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सीएए काला कानून, तत्काल रद्द करे सरकार
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पुन्हाना। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून को असंवैधानिक करार देते हुए सोमवार को पुन्हाना खंड के गांव बिछौर में लोगों ने प्रदर्शन किया। बिछौर से शुरू हुआ पैदल और मोटरसाइकिल सवार सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं का का काफिला आठ किलोमीटर चलकर गांव सिंगार में खत्म हुआ। इस दौरान रास्ते में पड़ने वाले गांवों में सीएए के विरोध में लोगों ने जमकर नारेबाजी की। युवाओं ने सीएए और एनआरसी को काला कानून बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की।
सोमवार को विभिन्न संगठन के हजारों लोगों ने पुन्हाना खंड के बिछौर से गांव सिंगार तक करीब आठ किलोमीटर तक पैदल व मोटरसाइकिलों से विरोध प्रदर्शन किया। रास्ते में पड़ने वाले गांव मढियाकी, जखोकर सहित कई गांवों के लोगों ने प्रदर्शनकारियों की हौसलाअफजाई की। प्रदर्शन में अधिकतर संख्या युवाओं की थी। युवाओं के हाथों में तिरंगा और सीएए/एनआरसी के खिलाफ लिखे नारों की तख्तियां और जुबान पर आजादी के नारे थे। पैदल चल रहे युवाओं ने ‘लेकर रहेंगे आजादी, हिंदुस्तान जिंदाबाद, इंकलाब जिंदाबाद, सीएए कानून वापस लें, जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन में हिंदु-मुस्लिम सभी समाज के लोगों ने भाग लिया।
मेवात विकास सभा के उपाध्यक्ष रशीद एडवोकेट, बहुजन मंच के अध्यक्ष समय सिंह एडवोकेट, लिक्खी राम, सुमित कुमार, मुफ्ती सलीम, आलम गुमट, मुबारिक, आजम टिकरी, युसुफ रहपुआ, इरशाद खान सिंगार ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में नागरिकता संशोधन कानून बनाया गया है। जिसमें सरकार द्वारा धर्म के आधार पर दोहरा व्यवहार किया जा रहा है। जिसको लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सीएए देश के संविधान के खिलाफ है क्योंकि इससे आम जनता के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। सीएए के बाद संभावित एनआसी से लाखों लोग प्रभावित होने वाले हैं। उनका यह भी कहना है कि बहुत से गरीब आदमी हैं जिनके पास उनकी पैदाइशी के कोई सबूत नहीं है। एनआरसी आने पर उनको लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद भारी परेशानी उठानी पडे़गी।
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उन्होंने बताया कि नागरिकता संशोधन कानून धर्म के आधार पर बनाया गया है जो की पूरी तरह से गलत है। देश में सभी धर्मों के लोग रहते हैं, ऐसे में ऐसा कानून बनाना उचित नहीं है। जिससे भाजपा सरकार के खिलाफ लोगों में काफी रोष है। सरकार जल्द से जल्द इस कानून को वापस लेना चाहिए।
मुफ़्ती सलीम साकरस, एडवोकेट रशीद अहमद ,एडवोकेट समय सिंह बहुजन मंच, तौसीफ बिसरू, इरशाद सरपंच सिंगार, बिछोर सराफत एडवोकेट, आलम गुमट, मुबारिक पुन्हाना, आजम टीकरी, यूसुफ रहपुवा आदि प्रमुख लोग मौजूद रहे।
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सोमवार को विभिन्न संगठन के हजारों लोगों ने पुन्हाना खंड के बिछौर से गांव सिंगार तक करीब आठ किलोमीटर तक पैदल व मोटरसाइकिलों से विरोध प्रदर्शन किया। रास्ते में पड़ने वाले गांव मढियाकी, जखोकर सहित कई गांवों के लोगों ने प्रदर्शनकारियों की हौसलाअफजाई की। प्रदर्शन में अधिकतर संख्या युवाओं की थी। युवाओं के हाथों में तिरंगा और सीएए/एनआरसी के खिलाफ लिखे नारों की तख्तियां और जुबान पर आजादी के नारे थे। पैदल चल रहे युवाओं ने ‘लेकर रहेंगे आजादी, हिंदुस्तान जिंदाबाद, इंकलाब जिंदाबाद, सीएए कानून वापस लें, जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन में हिंदु-मुस्लिम सभी समाज के लोगों ने भाग लिया।
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मेवात विकास सभा के उपाध्यक्ष रशीद एडवोकेट, बहुजन मंच के अध्यक्ष समय सिंह एडवोकेट, लिक्खी राम, सुमित कुमार, मुफ्ती सलीम, आलम गुमट, मुबारिक, आजम टिकरी, युसुफ रहपुआ, इरशाद खान सिंगार ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में नागरिकता संशोधन कानून बनाया गया है। जिसमें सरकार द्वारा धर्म के आधार पर दोहरा व्यवहार किया जा रहा है। जिसको लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सीएए देश के संविधान के खिलाफ है क्योंकि इससे आम जनता के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। सीएए के बाद संभावित एनआसी से लाखों लोग प्रभावित होने वाले हैं। उनका यह भी कहना है कि बहुत से गरीब आदमी हैं जिनके पास उनकी पैदाइशी के कोई सबूत नहीं है। एनआरसी आने पर उनको लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद भारी परेशानी उठानी पडे़गी।
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उन्होंने बताया कि नागरिकता संशोधन कानून धर्म के आधार पर बनाया गया है जो की पूरी तरह से गलत है। देश में सभी धर्मों के लोग रहते हैं, ऐसे में ऐसा कानून बनाना उचित नहीं है। जिससे भाजपा सरकार के खिलाफ लोगों में काफी रोष है। सरकार जल्द से जल्द इस कानून को वापस लेना चाहिए।
मुफ़्ती सलीम साकरस, एडवोकेट रशीद अहमद ,एडवोकेट समय सिंह बहुजन मंच, तौसीफ बिसरू, इरशाद सरपंच सिंगार, बिछोर सराफत एडवोकेट, आलम गुमट, मुबारिक पुन्हाना, आजम टीकरी, यूसुफ रहपुवा आदि प्रमुख लोग मौजूद रहे।