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पत्रकार के गैर जमानती वारंट बंद फ्लैट पर चस्पा कर लौटी राजस्थान पुलिस
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ग्रेटर नोएडा। पत्रकार अमन चोपड़ा की गिरफ्तारी के गैर जमानती वारंट लेकर शनिवार को अरिहंत आर्डन सोसाइटी पहुंची राजस्थान पुलिस को सुरक्षाकर्मियों ने अंदर जाने से रोक दिया। पुलिस ने अंदर जाने की जिद की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उनकी सुनने की जगह बिसरख थाने को सूचना दे दी। इसके बाद राजस्थान पुलिस को कोतवाली बुलाकर दो पुलिसकर्मियों को उनके साथ भेजा गया। इसके बाद राजस्थान पुलिस सोसाइटी में दाखिल होकर अमन के बंद फ्लैट पर नोटिस चस्पा कर लौट गई। वहीं, राजस्थान पुलिस ने कोतवाली बुलाने की वजह से अमन के फ्लैट से चले जाने का आरोप लगाया है। हालांकि, स्थानीय पुलिस ने सिरे से नकार दिया है।
दरअसल, राजस्थान के राजगढ़ में एक मंदिर को ढहाने पर एक न्यूज चैनल पर समाचार दिखाया गया था। आरोप है कि समाचार में इसे दिल्ली के जहांगीरपुरी के तोड़फोड़ अभियान का बदला बताया गया। समाचार में फर्जी विवरण दिए जाने का भी आरोप लगाया गया। इस मामले में राजस्थान की डूंगरपुर कोतवाली में देशद्रोह, धार्मिक भावनाओं को भड़काने आदि का केस दर्ज किया गया। राजस्थान में अमन चोपड़ा के खिलाफ तीन केस दर्ज किए गए, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट ने दो केस में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। इसके बाद डूंगरपुर में दर्ज केस में गैर जमानती वारंट लेकर राजस्थान पुलिस की 12 सदस्यीय टीम जिले की पुलिस को सूचना दिए बिना शनिवार को सोसाइटी के गेट पर पहुंच गई, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया। सुरक्षाकर्मियों ने इसकी सूचना बिसरख थाने में दी। इसके बाद राजस्थान पुलिस को नियमानुसार बिसरख कोतवाली में सूचना देने और स्थानीय पुलिस को साथ लेकर जाने के लिए कहा गया। राजस्थान पुलिस ने बिसरख कोतवाली पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद बिसरख पुलिस को साथ लेकर वह अमन के फ्लैट में पहुंची। फ्लैट में ताला लगा होने के कारण वह वारंट चस्पा कर लौट गई। इस दौरान बिसरख पुलिस ने वीडियो रिकार्डिंग भी की। वहीं, डूंगरपुर एसपी सुधीर जोशी का कहना है कि राजस्थान पुलिस को रोककर स्थानीय थाने में आने को कहा गया, जबकि जिला पुलिस को पहले ही पूरे मामले की जानकारी दी गई थी। ये दूसरी बार हुआ, इससे पहले भी 28 अप्रैल को राजस्थान पुलिस टीम जिले में गई थी।
28 अप्रैल को बिना वारंट के आई थी पुलिस
एसीपी सेंट्रल जोन योगेंद्र सिंह ने बताया कि राजस्थान पुलिस बिसरख कोतवाली में बिना सूचना दिए अरिहंत सोसाइटी पहुंची थी। सुरक्षाकर्मियों से सूचना मिलने के बाद टीम को नियमानुसार संबंधित थाने में सूचना देने और स्थानीय पुलिस को साथ ले जाने के लिए कहा गया। राजस्थान पुलिस ने ऐसा ही किया और वारंट चस्पा कर लौट गई। बिसरख कोतवाली के दो पुलिसकर्मी भी साथ गए थे। 28 अप्रैल को जब राजस्थान पुलिस आई थी तो गैर जमानती वारंट नहीं था। केवल पते की पुष्टि के लिए पुलिस आई थी।
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बिसरख पुलिस ने राजस्थान पुलिस की मदद की है। बिसरख पुलिस के साथ जाने के बाद ही राजस्थान पुलिस सोसाइटी में बंद फ्लैट पर नोटिस चस्पा कर लौटी है। इससे पहले वह कोतवाली में बिना सूचना दिए सोसाइटी के गेट पर पहुंची थी। - इलामारन जी., एडिशनल डीसीपी सेंट्रल जोन
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दरअसल, राजस्थान के राजगढ़ में एक मंदिर को ढहाने पर एक न्यूज चैनल पर समाचार दिखाया गया था। आरोप है कि समाचार में इसे दिल्ली के जहांगीरपुरी के तोड़फोड़ अभियान का बदला बताया गया। समाचार में फर्जी विवरण दिए जाने का भी आरोप लगाया गया। इस मामले में राजस्थान की डूंगरपुर कोतवाली में देशद्रोह, धार्मिक भावनाओं को भड़काने आदि का केस दर्ज किया गया। राजस्थान में अमन चोपड़ा के खिलाफ तीन केस दर्ज किए गए, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट ने दो केस में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। इसके बाद डूंगरपुर में दर्ज केस में गैर जमानती वारंट लेकर राजस्थान पुलिस की 12 सदस्यीय टीम जिले की पुलिस को सूचना दिए बिना शनिवार को सोसाइटी के गेट पर पहुंच गई, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया। सुरक्षाकर्मियों ने इसकी सूचना बिसरख थाने में दी। इसके बाद राजस्थान पुलिस को नियमानुसार बिसरख कोतवाली में सूचना देने और स्थानीय पुलिस को साथ लेकर जाने के लिए कहा गया। राजस्थान पुलिस ने बिसरख कोतवाली पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद बिसरख पुलिस को साथ लेकर वह अमन के फ्लैट में पहुंची। फ्लैट में ताला लगा होने के कारण वह वारंट चस्पा कर लौट गई। इस दौरान बिसरख पुलिस ने वीडियो रिकार्डिंग भी की। वहीं, डूंगरपुर एसपी सुधीर जोशी का कहना है कि राजस्थान पुलिस को रोककर स्थानीय थाने में आने को कहा गया, जबकि जिला पुलिस को पहले ही पूरे मामले की जानकारी दी गई थी। ये दूसरी बार हुआ, इससे पहले भी 28 अप्रैल को राजस्थान पुलिस टीम जिले में गई थी।
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28 अप्रैल को बिना वारंट के आई थी पुलिस
एसीपी सेंट्रल जोन योगेंद्र सिंह ने बताया कि राजस्थान पुलिस बिसरख कोतवाली में बिना सूचना दिए अरिहंत सोसाइटी पहुंची थी। सुरक्षाकर्मियों से सूचना मिलने के बाद टीम को नियमानुसार संबंधित थाने में सूचना देने और स्थानीय पुलिस को साथ ले जाने के लिए कहा गया। राजस्थान पुलिस ने ऐसा ही किया और वारंट चस्पा कर लौट गई। बिसरख कोतवाली के दो पुलिसकर्मी भी साथ गए थे। 28 अप्रैल को जब राजस्थान पुलिस आई थी तो गैर जमानती वारंट नहीं था। केवल पते की पुष्टि के लिए पुलिस आई थी।
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बिसरख पुलिस ने राजस्थान पुलिस की मदद की है। बिसरख पुलिस के साथ जाने के बाद ही राजस्थान पुलिस सोसाइटी में बंद फ्लैट पर नोटिस चस्पा कर लौटी है। इससे पहले वह कोतवाली में बिना सूचना दिए सोसाइटी के गेट पर पहुंची थी। - इलामारन जी., एडिशनल डीसीपी सेंट्रल जोन