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बिना मान्यता चल रहे स्कूल, शिक्षा विभाग खामोश
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ग्रेटर नोएडा। जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में बड़ी संख्या में बिना मान्यता प्राप्त स्कूल चल रहे हैं। नोएडा और ग्रेनो में ऐसे स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसकी वजह से विद्यार्थियों को ट्रांसफर सार्टिफिकेट (टीसी) निकलवाते समय दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं, शिक्षा विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। अधिकारियों की खामोशी विद्यार्थियों के भविष्य पर भारी पड़ सकती है। बेसिक शिक्षा विभाग के पोर्टल पर 1132 निजी स्कूल पंजीकृत हैं। वहीं, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लगभग 50 फीसदी स्कूलों जानकारी और सूची विभाग के पास नहीं है।
अभी हाल ही में नोएडा के खेतान स्कूल को भी मान्यता के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने नोटिस भेजा है। हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग के अंतर्गत सभी ब्लॉकों में कक्षा एक से आठ तक के स्कूल बिना बेसिक और माध्यमिक शिक्षा की मान्यता के चल रहे हैं। जबकि, शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत सभी निजी विद्यालयों को बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता लेना जरूरी है। बड़े से लेकर छोटे स्कूल इस तरह की नाफरमानी कर रहे हैं। आरोप है कि विभागीय कर्मियों के साथ मिलकर इस तरह का खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन शिकायतों के बाद भी इसकी सुध नहीं ली जा रही है।
बड़े स्कूलों की बोर्ड परीक्षा में देते हैं मार्कशीट
सूत्रों का कहना है कि स्कूल संचालक कोचिंग के रूप में कक्षाएं संचालित करते हैं। बोर्ड की मान्यता नहीं होने के कारण वह दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूलों से करार कर लेते हैं। विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा की अंक तालिका दूसरे स्कूलों की मिलती है। इसके लिए भी बच्चों से मोटी फीस वसूली जाती है। बेसिक शिक्षा विभाग की वेबासाइट और पोर्टल पर बहुत से स्कूल पंजीकृत नहीं हैं। कई बार अभिभावक स्कूल की शिकायत लेकर आते हैं, लेकिन विभाग को जानकारी नहीं होने की वजह से अभिभावक व बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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समय-समय पर अभियान चलाकर बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों पर कार्रवाई की जाती है। आगे भी इस तरह की कार्रवाई की जाएगी।
- धर्मेंद्र सक्सेना, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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अभी हाल ही में नोएडा के खेतान स्कूल को भी मान्यता के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने नोटिस भेजा है। हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग के अंतर्गत सभी ब्लॉकों में कक्षा एक से आठ तक के स्कूल बिना बेसिक और माध्यमिक शिक्षा की मान्यता के चल रहे हैं। जबकि, शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत सभी निजी विद्यालयों को बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता लेना जरूरी है। बड़े से लेकर छोटे स्कूल इस तरह की नाफरमानी कर रहे हैं। आरोप है कि विभागीय कर्मियों के साथ मिलकर इस तरह का खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन शिकायतों के बाद भी इसकी सुध नहीं ली जा रही है।
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बड़े स्कूलों की बोर्ड परीक्षा में देते हैं मार्कशीट
सूत्रों का कहना है कि स्कूल संचालक कोचिंग के रूप में कक्षाएं संचालित करते हैं। बोर्ड की मान्यता नहीं होने के कारण वह दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूलों से करार कर लेते हैं। विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा की अंक तालिका दूसरे स्कूलों की मिलती है। इसके लिए भी बच्चों से मोटी फीस वसूली जाती है। बेसिक शिक्षा विभाग की वेबासाइट और पोर्टल पर बहुत से स्कूल पंजीकृत नहीं हैं। कई बार अभिभावक स्कूल की शिकायत लेकर आते हैं, लेकिन विभाग को जानकारी नहीं होने की वजह से अभिभावक व बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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समय-समय पर अभियान चलाकर बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों पर कार्रवाई की जाती है। आगे भी इस तरह की कार्रवाई की जाएगी।
- धर्मेंद्र सक्सेना, बेसिक शिक्षा अधिकारी