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चालान से बचने के लिए बस पर लगाई अलग-अलग नंबर प्लेट
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जेवर। कोतवाली पुलिस ने बुधवार रात यमुना एक्सप्रेसवे के जेवर टोल प्लाजा पर एक ऐसी डबल डेकर बस को पकड़ा, जिसके आगे और पीछे अलग-अलग नंबर प्लेट लगी थी। पुलिस ने बस को कब्जे में लेकर फर्जी नंबर प्लेट लगाने के आरोप में चालक को गिरफ्तार कर लिया। चालान से बचने के लिए अलग-अलग नंबर प्लेट लगाई गई थी।
यमुना एक्सप्रेसवे के जेवर टोल चौकी इंचार्ज अमित सिंह राठौर ने बताया कि बुधवार रात टीम के साथ जेवर टोल पर वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान उन्होंने एक बस को रोककर कागजात की जांच की, तो पता चला कि बस के आगे नंबर कुछ और लिखा है और पीछे अलग नंबर है। पुलिस ने मथुरा के नौहझील निवासी चालक संतोष को गिरफ्तार कर सख्ती से पूछताछ की।
पता चला कि उसने बस मालिक दिल्ली के संत नगर (बुराड़ी) निवासी राजकुमार शर्मा की सलाह पर चालान से बचने के लिए बस पर आगे-पीछे अलग-अलग नंबर प्लेट लगाई थी। चालक ने पुलिस को बताया कि बस के पहले ही दो लाख रुपये के चालान कटे हुए हैं। चालान से परेशान होकर ही ऐसा किया गया।
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इलेक्ट्रिक टेप लगाकर बदला जाता है नंबर
बस चालक संतोष ने बताया कि प्लेट पर काले रंग की इलेक्ट्रिक टेप से अक्षरों को मिलाकर नंबर बदला जाता है। पकड़े जाने पर मौका मिलते ही टेप को उतारकर फेंक दिया जाता है। ऐसे में कार्रवाई नहीं हो पाती है।
हादसे के बाद बचने के लिए भी करते हैं फर्जी प्लेट का उपयोग
इससे पहले भी नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई ऐसे कमर्शियल वाहन पकड़े गए हैं, जिनमें आगे पीछे अलग-अलग नंबर प्लेट लगी हुई थी। इसके पीछे वाहन मालिकों की सोच रहती है कि किसी हादसे के बाद फर्जी नंबर प्लेट लगी होने से वाहन आसानी से बच निकलता है।
यमुना एक्सप्रेसवे के जेवर टोल प्लाजा पर शाम को वाहनों की चेकिंग चलती है। फर्जी नंबर प्लेट या बिना नंबर के चलने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
-अमित सिंह राठौर, चौकी प्रभारी
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यमुना एक्सप्रेसवे के जेवर टोल चौकी इंचार्ज अमित सिंह राठौर ने बताया कि बुधवार रात टीम के साथ जेवर टोल पर वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान उन्होंने एक बस को रोककर कागजात की जांच की, तो पता चला कि बस के आगे नंबर कुछ और लिखा है और पीछे अलग नंबर है। पुलिस ने मथुरा के नौहझील निवासी चालक संतोष को गिरफ्तार कर सख्ती से पूछताछ की।
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पता चला कि उसने बस मालिक दिल्ली के संत नगर (बुराड़ी) निवासी राजकुमार शर्मा की सलाह पर चालान से बचने के लिए बस पर आगे-पीछे अलग-अलग नंबर प्लेट लगाई थी। चालक ने पुलिस को बताया कि बस के पहले ही दो लाख रुपये के चालान कटे हुए हैं। चालान से परेशान होकर ही ऐसा किया गया।
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इलेक्ट्रिक टेप लगाकर बदला जाता है नंबर
बस चालक संतोष ने बताया कि प्लेट पर काले रंग की इलेक्ट्रिक टेप से अक्षरों को मिलाकर नंबर बदला जाता है। पकड़े जाने पर मौका मिलते ही टेप को उतारकर फेंक दिया जाता है। ऐसे में कार्रवाई नहीं हो पाती है।
हादसे के बाद बचने के लिए भी करते हैं फर्जी प्लेट का उपयोग
इससे पहले भी नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई ऐसे कमर्शियल वाहन पकड़े गए हैं, जिनमें आगे पीछे अलग-अलग नंबर प्लेट लगी हुई थी। इसके पीछे वाहन मालिकों की सोच रहती है कि किसी हादसे के बाद फर्जी नंबर प्लेट लगी होने से वाहन आसानी से बच निकलता है।
यमुना एक्सप्रेसवे के जेवर टोल प्लाजा पर शाम को वाहनों की चेकिंग चलती है। फर्जी नंबर प्लेट या बिना नंबर के चलने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
-अमित सिंह राठौर, चौकी प्रभारी