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मांगों के समर्थन में कर्मचारियों का प्रदर्शन

Wed, 08 Jan 2020 11:21 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jan 2020 11:21 PM IST
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Protest against government for demand
नूंह। शहर के गांधी पार्क में बुधवार को विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों की इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर मुख्य रूप से मेवात मॉडल स्कूल एसोसिएशन, नगरपालिका नूंह, पंप ऑपरेटर, मिड डे मील, आईटीआई के अनुबंधित कर्मचारी, आशा कार्यकर्ता, ग्रामीण व शहरी सफाई कर्मचारी, पब्लिक हेल्थ व बिजली निगम सहित अन्य कई विभागों के कर्मचारियों ने भाग लिया। जिले में कर्मचारियों की हड़ताल का मिलाजुला असर दिखा। इस हड़ताल में हालांकि कई बैंकों के कर्मचारियों ने भी भाग लिया।
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लेकिन एसबीआई, ग्रामीण बैंक की शाखाएं खुली रही। जिससे लोगों को किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। दूसरी ओर रोडवेज विभाग के कर्मचारियों की भी इस प्रदर्शन से दूरी रही। इस कारण यातायात व्यवस्था में कोई परेशानी नहीं रही। गांधी पार्क में प्रदर्शन की अध्यक्षता सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान तैय्यब हुसैन ने की। इस दौरान उनके साथ मेवात मॉडल स्कूल एसोसिएशन के जिला प्रधान सतीश खटाना व जिला सचिव योगराज दीक्षित भी मौजूद रहे। उन्होंने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा कर्मचारियों के हितों की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है।
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वर्षों से कच्चे कर्मचारियों को पक्का नहीं किया जा रहा है, पूरे देश में लाखों अनियमित कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। मेवात मॉडल स्कूलों को लंबे समय बाद भी शिक्षा विभाग में शामिल नहीं किया जा रहा है, जबकि इन स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा 378 कर्मचारियों को 50-55 वर्ष की उम्र होने पर जबरन सेवानिवृत्त किया गया है। केंद्र सरकार की बिजली वितरण प्रणाली को पूरी तरह से निजी हाथों में दिया जा रहा है। सरकार बिजली संशोधन बिल 2018 को पारित करने की तैयारी में हैं, जोकि कर्मचारियों के खिलाफ है। सार्वजनिक क्षेत्र के दस बैंकों के विलय के साथ ही बीमा, रेलवे, रक्षा उत्पादन, कोयला, एयर इंडिया, बीएसएनएल, इस्पात सहित अन्य को प्राइवेट कंपनियों के हवाले करने की योजना बनाई जा रही है।
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न्यूनतम वेतन तय करने के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। स्थायी रोजगार के लिए सरकार के पास कोई ठोस रणनीति नहीं है। श्रम कानून में बदलाव के कारण कर्मचारियों को मर्जी से हटाना व मर्जी से लगाने की पॉलिसी से कर्मचारी हताश है। उन्होंने कहा कि सरकार को आज कर्मचारियों के हितों की रक्षा के बारे में सोचना होगा। अगर जल्द ही सरकार इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाती है, तो राष्ट्र व प्रदेश की यूनियनों के आह्वान पर अगला कदम उठाया जाएगा। इस दौरान मुख्य रूप से नफीस अहमद चंदेनी, देवेंद्र छपेड़ा, बनय सिंह संगेल, अली मोहम्मद, अनिल कुमार सहित सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे।
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