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Noida News: आरोप गंभीर, पर सबूत कमजोर निकले, कोर्ट ने किया बरी
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- पाॅक्सो एक्ट में दर्ज हुआ था केस, अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ पेश नहीं कर पाया ठोस सबूत
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जनपद की विशेष पाॅक्सो कोर्ट (प्रथम) ने नाबालिग के अपहरण और यौन उत्पीड़न के मामले में अमेठी निवासी आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा। मामला 17 जून 2021 का बताया जा रहा है।
पीड़िता की मां ने थाना कासना में तहरीर दी थी कि उनकी 16 वर्षीय बेटी को आरोपी बहला-फुसलाकर भगा ले गया था। पीड़िता को कानपुर से ढूंढा गया था। सुनवाई के दौरान गवाहों ने अभियोजन की कहानी का समर्थन करने से इन्कार कर दिया। वादी ने कहा कि केवल शक के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पीड़िता ने स्वयं को बालिग बताया, लेकिन हाईस्कूल की मार्कशीट के अनुसार घटना के समय उसकी आयु 16 वर्ष से कम पाई गई। अदालत ने माना चूंकि यौन शोषण या जबरन ले जाने का कोई सबूत नहीं मिला। इसलिए केवल उम्र के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती थी। विशेष न्यायाधीश ने कहा कि जब मुख्य गवाह और स्वयं पीड़िता अभियोजन की कहानी को नकार रहे हैं, तो आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने आरोपी को दोषमुक्त करते हुए उसके निजी मुचलके और जमानत बांड को रद्द कर दिया है।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जनपद की विशेष पाॅक्सो कोर्ट (प्रथम) ने नाबालिग के अपहरण और यौन उत्पीड़न के मामले में अमेठी निवासी आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा। मामला 17 जून 2021 का बताया जा रहा है।
पीड़िता की मां ने थाना कासना में तहरीर दी थी कि उनकी 16 वर्षीय बेटी को आरोपी बहला-फुसलाकर भगा ले गया था। पीड़िता को कानपुर से ढूंढा गया था। सुनवाई के दौरान गवाहों ने अभियोजन की कहानी का समर्थन करने से इन्कार कर दिया। वादी ने कहा कि केवल शक के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पीड़िता ने स्वयं को बालिग बताया, लेकिन हाईस्कूल की मार्कशीट के अनुसार घटना के समय उसकी आयु 16 वर्ष से कम पाई गई। अदालत ने माना चूंकि यौन शोषण या जबरन ले जाने का कोई सबूत नहीं मिला। इसलिए केवल उम्र के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती थी। विशेष न्यायाधीश ने कहा कि जब मुख्य गवाह और स्वयं पीड़िता अभियोजन की कहानी को नकार रहे हैं, तो आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने आरोपी को दोषमुक्त करते हुए उसके निजी मुचलके और जमानत बांड को रद्द कर दिया है।
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