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Noida News: खुलासा...20 फीसदी मरीज लक्षण होने के बाद भी नहीं कराते जांच, फैलाते हैं संक्रमण

Fri, 26 Sep 2025 01:51 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 26 Sep 2025 01:51 AM IST
सार

रेवाड़ी जिले में टीबी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग अभियान चला रहा है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कई मरीज समय पर जांच नहीं करवाते, जिससे संक्रमण फैल रहा है। जागरूकता और समय पर जांच से टीबी को नियंत्रित किया जा सकता है।

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Revealed... 20% of patients do not get tested even after having symptoms, spreading the infection.

विस्तार

रेवाड़ी। जिले में क्षय रोग (टीबी) की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग विशेष अभियान चला रहा है। जनवरी से अगस्त तक विभाग की ओर से 25,503 संदिग्ध मरीजों की जांच की गई, जिनमें 1246 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई है। चिकित्सकों के अनुसार इनमें से अधिकतर मरीजों में लंबे समय से बीमारी के लक्षण मौजूद थे, लेकिन उन्होंने समय पर जांच नहीं करवाई।
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यदि ये लोग पहले ही जांच करवा लेते तो खुद समय से इलाज कराने के साथ ही अपने परिवार और आसपास के अन्य लोगों को संक्रमण से बचा सकते थे। डिप्टी सिविल सर्जन व टीबी विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. दीपक वर्मा ने बताया कि सर्वे के अनुसार लगभग 20 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जिनमें लक्षण होने के बाद भी जांच या इलाज नहीं करवाते।
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यही कारण है कि बीमारी फैलती जाती है। एक संक्रमित मरीज 10 से 15 अन्य लोगों को संक्रमित करने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि विभाग की टीमें लोगों को जागरूक करती हैं। इस दौरान लोगों को लगातार खांसी आने, वजन घटने, बुखार या कमजोरी के लक्षण नजर आने पर तत्काल जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाता है। संवाद
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अन्य बीमारियों से ग्रस्त लोग अधिक संवेदनशील
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मधुमेह और एचआईवी से पीड़ित व्यक्तियों में टीबी होने की संभावना सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक होती है। इन बीमारियों के चलते शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और मरीज आसानी से संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। इसीलिए ऐसे मरीजों का टीबी टेस्ट विभाग प्राथमिकता से करवा रहा है।

औद्योगिक व घनी आबादी वाले क्षेत्रों में मरीज अधिक
डेटा से यह स्पष्ट हुआ है कि घनी आबादी और औद्योगिक इलाकों में मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। यहां कामकाजी लोगों की भीड़ और रहन-सहन की स्थिति बीमारी फैलने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियमित रूप से जांच शिविर लगाए जा रहे हैं, ताकि समय रहते मरीजों की पहचान हो सके और उनका इलाज शुरू किया जा सके। डॉ. दीपक वर्मा ने बताया कि कई लोग सामाजिक शर्म के कारण जांच करवाने से बचते हैं। इस मानसिकता को बदलने के लिए विभाग की ओर से जगह-जगह कैंप लगाकर लोगों को प्रेरित कर रहा है। मरीजों को यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है। सरकार की ओर से मुफ्त दवाइयां दी जाती हैं।

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वर्जन
यदि लोग शुरुआती स्तर पर ही जांच करवाएं तो टीबी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। जागरूकता से ही जिले को क्षयरोग मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।- डॉ. दीपक वर्मा, नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन, रेवाड़ी।
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