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एनटीपीसी के रिटायर्ड एजीएम से 1.62 करोड़ रुपये की ठगी
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नोएडा। बंद बीमा पॉलिसी चालू कराने के नाम पर साइबर जालसाज ने एनटीपीसी के रिटायर्ड एजीएम से 1.62 करोड़ की ठगी कर ली। आरोप है कि जालसाज ने पिछले एक साल में सिक्योरिटी चार्ज, सेस, बैंक चार्ज, सर्विस चार्ज और जीएसटी सहित कई अन्य मदों के नाम पर ठगी की। पैसे लेने के बाद जब रिटायर्ड एजीएम का फोन उठाना आरोपियों ने बंद कर दिया, तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ। उन्होंने पुलिस से शिकायत की। कोतवाली सेक्टर-113 पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
सेक्टर-113 थाना प्रभारी शरद कांत ने बताया कि सेक्टर-75 में रहने वाले सुदामा प्रसाद कुशवाहा एनटीपीसी से रिटायर्ड असिस्टेंट जनरल मैनेजर हैं। उन्होंने शिकायत की है कि करीब एक साल पहले एक महिला सुषमा तिवारी ने फोन कर बताया था कि वह एचडीएफसी बैंक से बोल रही है। उसने उनकी एचडीएफसी बैंक की बंद पड़ी दो बीमा पॉलिसी के बारे में बताया। इस पर पीड़ित ने कहा कि कुछ साल पहले दोनों पॉलिसी ली थीं, लेकिन किश्त नहीं भर पाया था। इस कारण दोनों पॉलिसी बंद हो गईं। इस पर महिला ने उनकी पुरानी किश्तों को ब्याज सहित वापस कराने की बात कही और उन्हें बैंक की प्रक्रिया में शामिल कराया। उन्हें एक फॉर्म भेजा जिसमें उन्हें अपनी पूरी डिटेल भरकर 20 हजार फीस जमा कराने के लिए कहा।
आरोप है कि इसके बाद पिछले एक साल से अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर कई फॉर्म भरवा लिए। हर फॉर्म के साथ जीएसटी, सेस चार्ज, बैंक चार्ज, सर्विस चार्ज, सिक्योरिटी चार्ज सहित अन्य नाम पर एक करोड़ 62 लाख रुपये ले लिए। पीड़ित का कहना है कि जब भी आरोपियों से इतने चार्ज के बारे में पूछते तो वे लोग पूरे पैसे ब्याज सहित वापस देने का झांसा देते थे। पिछले महीने जब वह आरोपियों से अपने रुपये वापस मांगने लगे तो आरोपियों ने अपना फोन बंद कर दिए। एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर ली है और जांच की जा रही है।
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ऐसे बरतें सावधानी
- किसी अज्ञात फोन कॉलर की बातों में न आएं।
- किसी भी अज्ञात शख्स को बीमा, शेयर या किसी तरह के निवेश की जानकारी न दें।
- किसी को भी अपना डेबिट, क्रेडिट कार्ड का पिन नंबर न बताएं।
- मोबाइल पर आए अज्ञात लिंक को क्लिक नहीं करें।
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सेक्टर-113 थाना प्रभारी शरद कांत ने बताया कि सेक्टर-75 में रहने वाले सुदामा प्रसाद कुशवाहा एनटीपीसी से रिटायर्ड असिस्टेंट जनरल मैनेजर हैं। उन्होंने शिकायत की है कि करीब एक साल पहले एक महिला सुषमा तिवारी ने फोन कर बताया था कि वह एचडीएफसी बैंक से बोल रही है। उसने उनकी एचडीएफसी बैंक की बंद पड़ी दो बीमा पॉलिसी के बारे में बताया। इस पर पीड़ित ने कहा कि कुछ साल पहले दोनों पॉलिसी ली थीं, लेकिन किश्त नहीं भर पाया था। इस कारण दोनों पॉलिसी बंद हो गईं। इस पर महिला ने उनकी पुरानी किश्तों को ब्याज सहित वापस कराने की बात कही और उन्हें बैंक की प्रक्रिया में शामिल कराया। उन्हें एक फॉर्म भेजा जिसमें उन्हें अपनी पूरी डिटेल भरकर 20 हजार फीस जमा कराने के लिए कहा।
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आरोप है कि इसके बाद पिछले एक साल से अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर कई फॉर्म भरवा लिए। हर फॉर्म के साथ जीएसटी, सेस चार्ज, बैंक चार्ज, सर्विस चार्ज, सिक्योरिटी चार्ज सहित अन्य नाम पर एक करोड़ 62 लाख रुपये ले लिए। पीड़ित का कहना है कि जब भी आरोपियों से इतने चार्ज के बारे में पूछते तो वे लोग पूरे पैसे ब्याज सहित वापस देने का झांसा देते थे। पिछले महीने जब वह आरोपियों से अपने रुपये वापस मांगने लगे तो आरोपियों ने अपना फोन बंद कर दिए। एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर ली है और जांच की जा रही है।
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- किसी अज्ञात फोन कॉलर की बातों में न आएं।
- किसी भी अज्ञात शख्स को बीमा, शेयर या किसी तरह के निवेश की जानकारी न दें।
- किसी को भी अपना डेबिट, क्रेडिट कार्ड का पिन नंबर न बताएं।
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