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संशोधित खबर: ऊपरी चक्कर समझ कराते रहे झाड़-फूंक, ‘दुआ से दवा तक’ ने दी नई जिंदगी

Wed, 31 May 2023 12:58 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 31 May 2023 12:58 AM IST
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Revised news: Exorcism continued to explain the upper affair, 'Dua Se Dawa Tak' gave new life
ऊपरी चक्कर समझ कराते रहे झाड़-फूंक, ‘दुआ से दवा तक’ ने दी नई जिंदगी
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- मुहिम से दो महीने में 60 लोग हुए ठीक, परिवार ने भूत प्रेत समझकर छोड़ दिया था साथ

- अप्रैल व मई में मिले 413 मिले मानसिक रोगी, शासन को भेजी रिपोर्ट



- मानसिक रोग से जूझ रहे जेल व शेल्टर होम के बच्चे

नेहा शर्मा



नोएडा। सेक्टर-66 ममूरा में रहने वाली 20 वर्षीय शिखा थोड़ी-थोड़ी देर में चीखने लगती थी। घर तक का सामान बाहर फेंक दिया करती थी। हद तो तब हो गई, जब शिखा ने चाकू से खुद का हाथ काट लिया। शुरुआत में परिजन ऊपरी चक्कर समझकर बाबाओं को दिखाते रहे। जब आराम नहीं मिला तो परिजन शिखा को झाड़ा लगवाने मंदिर पहुंचे। संयोग से उस दिन स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों का मंदिर पर ‘दुआ से दवा तक’ मुहिम चल रही थी।



शिखा की हालत देखकर डॉक्टर ने परिजनों को इलाज कराने की सलाह दी। लेकिन शिखा के पिता पढ़े लिखे नहीं है, इसलिए वो शिखा को मानसिक रोगी मानने को तैयार नहीं हुए। मंदिर प्रबंधकों के समझाने के बाद परिजनों ने इलाज कराने की हामी भरी। अब शिखा के बर्ताव में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। शिखा जैसे तमाम परिवार मानसिक बीमारी को ऊपरी चक्कर समझकर झाड़-फूंक करवा रहे हैं। डॉक्टर की टीम ने दो महीने में ऐसे ही 60 मरीजों को नई जिंदगी दी है।
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60 दिनों में मिले 413 मिले मानसिक रोगी



स्वास्थ्य विभाग की ओर से मानसिक रोगियों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके तहत दो महीने में 413 मानसिक रोगियों की पहचान कर इलाज किया जा रहा है। ‘दुआ से दवा तक’ मुहिम में 60 लोगों का इलाज किया गया है, इसमें से 10 मानसिक रोगियों की स्थिति इतनी खराब थी कि उनको हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। इस मुहिम के तहत मंदिर, पीर, गुरुद्वारों में जाकर डॉक्टरों की टीम मानसिक रोगियों का इलाज करती है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के तहत 49 मानसिक रोगियों की पहचान की गई। वहीं अलग-अलग ब्लॉक में चलने वाली ओपीडी में 261 लोगों की पहचान की गई।
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खराब मानसिक स्थिति से जूझ रहे शेल्टर होम के बच्चे



शेल्टर होम में पांच बच्चे मानसिक बीमार मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से उनकी काउंसलिंग की गई है। वहीं, जेल में 35 मानसिक रोगी मिले हैं। जिला अस्पताल में इनका इलाज चल रहा है। इसके अलावा 14 स्कूलों में भी बच्चों की काउंसलिंग की गई। ताकि अगर कोई बच्चा तनाव में हो तो उसको दूर किया जा सके।

रिलेशनशिप बना रहा डिप्रेशन का शिकार

मनोचिकित्सक डॉक्टर तनुजा गुप्ता ने बताया कि मानसिक रोगियों में 40 प्रतिशत मरीज सिर्फ डिप्रेशन के हैं। जब इन मरीजों की काउंसलिंग की जाती है तब पता चलता है कि रिलेशनशिप इसका सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा साइकोसिस बीमारी के भी मरीज बढ़े हैं। इसमें मरीज को भ्रम की स्थिति होती है। वो ऐसी स्थिति पर यकीन करते हैं जो वास्तविकता में होती ही नहीं है। उनको लगता है जैसे उनको तंग किया जा रहा है। अगर इलाज न कराएं तो बीमारी बढ़ती जाती है।




उन्होंने बताया कि हिस्टीरिया के मानसिक रोगी भी बढ़े हैं। जब कोई व्यक्ति मेंटली या इमोशनली परेशान होता है, तो अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करना चाहता है और असमान्य हरकतें करता है। अगर किसी को परिवार के सदस्य में कोई बदलाव दिख रहा है तो एक बार मनोचिकित्सक को जरूर दिखाना चाहिए।
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