लखनऊ। राजस्थान के विख्यात लेखक पद्मश्री विजयदान देथा की चार कहानियों पर आधारित नाटकों का मंचन मंगलवार को संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे सभागार में किया गया। एक ओर जहां ''लाजवंती'' कहानी पर मंचित नाटक में एक विवाहिता के आंतरिक संघर्ष, प्रेम और स्वतंत्रता की दास्तान दिखी तो वहीं ''झूठी आस'' कहानी में नैतिकता व दुनियादारी की दुविधा दिखाई गई। वहीं ''खीर वाला राज्य'' और ''अनेकों हिटलर'' में आजादी के समय की कहानी दिखाई गई। लाजवंती एक राजस्थानी लोककथा है जिसमें थार रेगिस्तान के एक यात्री और एक महिला के रिश्तों का द्वंद दिखाया गया।
राजधानी के इमेंस एंड कल्चरल सोसाइटी और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा नई दिल्ली के सहयोग से तीस दिवसीय कार्यशाला की गई थी। ये नाटक इसी कार्यशाला के प्रतिभागियों ने तैयार किए थे। कार्यशाला निदेशक सुदीप चक्रवर्ती के नेतृत्व में मंचित नाटक में संकल्प, निखिल, विनायक, अवधेश, सृष्टि, सौम्या, अर्पित कुमार, अर्पित पांडे, आकाश, प्रिया,अचिंत,अरविंद, इकबाल, संदीप, आर्यन, ध्रुव, सृष्टि आदि के अभिनय को दर्शकों ने सराहा।

राजस्थान के विख्यात लेखक पद्मश्री विजयदान देथा की चार कहानियों पर आधारित नाटकों का मंचन मंगलवार

राजस्थान के विख्यात लेखक पद्मश्री विजयदान देथा की चार कहानियों पर आधारित नाटकों का मंचन मंगलवार

राजस्थान के विख्यात लेखक पद्मश्री विजयदान देथा की चार कहानियों पर आधारित नाटकों का मंचन मंगलवार

राजस्थान के विख्यात लेखक पद्मश्री विजयदान देथा की चार कहानियों पर आधारित नाटकों का मंचन मंगलवार