कुल 23 टावर और 2100 फ्लैट हैं और यहां पर 2016 से लोगों ने रहना शुरू कर दिया था। सोसाइटी में कुछ ऐसे फ्लैट भी हैं जिनके अंदर प्लास्टर गिरा था और हालत बहुत जर्जर हो चुकी थी। ऐसे फ्लैट को चिह्नित करके अंदर रेनोवेशन का कार्य भी करवाया जा रहा है। फ्लैट निवासियों को फिलहाल के लिए दूसरे फ्लैट में रहने दिया जा रहा है। इसमें शिफ्टिंग से लेकर रेनोवेशन का पूरा खर्च भी बिल्डर ही उठा रहा है।
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10 साल पुराने हमारे फ्लैट की हालत खराब हो रही थी, सीलन की वजह से छत गिर गई थी और किरायेदार को चोट भी लगी थी, अब फ्लैट ठीक हो गया है।
नवीन बिष्ट
हमारे फ्लैट की छत का प्लास्टर का गिर रहा था, ऐसे में कभी डाइनिंग टेबल और कभी कमरों में गिरता था। टाइल्स भी टूटे हुए थे, अब ठीक हो गया है-रमेशचंद्र धर
टावरों के बाहर का प्लास्टर, फाइनल पेंटिंग और कुछ फ्लैट के अंदर रेनोवेशन का कार्य बिल्डर के खर्चे पर हो रहा है। करीब 35 से 40 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है-सुजीत कुमार, एओए अध्यक्ष
दिल्ली-एनसीआर में यह पहला मामला है, जहां हैंडओवर के वर्षों बाद बिल्डर अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ बुनियादी मरम्मत के लिए वापस लौटा है-अमित गुप्ता, एओए सचिव
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-सोसाइटी की एओए ने हैंडओवर मिलने के पांच वर्ष बाद बिल्डर को जवाबदेह ठहराया-एओए ने प्रयास करके मरम्मत का जिम्मा बिल्डर के कंधों पर डलवाया
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर की हाईराइज सोसाइटियों में आए दिन गिरते प्लास्टर और इमारतों के जर्जर ढांचे की खबरों के बीच सेक्टर 78 हाइड पार्क सोसाइटी ने एक नजीर पेश की है। सोसाइटी की अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन (एओए) ने हैंडओवर मिलने के पांच वर्ष बाद बिल्डर को न सिर्फ जवाबदेह ठहराया, बल्कि करोड़ों रुपये की व्यापक मरम्मत का पूरा जिम्मा भी बिल्डर के कंधों पर डलवाया।
सोसाइटी के एओए पदाधिकारियों ने बताया कि सोसाइटी में लंबे समय से प्लास्टर गिरने और लोगों के चोटिल होने की घटनाएं सामने आ रही थीं। स्थिति का तकनीकी आकलन कराने पर सामने आया कि बिल्डिंग की मरम्मत में करोड़ों रुपये का खर्च आएगा। एओए के पास सीमित मेंटेनेंस फंड था और आम सोसाइटियों की तरह निवासियों पर लाखों रुपये का अतिरिक्त चंदा थोपना उचित नहीं था। ऐसे में एओए ने निवासियों पर वित्तीय बोझ डालने के बजाय मूल निर्माणकर्ता संस्था से जवाबदेही तय करने का फैसला किया।
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महीनों की वार्ताओं के बाद तैयार हुआ बिल्डर
सोसाइटी के एओए अध्यक्ष सुजीत कुमार ने बताया कि एओए की ओर से निंबस रियल्टी के सीएमडी बिपिन अग्रवाल के साथ लगातार कई दौर की बैठकें की गईं। सोसाइटी की वास्तविक और जोखिम भरी स्थिति से अवगत कराने के बाद बिल्डर मरम्मत का जिम्मा उठाने पर राजी हुआ।
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विरोधी हवाओं के बीच साधी मंजिल
एओए प्रतिनिधियों ने बताया कि इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें अंदरूनी राजनीति और कुछ तत्वों के भारी विरोध का सामना भी करना पड़ा, जिन्होंने बिल्डर को भ्रमित करने की कोशिश की। इसके बावजूद संवाद जारी रखा गया। एओए ने सहयोग के लिए निवासियों के भरोसे और सकारात्मक रुख के लिए बिल्डर प्रबंधन का आभार जताया है।
जर्जर फ्लैट के अंदर भी हो रहा रेनोवेशन
एओए अध्यक्ष सुजीत कुमार ने बताया कि सोसाइटी में कुल 23 टावर और 2100 फ्लैट हैं और यहां पर 2016 से लोगों ने रहना शुरू कर दिया था। सोसाइटी में कुछ ऐसे फ्लैट भी हैं जिनके अंदर प्लास्टर गिरा था और हालत बहुत जर्जर हो चुकी थी। ऐसे फ्लैट को चिह्नित करके अंदर रेनोवेशन का कार्य भी करवाया जा रहा है। फ्लैट निवासियों को फिलहाल के लिए दूसरे फ्लैट में रहने दिया जा रहा है। इसमें शिफ्टिंग से लेकर रेनोवेशन का पूरा खर्च भी बिल्डर ही उठा रहा है।
10 साल पुराने हमारे फ्लैट की हालत खराब हो रही थी, सीलन की वजह से छत गिर गई थी और किरायेदार को चोट भी लगी थी, अब फ्लैट ठीक हो गया है।
नवीन बिष्ट
हमारे फ्लैट की छत का प्लास्टर का गिर रहा था, ऐसे में कभी डाइनिंग टेबल और कभी कमरों में गिरता था। टाइल्स भी टूटे हुए थे, अब ठीक हो गया है-रमेशचंद्र धर
टावरों के बाहर का प्लास्टर, फाइनल पेंटिंग और कुछ फ्लैट के अंदर रेनोवेशन का कार्य बिल्डर के खर्चे पर हो रहा है। करीब 35 से 40 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है-सुजीत कुमार, एओए अध्यक्ष
दिल्ली-एनसीआर में यह पहला मामला है, जहां हैंडओवर के वर्षों बाद बिल्डर अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ बुनियादी मरम्मत के लिए वापस लौटा है-अमित गुप्ता, एओए सचिव