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Noida News: सुपरटेक चेयरमैन की अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाने से इन्कार
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पटियाला हाउस कोर्ट ने जेल में 13 मई को आत्मसमर्पण करने का दिया निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को सुपरटेक के चेयरमैन और प्रमोटर आरके अरोड़ा की याचिका खारिज कर दी। अरोड़ा ने मेडिकल और स्वास्थ्य के आधार पर अंतरिम जमानत की अवधि 90 दिन और बढ़ाने की मांग की थी। अरोड़ा को पिछले साल जून में मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार जंगला ने याचिका खारिज करते हुए जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उन्हें आवश्यक चिकित्सा उपचार प्रदान करें। साथ ही, डॉक्टरों की ओर से निर्धारित दवाएं ले जाने की अनुमति दें। अदालत ने अरोड़ा को 13 मई को शाम 5 बजे तक जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों व हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार करते हुए चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है। खासकर तब जब कथित सर्जरी की तारीख अभी तक किसी निजी या सरकारी अस्पताल की ओर से तय नहीं की गई है। आवेदक हिरासत में रहते हुए बीमारी के संबंध में निर्धारित उपचार का लाभ उठा सकते हैं। आवेदक इस वर्ष 16 जनवरी से ही अंतरिम जमानत पर हैं। जांच पूरी होने के बाद अभियोजन पक्ष की शिकायत दायर की जा चुकी है, जिस पर पहले ही संज्ञान लिया जा चुका है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने शनिवार को सुपरटेक के चेयरमैन और प्रमोटर आरके अरोड़ा की याचिका खारिज कर दी। अरोड़ा ने मेडिकल और स्वास्थ्य के आधार पर अंतरिम जमानत की अवधि 90 दिन और बढ़ाने की मांग की थी। अरोड़ा को पिछले साल जून में मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार जंगला ने याचिका खारिज करते हुए जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उन्हें आवश्यक चिकित्सा उपचार प्रदान करें। साथ ही, डॉक्टरों की ओर से निर्धारित दवाएं ले जाने की अनुमति दें। अदालत ने अरोड़ा को 13 मई को शाम 5 बजे तक जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों व हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार करते हुए चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है। खासकर तब जब कथित सर्जरी की तारीख अभी तक किसी निजी या सरकारी अस्पताल की ओर से तय नहीं की गई है। आवेदक हिरासत में रहते हुए बीमारी के संबंध में निर्धारित उपचार का लाभ उठा सकते हैं। आवेदक इस वर्ष 16 जनवरी से ही अंतरिम जमानत पर हैं। जांच पूरी होने के बाद अभियोजन पक्ष की शिकायत दायर की जा चुकी है, जिस पर पहले ही संज्ञान लिया जा चुका है।
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