{"_id":"62041676d55d1b282435f50f","slug":"responsibility-of-increasing-support-entrusted-to-the-close-of-the-candidates-noida-news-noi6313960135","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रत्याशियों के करीबियों को सौंपी समर्थन बढ़ाने की जिम्मेदारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रत्याशियों के करीबियों को सौंपी समर्थन बढ़ाने की जिम्मेदारी
विज्ञापन
ग्रेटर नोएडा (जेपी शर्मा)। चुनाव प्रचार थमने के बाद प्रत्याशियों ने समीकरण अपने पक्ष में करने के लिए रणनीति में बदलाव कर दिया। मतदान से पहले 2 रात और एक दिन पहले प्रत्याशियों के करीबी उन गांवों और मतदाताओं से संपर्क करने का प्रयास किया, जहां उम्मीदवार नहीं पहुंच पाए थे। इसके अलावा विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों का रुख भी अपनी ओर मोड़ने का अंतिम प्रयास किया गया। वहीं, कुछ प्रत्याशियों के करीबी मतदाताओं को लुभाने के लिए अन्य हथकंडे भी अपना रहे हैं। कुछ उम्मीदवारों के रणनीतिकारों ने पूर्व नियोजित योजना के अनुसार विशेष बैठक पंचायत, ऑनलाइन बैठक या फिर फोन व वीडियो कॉल कीं। इसमें उन्होंने विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न संगठनों, ग्राम प्रधान, पूर्व प्रधान, बिरादरी सरदार आदि को आमंत्रित किया। इसमें आपसी मनमुटाव आदि भूलकर एकजुट होने का आह्वान किया
प्रचार में प्रत्याशी के समय न देने की दूर कर रहे नाराजगी
बताया गया है कि विधानसभा क्षेत्र के कई मतदाता तो अपने प्रत्याशियों से इस बात से नाराज हैं कि वह प्रचार के दौरान उनके गांव या गली में नहीं पहुंचे। वहीं, कुछ मतदाता इससे भी नाराज हैं कि प्रत्याशी गांव में आने के बावजूद उनके घर मिलने नहीं आए। ऐसे मतदाताओं को मनाने की जिम्मेदारी रणनीतिकारों ने अब प्रत्याशी के करीबी को सौंप गई।
असमंजस में पड़े मतदाताओं का रुख मोड़ने की कवायद
प्रत्याशी और उनके रणनीतिकारों का सबसे अधिक ध्यान चुनाव प्रचार थमने के बाद ऐसे मतदाताओं पर हैं, जिनका उन्हें आभास हो गया है कि वह अभी फैसला नहीं कर पाए हैं कि वह किसको वोट दें। रणनीतिकारों का मानना है कि मतदान से पहले ऐसे मतदाताओं का रुख अपने प्रत्याशी की ओर मोड़ा जा सकता है। वह इनसे संपर्क करने में जुट गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रचार में प्रत्याशी के समय न देने की दूर कर रहे नाराजगी
बताया गया है कि विधानसभा क्षेत्र के कई मतदाता तो अपने प्रत्याशियों से इस बात से नाराज हैं कि वह प्रचार के दौरान उनके गांव या गली में नहीं पहुंचे। वहीं, कुछ मतदाता इससे भी नाराज हैं कि प्रत्याशी गांव में आने के बावजूद उनके घर मिलने नहीं आए। ऐसे मतदाताओं को मनाने की जिम्मेदारी रणनीतिकारों ने अब प्रत्याशी के करीबी को सौंप गई।
विज्ञापन
असमंजस में पड़े मतदाताओं का रुख मोड़ने की कवायद
प्रत्याशी और उनके रणनीतिकारों का सबसे अधिक ध्यान चुनाव प्रचार थमने के बाद ऐसे मतदाताओं पर हैं, जिनका उन्हें आभास हो गया है कि वह अभी फैसला नहीं कर पाए हैं कि वह किसको वोट दें। रणनीतिकारों का मानना है कि मतदान से पहले ऐसे मतदाताओं का रुख अपने प्रत्याशी की ओर मोड़ा जा सकता है। वह इनसे संपर्क करने में जुट गए हैं।
विज्ञापन