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ससुराल में रहने के अधिकार में सुरक्षित और स्वस्थ जीवन भी शामिल : हाईकोर्ट

Wed, 05 Apr 2023 09:18 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 05 Apr 2023 09:18 PM IST
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Right to live in in-laws house also includes safe and healthy life: High Court
- पति और सास द्वारा उत्पीड़न किए जाने संबंधी महिला के आरोपों पर की टिप्पणी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने कहा है कि घरेलू हिंसा कानून के खिलाफ ससुराल में रहने के अधिकार में सुरक्षित और स्वस्थ जीवन भी शामिल है। उच्च न्यायालय की यह टिप्पणी निचली अदालत के आदेश के खिलाफ एक महिला की याचिका पर की है। निचली अदालत ने उसके पति और सास द्वारा उत्पीड़न किए जाने संबंधी महिला के आरोपों को लेकर उसे कोई राहत देने से इनकार कर दिया था।

महिला ने दावा किया था कि उसका पति और सास उसे परेशान करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए साझा घर में 10 कुत्तों को खाना खिलाते हैं। न्यायमूर्ति तुषार राव गदेला ने महिला की याचिका पर महिला की सास व पति को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने कहा घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत ससुराल में रहने के अधिकार में ''''सुरक्षित और स्वस्थ्य जीवन'''' की परिभाषा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इसलिए इसमें अदालत को हस्तक्षेप करने की जरूरत है। वकील ने अदालत में कई तस्वीरें भी पेश की, जिनमें प्रतिवादियों को घर में कई कुत्तों को देखा गया। अब उच्च न्यायालय ने महिला के पति और सास को याचिका पर चार हफ्तों के अंदर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई मई तक के लिए स्थगित कर दी है।
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